धार्मिक घटनाक्रम 2021 : बहुत कुछ घटा इस जाते वर्ष में लेकिन अच्छा भी हुआ

Important religious events of the year 2021
Last Updated: गुरुवार, 23 दिसंबर 2021 (12:59 IST)
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Important religious events of the year 2021
वर्ष 2021 में जहां धार्मिक कट्टरता से लोग परेशान रहे वहीं लाखों लोगों की धर्म के प्रति आस्था भी खत्म हुई। वाद-विवाद के दौर में धर्म और ज्योतिष पर कई प्रश्नचिन्ह लगाए गए। कई लोगों ने धर्म को छोड़ा तो कई लोगों ने नास्तिकता की राह को पकड़ा। इस बीच धार्मिक क्षेत्रों के विकास भी गंगा भी बही और विध्वंस भी हुआ। आओ एक नजर डालते हैं वर्ष 2021 की धार्मिक घटनाओं पर।


1. अयोध्या में मंदिर निर्माण के लिए चंदा उगाई अभियान और नींव की खुदाई : 9 नवंबर 2019 को सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद 5 अगस्त 2020 में अयोध्या में मंदिर निर्माण के लिए भूमिपूजन प्रारंभ हुआ और इसके बाद से ही अयोध्या में मंदिर निर्माण को लेकर ऑनलाइन चंदा देना भी प्रारंभ किया गया। वर्ष 2021 में अयोध्या में राम मंदिर के भव्य निर्माण की तेजी से शुरुआत हुई। सबसे खास बात यह है कि राम मंदिर निर्माण के लिए नींव खुदाई के दौरान राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को कई महत्वपूर्ण प्राचीन धार्मिक खंडित मूर्ति, मंदिर के अवशेष आदि प्राप्त हुए। इसी वर्ष प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 11 दिसंबर, 2021 को उत्तरप्रदेश के बलरामपुर में 'सरयू नहर राष्ट्रीय परियोजना' का उद्घाटन किया।
2. श्री नारायण गुरु : उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने 22 जनवरी, 2021 को प्रो. जी.के. शशिधरन द्वारा श्री नारायण गुरु की कविताओं के अंग्रेजी अनुवाद 'नॉट मेनी, बट वन' (Not Many, But One) (दो संस्करण) की लिखी हुई पुस्तक का वर्चुअल माध्यम में विमोचन किया। श्री नारायण गुरु (1854-1928) केरल के एक दार्शनिक, आध्यात्मिक नेता और समाज सुधारक थे। वे मंदिर प्रवेश आंदोलन में सबसे अग्रणी थे और अछूतों के सामाजिक भेदभाव के खिलाफ थे।
3. लोकप्रिय भजन गायक नरेन्द्र चंचल का निधन : लोकप्रिय भजन गायक नरेन्द्र चंचल का 22 जनवरी, 2021 को नई दिल्ली में निधन हो गया। वे 80 वर्ष के थे। चंचल अपने धार्मिक गीतों और भजनों के लिए जाने जाते थे। उन्होंने 'बॉबी' के लिए 'सर्वश्रेष्ठ पुरुष गायक का फिल्मफेयर पुरस्कार' भी जीता था।

4. 'महाराष्ट्र के ज्योतिर्लिंगम मंदिर : महाराष्ट्र में पर्यटन मंत्रालय ने 11 दिसंबर, 2021 को 'देखो अपना देश' श्रृंखला के तहत 'महाराष्ट्र के ज्योतिर्लिंगम मंदिर' को देखने की योजना लॉन्च की। महाराष्ट्र में त्रियंबकेश्वर (त्र्यंबकेश्वर), भीमाशंकर, परली बैजनाथ, घृष्णेश्वर और औंधा नागनाथ महाराष्ट्र राज्य के प्रमुख ज्योतिर्लिंग हैं।
5. काशी विश्‍वनाथ कॉरिडोर का शुभारंभ : 13 दिसंबर, 2021 को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वाराणसी में प्राचीन काशी विश्वनाथ मंदिर को गंगा के घाटों से जोड़ने वाले 'काशी विश्वनाथ कॉरिडोर' का उद्घाटन किया। परियोजना का पहला चरण लगभग 339 करोड़ रुपए की लागत से निर्मित हुआ है। इसमें पर्यटक सुविधा केंद्र, मुमुक्षु भवन, भोगशाला, सिटी म्यूजियम, व्यूइंग गैलरी और फूड कोर्ट समेत कुल 23 भवनों का उद्घाटन किया गया। यह कॉरिडोर 5,000 हैक्टेयर के क्षेत्र में बनाया गया है। काशी विश्वनाथ मंदिर की गंगा तक सीधी पहुंच नहीं थी, परंतु अब गंगा में स्नान करके सीधे मंदिर पहुंच सकते हैं। घाट से ही बाबा के शिखर के दर्शन होते हैं।
