मैक्सवेल ने चौका जड़कर न्यूजीलैंड पर दर्ज की 8 विकेट से खिताबी जीत, ऑस्ट्रेलिया ने जीता पहला टी-20 विश्वकप

Last Updated: रविवार, 14 नवंबर 2021 (23:50 IST)
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दुबई:साल 2007 में जब सबसे पहले शुरु हुआ था तो वनडे विश्वकप जीतने वाली ऑस्ट्रेलिया उसकी सबसे बड़ी दावेदार थी। लेकिन भारत ने उसे सेमीफाइनल में हराया। साल 2009 में तो टीम पहले दौर के बाद बाहर हो गई। > साल 2010 में टीम फाइनल तक तो पहुंची लेकिन कप नहीं उठा सकी। आज ऑस्ट्रेलिया ने 14 साल पुराना अपना इंतजार खत्म किया और न्यूजीलैंड को 8 विकेट से हराया।जीत पर मुहर ग्लेन मैक्सवेल ने चौका जड़कर लगाई।> टी-20 विश्वकप ही एक ऐसी ट्रॉफी थी जो ऑस्ट्रेलिया ने कभी नहीं जीती थी। ऑस्ट्रेलिया वनडे विश्वकप सर्वाधिक 5 बार और चैंपियन्स ट्रॉफी 2 बार जीत चुकी है।
मिशेल मार्श के 50 गेंद में नाबाद 77 रन और के अर्धशतक की मदद से वनडे क्रिकेट में पांच बार की विश्व चैम्पियन आस्ट्रेलिया ने रविवार को न्यूजीलैंड को आठ विकेट से हराकर पहली बार टी20 विश्व कप जीत लिया।

पहले बल्लेबाजी के लिये भेजी गई न्यूजीलैंड टीम ने कप्तान केन विलियमसन की 48 गेंद में 85 रन की पारी की मदद से चार विकेट पर 172 रन बनाये । जवाब में ‘बड़े मैचों के खिलाड़ी’ वॉर्नर (38 गेंद में 53 रन) और मार्श ने सात गेंद बाकी रहते महज दो विकेट खोकर टीम को जीत दिलाई ।

दो साल पहले 50 ओवरों के विश्व कप में दुर्भाग्यपूर्ण तरीके से इंग्लैंड से फाइनल हारने वाली न्यूजीलैंड टीम को एक बार फिर आईसीसी टूर्नामेंट में उपविजेता रहकर ही संतोष करना पड़ा । मार्श और वॉर्नर की पारियां विलियमसन की बल्लेबाजी पर भारी पड़ गई।

मार्श ने अपनी पारी में छह चौके और चार छक्के लगाये जिनमें से ईश सोढी को जड़े दो छक्के शानदार रहे। टी20 विश्व कप टीम में अपने चयन को लेकर हुई आलोचना का उन्होंने अब तक के कैरियर की सबसे यादगार पारी खेलकर जवाब दिया।

वहीं टी20 क्रिकेट को ताबड़तोड़ प्रारूप के महारथियों का खेल मानने वालों की धारणा भी आस्ट्रेलिया ने तोड़ी दी जिसने पांच टेस्ट विशेषज्ञों तेज गेंदबाज पैट कमिंस, मिशेल स्टार्क, जोश हेजलवुड और बल्लेबाज वॉर्नर तथा स्टीव स्मिथ को टीम में शामिल किया था।

इसी मैदान पर आईपीएल की एक टीम द्वारा अपमानित हुए वॉर्नर ने इस जीत में अहम भूमिका निभाई। आईपीएल में वॉर्नर की कप्तानी छीनी गई और उन्हें आखिरी मैचों में टीम में जगह भी नहीं दी गई थी। उन्होंने टी20 प्रारूप में ही सबसे बड़े मंच पर यादगार पारी खेलकर आलोचकों का मुंह बंद किया।

वहीं पहले बल्लेबाजी के लिये भेजी गई न्यूजीलैंड टीम पहले दस ओवर में रन बनाने के लिये जूझती नजर आई। मार्टिन गुप्टिल ने 35 गेंद में 28 रन बनाये।इसके बाद विलियमसन ने 48 गेंद में 10 चौकों और तीन छक्कों की मदद से 85 रन बनाकर पारी का नक्शा बदल दिया। न्यूजीलैंड ने आखिरी दस ओवरों में 115 रन बनाकर फाइनल मुकाबले को रोमांचक बनाने की नींव रख दी।

अक्सर अपनी टीम के संकटमोचक साबित होने वाले विलियमसन ने बेहद खूबसूरती से बल्लेबाजी करते हुए पहली 16 गेंद में 15 रन बनाये। उस समय एडम जाम्पा किफायती गेंदबाजी कर रहे थे और गुप्टिल फॉर्म में नहीं थे। एक बार लय पकड़ने के बाद विलियमसन ने खुलकर खेला और अगली 32 गेंद में 70 रन बनाये।

विलियमसन टी20 विश्व कप फाइनल में सर्वोच्च स्कोर बनाने वाले कप्तान बन गए जिन्होंने श्रीलंका के कुमार संगकारा को पछाड़ा।उन्होंने 11वें ओवर में मिशेल स्टार्क को 19 रन जड़कर दबाव कम किया। इसी ओवर में जोश हेजलवुड ने उनका कैच भी छोड़ा। स्टार्क आज काफी महंगे साबित हुए जिन्होंने चार ओवर में 60 रन दिय।

स्टार्क का दूसरा ओवर जहां खराब रहा तो तीसरा ओवर और भी बदतर था जिसमें न्यूजीलैंड के बल्लेबाजों ने चार चौकों और एक छक्के के साथ 24 रन ले डाले। दूसरी ओर हेजलवुड ने चार ओवर में 16 रन देकर तीन विकेट लिये जबकि जाम्पा ने चार ओवर में 24 रन देकर एक विकेट चटकाया।

न्यूजीलैंड की पारी कप्तान विलियमसन के नाम रही जिन्होंने साबित कर दिया कि उन्हें आधुनिक क्रिकेट के महान बल्लेबाजों में क्यो शुमार किया जाता है। हर प्रारूप में तकनीकी कौशल के साथ संयम बनाये रखकर खेलना उनकी खूबी है और सबसे बड़ी बात यह है कि जरूरत के समय वह हमेशा फॉर्म में होते हैं।



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