Year Ender 2021 : रेलवे को करनी पड़ी कड़ी मशक्कत, इतिहास में पहली बार थमे पहिए

पुनः संशोधित गुरुवार, 30 दिसंबर 2021 (21:49 IST)
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नई दिल्ली। (Coronavirus) के प्रकोप के कारण इतिहास में पहली बार अपने पहिए थमने को मजबूर हुए भारतीय रेलवे को 2021 में नुकसान से उबरने और अपनी व्यवस्था को फिर से ठीक करने के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ी।
रेलवे पिछले दो वर्षों से अपने माल ढुलाई राजस्व पर पूरी तरह से निर्भर रहा है। इसका यात्री खंड 2020 से घाटे में चल रहा है और इस वर्ष की पहली छमाही के दौरान प्रतिबंधों के हटने के साथ यह धीरे-धीरे गति प्राप्त कर रहा है।

वित्तीय स्थिति : नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (कैग) की एक हालिया रिपोर्ट में कहा गया है कि भारतीय रेलवे का 2019-2020 में 98.36 प्रतिशत का परिचालन अनुपात इसके वास्तविक वित्तीय प्रदर्शन को नहीं दर्शाता है और यदि पेंशन भुगतान पर वास्तविक व्यय को ध्यान में रखा जाए, तो अनुपात 114.35 प्रतिशत होगा।

कैग ने यह भी उल्लेख किया कि राष्ट्रीय परिवाहक को यात्री और अन्य कोचिंग शुल्कों पर फिर से विचार करने की आवश्यकता है ताकि चरणबद्ध तरीके से परिचालन लागत की वसूली की जा सके और यह अपनी मुख्य गतिविधियों में नुकसान को कम कर सके। यह ऐसे समय है जब राष्ट्रीय परिवाहक ने अपने परिचालन अनुपात को 95 प्रतिशत तक कम करने का लक्ष्य रखा है।

पिछले साल, रेलवे अपने खर्च को कम करने और माल ढुलाई से उत्पन्न राजस्व के माध्यम से यातायात संबंधी कमी को पूरा करने में सक्षम था। पेंशन देनदारियों में गिरावट से रेलवे के मौजूदा वित्त वर्ष में 51,000 करोड़ रुपए से अधिक के बड़े पेंशन बिल को द्वारा ऋण में परिवर्तित किए जाने से मदद मिली है।

रेलवे ने जहां अधिकांश रियायतों को बहाल न करके पैसे की बचत की, वहीं उसने विशेष ट्रेनों के किराए में मामूली वृद्धि और प्लेटफॉर्म टिकट की कीमतों में बढ़ोतरी के माध्यम से भी कमाई की। इस क्रम में 18 दिसंबर तक माल यातायात से इसका राजस्व 98075.12 करोड़ रुपए रहा है जबकि वित्त वर्ष 2021-22 के लिए इसका लक्ष्य 137810 करोड़ रुपए है। यात्री खंड में रेलवे ने 26871.23 करोड़ रुपए कमाए हैं जबकि वित्त वर्ष के लिए इसका अनुमानित लक्ष्य 61000 करोड़ रुपए है।

रेलवे की बड़ी टिकट परियोजनाएं : यह वर्ष उन मुद्दों को हल करने संबंधी संघर्ष के लिए भी जाना जाएगा जिनकी वजह से देरी होती थी और जिसके परिणामस्वरूप बड़ी टिकट परियोजनाओं के लिए समय सीमा छूट जाती थी। 81,000 करोड़ रुपए का डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर, रेलवे की सबसे बड़ी विकासात्मक परियोजना, जो वर्तमान में चल रही है, को दिसंबर 2021 तक पूरा किया जाना था। नई समयसीमा अब जून 2022 है, जिसके बारे में अधिकारियों ने कहा कि इसमें और देरी हो सकती है।

इसके बाद, अहमदाबाद और मुंबई के बीच महत्वाकांक्षी बुलेट ट्रेन परियोजना है। भूमि अधिग्रहण के मुद्दों और फिर महामारी में फंसी यह परियोजना अब लागत में वृद्धि के साथ प्रभावित हुई है। इस परियोजना की समयसीमा दिसंबर 2023 थी, लेकिन अब इसे 2026 तक बढ़ा दिया गया है।

कुछ मार्गों को निजी संस्थाओं को सौंपने के लिए रेलवे की एक अन्य प्रमुख परियोजना इस क्षेत्र से रुचि की कमी के कारण विफल हो गई है। मंत्रालय ने लगभग चार महीने पहले निजी रेलगाड़ियों के लिए 30,000 करोड़ रुपए की बोलियों को रद्द कर दिया था, क्योंकि उसे केवल दो प्रस्ताव मिले थे- एक आईआरसीटीसी से और दूसरा मेघा इंजीनियरिंग एंड इन्फ्रास्ट्रक्चर से।

शुरू में, राष्ट्रीय परिवाहक ने अपने नेटवर्क पर विभिन्न चरणों में निजी रेलगाड़ियों को शुरू करने की योजना बनाई थी। हालांकि सूत्र बताते हैं कि राष्ट्रीय ट्रांसपोर्टर योजना को लेकर एक और प्रयास करेगा तथा इसने इस पर निजी क्षेत्र के साथ विचार-विमर्श शुरू कर दिया है।