6. ओडिशा में मंदिर परिक्रमा योजना : 24 नवंबर 2021 को ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक की उपस्थिति में महत्वाकांक्षी 'श्री मंदिर परिक्रमा परियोजना' की आधारशिला रखी गई। इस परियोजना के तहत 12वीं शताब्दी के श्री जगन्नाथ मंदिर, पुरी से 75 मीटर के दायरे में आने वाले क्षेत्रों को विकसित किया जाएगा।

7. राम वनगमन पर्यटन परिपथ परियोजना : छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने 7 अक्टूबर, 2021 को रायपुर के पास चंदखुरी में राम वनगमन पर्यटन परिपथ परियोजना के पहले चरण का उद्घाटन किया। 133.55 करोड़ की लागत से विकसित किए जा रहे पर्यटन परिपथ में पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए 9 स्थलों का विकास किया जा रहा है। ऐसा माना जाता है कि इस मार्ग का प्रयोग भगवान राम ने अपने 14 साल के वनवास काल के दौरान किया था।
8. सूर्य मंदिर के जीर्णोद्धार की योजना : केंद्र शासित प्रदेश जम्मू और कश्मीर में अनंतनाग से 5 मील की दूरी पर स्थित मार्तंड सूर्य मंदिर के जीर्णोद्धार की योजना बनी है। ललितादित्य मुक्तापीड ने 8वीं शताब्दी में मंदिर का निर्माण कराया था जिसे मुस्लिम शासक सिकंदर शाह मिरी के आदेश पर नष्ट कर दिया गया था। इसी के साथ ही स्थानीय मुस्लिमों, सिखों और कश्मीरी पंडितों ने मिलकर पाक अधिकृत कश्मीर में स्थित शारदा मठ के भी जीर्णोद्धार की पहल की है।
9. बौद्ध सर्किट : अक्टूबर में केंद्र सरकार ने बौद्ध सर्किट के लिए प्रमुख बुनियादी ढांचे को आगे बढ़ाने की योजना बनाई। पर्यटन मंत्रालय ने 5 अक्टूबर, 2021 को बौद्ध पर्यटन की क्षमता को बढ़ावा देने के लिए बोधगया में एक सम्मेलन का आयोजन भी किया। करोड़ों रुपयों की इस योजना के तहत बिहार और उत्तरप्रदेश में बोधगया, नालंदा, राजगीर, वैशाली, सारनाथ, श्रावस्ती, कुशीनगर, कौशाम्बी, संकिसा और कपिलवस्तु के स्थलों को और विकसित करने की योजना है। बोधगया में एक 'सांस्कृतिक केंद्र' का निर्माण कार्य भी चल रहा है।
10. सोमनाथ मंदिर : अगस्त 2021 में केंद्र में नरेन्द्र मोदी की सरकार ने सोमनाथ मंदिर के सौंदर्यीकरण के लिए 3 बड़े प्रोजेक्टों का उद्घाटन किया। इसके तहत पार्वती माता मंदिर का शिलान्यास, दर्शन, पथ और एग्जीबिशन सेंटर का लोकार्पण भी शामिल है।
11. केदारनाथ मंदिर का जीर्णोद्धार और शंकराचार्य की प्रतिमा का लोकार्पण : केदारनाथ, बद्रीनाथ, यमुनोत्री और गंगोत्री को जोड़ने के लिए एक बड़े प्रोजेक्ट का प्रारंभ किया गया। 2016 में इसकी नींव रखी थी और अब कार्य प्रगति पर है। 2025 तक कार्य पूर्ण हो जाएगा। हाल ही में केदारनाथ मंदिर का जीर्णोद्धार कार्य की मोदी ने समीक्षा की। केदारनाथ धाम पुनर्निर्माण का काम लगभग 80 फीसदी पूरा हो चुका है। यहां अब 24 घंटे बिजली रहेगी। यहां पर आदिशंकराचार्य के समाधि स्थल और मूर्ति का कार्य पूर्ण किया गया जिसका पीएम मोदी ने नवंबर में लोकार्पण किया।
