UP सरकार के मंत्री राकेश सचान आर्म्स एक्ट में दोषी पाए जाने के बाद हुए फरार

पुनः संशोधित रविवार, 7 अगस्त 2022 (22:55 IST)
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कानपुर। कानपुर की एक अदालत से ‘मुचलका’ भरे बिना उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री के 'अदालत कक्ष से ‘गायब’ होने के मामले में रविवार को प्रारंभिक जांच शुरू कर दी गई है। सचान को तीन दशक पुराने मामले में दोषी पाया गया था, सजा की मात्रा तय होने से पहले शनिवार को कानपुर की एक अदालत से "जमानत बांड प्रस्तुत किए बिना" गायब होने का आरोप लगाया गया।

कानपुर के पुलिस आयुक्त बीपी जोगदंड ने कहा कि सहायक पुलिस आयुक्त (कोतवाली) अशोक कुमार सिंह को प्राथमिकी दर्ज करने से पहले पुलिस को दी गई लिखित शिकायत में मंत्री के खिलाफ लगाए गए आरोपों की जांच करने के लिए कहा गया है।

अदालत के जानकार सूत्रों ने कहा कि निचली अदालत के दोषसिद्धि के आदेश के खिलाफ सत्र अदालत में अपील करने के लिए उप्र के मंत्री सोमवार को जमानत के लिए अदालत में पेश हो सकते हैं। उन्‍होंने कहा कि प्राथमिकी दर्ज करने के बजाय, प्रारंभिक जांच को लेकर जानबूझकर मंत्री को पर्याप्त समय प्रदान करने का आदेश दिया गया है, ताकि वह कानूनी सुरक्षा प्राप्त करने के लिए जमानत बांड प्रस्तुत कर सकें।
सचान ने फोन पर पीटीआई से बातचीत करते हुए कहा कि वरिष्ठ वकीलों की एक टीम पूरे प्रकरण का जायजा लेने के लिए संबंधित अदालत में है और वह उसी के अनुसार इस मुद्दे से निपटेंगे। सचान ने हालांकि इस बात से पूरी तरह अनभिज्ञता जाहिर की कि तीन दशक पुराने आर्म्स एक्ट मामले में शनिवार को अतिरिक्त मुख्य मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट-तीन की अदालत ने उन्हें दोषी ठहराया या नहीं।

मंत्री ने आगे कहा कि जो भी हो वह अदालत के फैसले का सम्मान करेंगे। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि शनिवार की रात अदालत की रीडर कामिनी ने मंत्री राकेश सचान के खिलाफ कोतवाली पुलिस में लिखित शिकायत दी है। शिकायत में कहा गया है कि मंत्री सचान से संबंधित अदालत के हथियार मामले की फाइल उनके वकील के पास थी, जब उन्होंने आदेश पत्र और दोषसिद्धि आदेश सहित कुछ कागजात लिए और अचानक अदालत से गायब हो गए।
सचान को तीन दशक पुराने आर्म्स एक्ट मामले में दोषी पाया गया था, सजा की मात्रा तय होने से पहले शनिवार को कानपुर की एक अदालत से "जमानत बांड प्रस्तुत किए बिना" गायब होने का आरोप लगाया गया। हालांकि मंत्री ने गायब होने के आरोप से इनकार करते हुए दावा किया कि उनका मामला "अंतिम फैसले के लिए सूचीबद्ध नहीं था"।

अभियोजन अधिकारी (पीओ) ऋचा गुप्ता ने कहा कि सचान दोषी ठहराए जाने के तुरंत बाद अदालत कक्ष से चले गए, जब अदालत ने बचाव पक्ष के वकील से सजा की मात्रा पर बहस करने को कहा। अधिकारी ने कहा कि मंत्री के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का निर्णय वरिष्ठ न्यायिक अधिकारियों के साथ मैराथन बैठक के बाद लिया गया था, यह मानते हुए कि बिना कार्रवाई के उन्हें छोड़ने से पीठासीन अधिकारी को परेशानी हो सकती है।
गुप्ता ने मामले की जानकारी देते हुए बताया कि वर्ष 1991 में पुलिस ने राकेश सचान के पास से एक अवैध हथियार बरामद किया था।

गौरतलब है कि सचान ने 90 के दशक की शुरुआत में समाजवादी पार्टी के साथ राजनीति में प्रवेश किया था। वर्ष 1993 और 2002 में वह घाटमपुर विधानसभा क्षेत्र से विधायक चुने गये थे, जबकि वर्ष 2009 में उन्होंने फतेहपुर लोकसभा सीट से कांग्रेस पार्टी से चुनाव जीता था।

सचान वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हो गए थे। वर्ष 2022 में कानपुर देहात की भोगनीपुर विधानसभा सीट से निर्वाचित होने के बाद योगी सरकार में मंत्री बने। (भाषा)



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