मंगलवार, 19 अक्टूबर 2021
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हे शारदे माँ.. : वसंत पंचमी पर इस वंदना से प्रसन्न करें मां सरस्वती को

मंगलवार,फ़रवरी 16, 2021
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सृष्टि की रचना का कार्य भगवान विष्णु ने ब्रह्मा जी को दिया। सृष्टि निर्माण के बाद उदासी से भरा वातावरण देख वे विष्णु जी के पास गए और सुझाव मांगा।
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16 फरवरी 2021 को वसंत पंचमी पर सर्वार्थ सिद्धि, अमृत सिद्धि तथा रवियोग एक साथ हैं... आइए जानते हैं राशि अनुसार क्या उपाय करें...
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ज्ञानदायिनी मां सरस्वती विशेष बुद्धि और विद्या का वरदान दें, इस प्रकार कामना करते हुए आराधना करें...
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त्रिदेवियों में से एक माता सरस्वती की पूजा वसंत पंचमी के दिन होती है। वसंत पंचमी के दिन को इनके जन्मोत्सव के रूप में भी मनाते हैं। देवी सरस्वती का वर्ण श्‍वेत है। परंतु पुराणों में 2 सरस्वती के होने का उल्लेख मिलता है। आओ जानते हैं इस रहस्य को।
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शास्त्रों के अनुसार, वसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती का जन्म हुआ था। वसंत पंचमी के दिन क्या करना चाहिए और क्या नहीं-
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वीणावादिनी, मंद-मंद मुस्कुराती, हंस पर विराजमान होकर मां सरस्वती मानव जीवन के अज्ञान को दूर कर ज्ञान के प्रकाश से आलोकित करती हैं। पढ़ें संपूर्ण सरस्वती चालीसा :
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मां सरस्वती यंत्र को शुभ मुहूर्त में चांदी या कांस्य की थाली में, केसर की स्याही से, अनार की कलम से लिखकर सविधि पूजन कर माता सरस्वतीजी की आरती करें।
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माता सरस्वती की पूजा-अर्चना आदि करने से मन शांत होता है व वाणी में अच्छा निखार आता है।
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वसंत/ बसंत पंचमी का पर्व हर साल माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता है। प्राचीनकाल से ही इस दिन माता सरस्वती की पूजा का प्रचलन रहा है। आओ जानते हैं कि वसंत पंचमी को मनाने के क्या-क्या है और क्या कर सकते हैं इस दिन।
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ॐ जय सरस्वती माता, जय जय सरस्वती माता। सद्‍गुण वैभव शालिनी, त्रिभुवन विख्याता॥ जय..... चंद्रवदनि पद्मासिनी, ध्रुति मंगलकारी।
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ऐसे व्यक्ति जिन्हें अपनी राशि इत्यादि के बारे में शंका या भ्रम हो, वे स्फटिक माला से यथाशक्ति 'ॐ ऐं सरस्वत्यै नम:' का जप कर कन्याओं को दूध से बनी मिठाई खिलाएं।
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गुप्त नवरात्रि (माघी) की पंचमी को माता सरस्वती का पूजन किया जाता है। इस दिन उनका पूजन-अर्चन तथा मंत्र जाप करने का अनंत गुना फल मिलता है।
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16 फरवरी को वसंत पंचमी है। यह दिन देवी सरस्वती के जन्मोत्सव यानी वसंत पंचमी के नाम से प्रसिद्ध है। पौराणिक शास्त्रों इस दिन उनकी पूजा-अर्चना करने का विधान बताया गया है।
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सरस्वती के नाम से, कलुष भाव हो अंत। शब्द सृजन होवे सरस, रसना हो रसवंत।। वीणापाणि मां मुझको, दे दो यह वरदान।
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जो विद्या की देवी भगवती सरस्वती कुन्द के फूल, चंद्रमा, हिमराशि और मोती के हार की तरह धवल वर्ण की है और जो श्वेत वस्त्र धारण करती है,
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हे हंसवाहिनी ज्ञानदायिनी अम्ब विमल मति दे। अम्ब विमल मति दे॥ जग सिरमौर बनाएं भारत, वह बल विक्रम दे। वह बल विक्रम दे॥
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वसंत (बसंत) पंचमी का त्योहार माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी को मनाया जाता है। इस दिन मां सरस्वती की पूजा का विधान है। इस बार वसंत (बसंत) पंचमी का त्योहार 16 फरवरी 2021 को है।
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हिन्दू मान्यता के अनुसार वसंत पंचमी को अबूझ मुहूर्त माना जाता है। इस दिन बिना मुहूर्त जाने शुभ और मांगलिक कार्य किए जाते हैं। वसंत पंचमी परंपरागत त्योहार होने के कारण कई प्राचीन मान्यताएं
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वसंत पंचमी का शुभ मुहूर्त इस बार 16 फरवरी को सुबह 3 बजकर 36 पर प्रारंभ होकर 17 फरवरी 2021 को सुबह 5.46 तक रहेगा।
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