12. नरेन्द्र गिरि महाराज का निधन : इस वर्ष 20 सितंबर 2021 को अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेन्द्र गिरि महाराज की फांसी की खबर ने सभी को हिला दिया। मौके से एक सुसाइड नोट भी मिला है जिसमें अपमान से आहत होकर कदम उठाने समेत अन्य बातें लिखी हुई पाई गईं। 22 सितंबर को उन्हें भू-समाधि दे दी गई। 11 मार्च को ब्रह्माकुमारी संस्थान की प्रमुख दादी हृदयमोहिनी का निधन हुआ था। इसके बाद 15 अप्रैल को हरिद्वार कुंभ में शामिल महामंडलेश्वर कपिल देव का कोरोना से निधन हो गया था।
13. कट्टरपंथ रहा हावी : पिछले वर्ष की अपेक्षा इस वर्ष भी पाकिस्तान और बांग्लादेश में हिन्दू मंदिरों पर हमला किया गया। कई मंदिरों को तोड़ा गया। बांग्लादेश में इस्कॉन मंदिर में हुई तोड़फोड़ और दुर्गा पांडालों में हुई तोड़फोड़ भी चर्चा का विषय बनी रही। अगस्त के मध्य में अफगानिस्तान पर तालिबान के कब्जे के बाद यहां के अल्पसंख्‍यकों को अपना मुल्क छोड़कर भारत और पाकिस्तान में शरण लेना पड़ी। वर्ष 2021 में जहां हमने अफगानिस्तान सहित दुनिया के कई इस्लामिक देशों में कट्टरपंथ के चलते अस्पसंख्‍यों पर अत्याचार को देखा वहीं भारत में ही धार्मिक कट्टरपंथ के चलते कई लोगों की जान चली गई। बांग्लादेश और पाकिस्तान में हिन्दू मंदिरों को तोड़ा गया तो यहां पर बौद्धों के खिलाफ भी हिंसा हुई।
14. निहंग सिख चर्चा में रहे : दूसरी ओर सिंघु बॉर्डर पर 15 अक्टूबर, शुक्रवार को 1 व्यक्ति की बेरहमी से हत्या करने के मामले में निहंग सिख एक बार फिर चर्चा में आ गए हैं। पिछले साल अप्रैल 2020 में पंजाब के पटियाला में तलवार से पुलिस वाले का हाथ काटने के बाद भी ये निहंग खबरों में आए थे। लेकिन हमें इन 2 घटनाओं से निहंग सिखों के बारे में कोई राय कायम नहीं करना चाहिए। हाल ही में पंजाब के कपूरथला में गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी के आरोप के चलते 1 व्यक्ति की हत्या कर दी गई।
15. इस्लाम छोड़ा : वर्ष 2021 में कई बड़ी हस्तियों के साथ ही हजारों लोगों ने इस्लाम को छोड़कर या तो नास्तिकता का रास्ता अपनाया या दूसरे धर्म को अपना लिया। हाल ही में शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड के पूर्व चेयरमैन वसीम रिजवी ने इस्लाम धर्म को छोड़कर हिन्दू धर्म अपना लिया। इसके बाद केरल निवासी मलयाली फिल्म निर्देशक अली अकबर ने भी ​इस्लाम धर्म छोड़कर हिन्दू धर्म अपना लिया। इस्लाम छोड़ने वाले भारतीय ही नहीं, कई ईरानी, सऊदी, ब्रिटेनी, अमेरिकन और पाकिस्तानी भी हैं। पाकिस्तान में जन्मे आज के कई यूट्यूबर रोज अपने पूर्व मुस्लिम (Ex Muslim) होने की घोषणा गर्व के साथ करते हैं और विदेश में अज्ञात स्थानों से प्रसारण करते हुए उलेमाओं और मुफ्तियों के सामने प्रतिदिन कुछ प्रश्न बार-बार उठा रहे हैं। हाल ही में इंडोनेशिया के पूर्व राष्ट्रपति सुकर्णो की बेटी सुकमावती सुकर्णोपुत्री ने भी इस्लाम छोड़कर हिन्दू धर्म अपना लिया है।
