शिक्षकों को सलाम : गुरु हमें गढ़ते हैं


जो अंधकार से हमें प्रकाश की तरफ ले जाए वही तो गुरु होता है, जिसकी सीख पर कभी किसी को शक न हो वही तो शिक्षक होता है.... बहुत धैर्य और सहनशक्ति की जरूरत होती है एक शिक्षक होने के लिए... हमारे गुरु
के सामने हम जितना खाली होकर जाते हैं वह हमें उतना ही भर देते हैं, अगर गुरु के सामने ज्ञान का घमंड किया तो वह आपके मन की स्लेट पर कभी कुछ नहीं लिख पाएंगे....इसलिए उन करें जिन्होंने हमें गढ़ा है, रचा है, बनाया है... जिनकी वजह से आज हम इस काबिल हैं कि अपनी आजीविका चला पा रहे हैं....

गुरु सिर्फ वही नहीं है जो स्कूलों में पढ़ा रहे हैं जीवन में हम कभी भी कोई भी बात किसी से भी सीख सकते हैं.. चाहे वह हमारे घरों में काम करने वाले ही क्यों न हो... हम बहुत सारे लोगों से सीखते हैं, सीखना चाहिए...लेकिन सीखने की दिशा वही होना चाहिए जो समाज हित में हो, देशहित में हो...स्वयं आपके और परिवार के हित में हो...

गुरु हमारे विचारों को, संस्कारों को, सोच और आचरण को प्रभावित करते हैं, वे हमें बताते हैं कि हमारे लिए सही क्या है और गलत क्या, पर हमें अपने हर तरह के शिक्षकों को सलाम करना चाहिए....गुरु को
जरूर याद करें जब हम जीवन में सफलता की सीढ़ियां चढ़ते हैं... क्योंकि गुरु हमें गढ़ते हैं....






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