वंदे भारत जैसी अत्याधुनिक ट्रेनों की शुरुआत किए जाने में निविदा रद्द होने के कारण देरी हुई है और इसे गति तभी मिली जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस के अपने संबोधन में 15 अगस्त, 2023 तक देश को 75 ऐसी ट्रेन देने का वादा किया।

ऐसे में जब यात्री नई रेलगाड़ियों में यात्रा करने की कल्पना कर रहे हैं, रेलवे ने इस बार ऐसी 58 ट्रेनों के लिए अभी नई निविदाएं जारी की हैं। ऐसी ही एक ट्रेन के प्रोटोटाइप के अप्रैल 2022 में पटरी पर आने की उम्मीद है।

यात्रियों के सवाल : वरिष्ठ नागरिकों के लिए रियायतें कब बहाल होंगी? क्या वेटिंग लिस्ट खत्म होगी? क्या हमें बेडरोल मिलेंगे? यात्रियों के ये कुछ प्रश्न हैं जो रेलवे के लिए हैं।

हालांकि राष्ट्रीय परिवाहक ने रेलगाड़ियों में पका हुआ भोजन परोसने की सुविधा बहाल कर दी है, लेकिन अधिकांश श्रेणियों में रियायतें बहाल करना अभी बाकी है। 22 मार्च, 2020 और सितंबर 2021 के बीच, लगभग चार करोड़ वरिष्ठ नागरिकों ने बिना किसी रियायत के रेलगाड़ियों में यात्रा की है।

इस अवधि के दौरान, कोरोनावायरस संबंधी लॉकडाउन के कारण कई महीनों तक ट्रेन सेवाएं निलंबित रहीं। मार्च 2020 से निलंबित की गईं रियायतें आज तक निलंबित हैं।

रेलवे ने हाल ही में रेलगाड़ियों में भोजन परोसना शुरू किया है, लेकिन अभी इसने यह कहते हुए वरिष्ठ नागरिकों के लिए बेडरोल या रियायतें प्रदान करने पर कोई संज्ञान नहीं लिया है कि कोरोनावायरस संकट को देखते हुए सावधानी बरतने की जरूरत है।

इस कड़ी में एक और मुद्दा है जो यात्रियों के लिए एक बारहमासी शिकायत बना हुआ है, वह प्रतीक्षा सूची के टिकट से संबंधित है तथा आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2021-22 के पहले छह महीनों में 52 लाख से अधिक यात्री सीट आरक्षण चार्ट को अंतिम रूप मिलने के बाद प्रतीक्षा सूची में थे और वे रेलगाड़ियों से यात्रा नहीं कर सके जिससे व्यस्त मार्गों पर और ट्रेनों की आवश्यकता का संकेत मिलता।जहां तक ​​नई ट्रेनों का सवाल है, रेलवे ने पिछले पांच वर्षों में सिर्फ 800 से अधिक नई ट्रेनों की शुरुआत की है।

भर्ती मुद्दा : रेलवे भर्ती बोर्ड की ओर से भर्ती प्रक्रिया में होने वाली देरी का विरोध करने के लिए नौकरी चाहने वालों ने अब ट्विटर जैसे सोशल मीडिया मंचों का सहारा लिया है। इस कड़ी में एक अभ्यर्थी ने ट्वीट किया, 2019 में एक करोड़ से अधिक छात्रों ने रेलवे परीक्षा के लिए आवेदन किया था। तीन साल हो गए हैं, परीक्षा नहीं हुई है। मैं सरकार से उनके भविष्य से नहीं खेलने का आग्रह करता हूं। रेलवे को ग्रुप डी परीक्षा की तारीख तुरंत घोषित करनी चाहिए।

आगे क्या : रेलवे के लिए परिवर्तनकारी डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर का चालू होना होगा। डीएफसी, गति और उच्च वहन क्षमता के अपने फायदे के साथ, माल ढुलाई शुल्क को 50 प्रतिशत तक कम करने में भी मदद कर सकता है। अधिकारियों का कहना है कि ग्राहकों पर कम ढुलाई शुल्क डाला जाएगा और यह योजना हर साल 15,000 करोड़ रुपए का राजस्व उत्पन्न करने की है। यह भीतरी इलाकों को औद्योगिक केंद्रों से भी जोड़ेगी और रेलवे को देशभर में माल के परिवहन के किफायती साधन के रूप में जाने देगी।

यात्रियों के अनुभव के लिए, वंदे भारत ट्रेन यात्रा का एक नया अनुभव प्रदान करेंगी और रेलयात्रा को लेकर अच्छी भावना उत्पन्न करेंगी। इस साल कुछ रेलगाड़ियों में पेश किए गए नए एसी थ्री टियर कोच आने वाले दिनों में किफायती लेकिन आरामदायक यात्रा की तलाश करने वालों के लिए ऐसा अनुभव प्रदान करेंगे जो पहले कभी नहीं देखा गया।(भाषा)



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