16. नास्तिकता और विज्ञान की ओर झुकाव बढ़ा : वर्ष 2020 के साथ ही 2021 भी पूरी दुनिया के लिए संकटों से भरा रहा है। एक ओर जहां कोरोनावायरस के चलते दुनिया में लाखों लोगों की जान ही नहीं गई बल्कि जीवन और अर्थव्यवस्था भी बिलकुल ठप हो गई वहीं तूफान, भूख, भूकंप, आग, ग्लोबल वॉर्मिंग और आतंक से भी लोग त्रस्त रहे। संकट के इस दौर में कई लोगों का धर्म की ओर झुकाव बढ़ा तो कई लोगों के मन में धर्म और ज्योतिष के प्रति अनास्था हो गई। उनकी दृष्‍टि में धर्म और ज्योतिष एक छलावा साबित हुआ। मंदिर, चर्च आदि सभी जगहों पर की गईं सारी प्रार्थनाएं असफल सिद्ध हुई हैं। हालांकि यह भी देखा गया है कि अब पहले की अपेक्षा लोग धर्म से ज्यादा अध्यात्म या कहें कि धर्म से ज्यादा धार्मिकता की ओर झुकने लगे हैं। यह सही है कि दुनिया में कट्टरता बढ़ी है, परंतु अब सभी धर्म के लोग एक ऐसे विश्‍वास की ओर बढ़ रहे हैं, जो सांप्रदायिकता को छोड़कर अध्यात्म और ध्यान की बात करता है। वह जो लोग सत्य को खोजने के मार्ग पर हैं, वे अब दूसरे धर्मों को भी पढ़, समझ और जान रहे हैं और वे अब एक सच्चे मार्ग की तलाश में हैं।
17. अयोध्या के बाद अब काशी और मथुरा मुक्ति की बात होने लगी : अयोध्या के आसपास से मस्जिद के हट जाने और भव्य मंदिर के निर्माण की राह पकड़ने के बाद काशी विश्वनाथ मंदिर के कॉरिडोर के उद्घाटन के दौरान अब काशी और मथुरा के स्थान को मस्जिद से मुक्त करने की बात भी चल पड़ी है। लोग अब इसकी मांग करने लगे हैं।

18. पाकिस्तान में प्राचीन बौद्ध मंदिर मिला : हाल ही में उत्तर-पश्चिमी पाकिस्तान में सबसे पुराने बौद्ध पूजा स्थलों में से एक के अवशेष खोजे गए। इन अवशेषों की खोज इतालवी पुरातत्वविदों ने की। उत्तर-पश्चिमी पाकिस्तान में पाए गए बौद्ध मंदिर के अवशेष करीब 300 ईसा पूर्व के हैं। इन खंडहरों की खोज इटली के पुरातत्वविदों ने स्वात के एक कस्बे में की है। खैबर पख्तूनख्वाह प्रांत के स्वात जिले में बौद्ध धर्म से जुड़ीं ढाई हजार के करीब कलाकृतियां भी मिली हैं। विशेषज्ञ इस खोज को गांधार सभ्यता की सबसे महत्वपूर्ण खोजों में से एक मानते हैं। यह क्षेत्र ऐतिहासिक रूप से गांधार साम्राज्य का हिस्सा था।
19. धार्मिक पर्यटन : लॉकडाउन के चलते पिछले वर्ष 2020 की अपेक्षा हालांकि इस वर्ष 2021 में मंदिर कम ही बंद रहे लेकिन दूसरी लहर की दहशत के चलते कई बड़े मंदिरों और तीर्थस्थानों पर श्रद्धालुओं के आने-जाने पर रोक रही जिसके चलते धार्मिक पर्यटन को भी बहुत नुकसान पहुंचा। हालांकि धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार ने बहुत कुछ किया। जैसे चारधाम सड़क निर्माण योजना, राम वनगमन तीर्थ योजना, बौद्ध सर्किट, काशी विश्‍वनाथ कॉरिडोर, सोमनाथ और केदारनाथ की विकास परियोजना आदि। इसके साथ ही धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉर्पोरेशन (आईआरसीटीसी) ने भी श्री रामायण यात्रा टूर शुरू किए।
20. हरिद्वार महाकुंभ : कोरोनाकाल के बीच हरिद्वार में महाकुंभ का नियमों के तहत आयोजन किया गया। यह पूर्ण कुंभ था जिसका आयोजन भव्य पैमाने पर किया गया। परंतु कुंभ को लंबा चलाने के बजाय कड़े नियमों के साथ संक्षिप्त में ही इसका समापन कर दिया गया। हरिद्वार में 2021 में होने जा रहे कुंभ का आयोजन इस बार साढ़े 3 महीने के बजाय केवल 48 दिन का रहा। वैसे कुंभ का प्रारंभ 14 जनवरी से ही हो चला था, परंतु शाही स्नान की तारीखों में ही स्नान हुआ और 11 मार्च 2021 से कुंभ प्रारंभ करके 27 अप्रैल को चैत्र पूर्णिमा पर शाही स्नान के साथ कुंभ का समापन कर दिया गया।



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