सोमदेव के लिए पेशेवर करियर पहले, देश बाद में

Somdev Devvarman
मुंबई| पुनः संशोधित गुरुवार, 4 सितम्बर 2014 (22:42 IST)
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मुंबई। भारत के शीर्ष एकल टेनिस खिलाड़ी सोमदेव देववर्मन ने एशियाई खेलों से अपना नाम वापिस लेकर भले ही सभी को नाराज किया हो लेकिन टेनिस खिलाड़ी ने साफ किया है कि उनका लक्ष्य गेम्स नहीं, बल्कि दुनिया के शीर्ष 100  खिलाड़ियों में जगह बनाना है। 
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चीन के ग्वांगझू में 2010 एशियाई खेलों में एकल और युगल में स्वर्ण पदक जीत चुके सोमदेव से दक्षिण कोरिया के इंचियोन में 19 से 4 अक्टूबर तक चलने वाले 17वें एशियाई खेलों में भी पदक की उम्मीद थी लेकिन एशियाड की टीम चुने जाने से पहले ही उन्होंने खेलों से अपना नाम वापिस ले लिया है। 
      
सोमदेव ने कहा मुझे नहीं लगता है कि अपने पेशेवर करियर को दांव पर लगाकर मुझे इन खेलों में हिस्सा लेना चाहिए। चोटों के कारण मेरा पेशेवर करियर पहले ही काफी उतार-चढ़ाव झेल चुका है और इसकी वजह से मेरी रैंकिंग में भी काफी गिरावट आई है।
 
सोमदेव वर्ष 2011 में करियर की सर्वश्रेष्ठ 62वीं रैंकिंग पर पहुंचे थे लेकिन चोट के कारण उनकी रैंकिंग में गिरावट आई और वह फिलहाल 147 वीं रैंकिंग पर हैं। 
 
देश के शीर्षा एकल खिलाड़ी ने कहा मैं अब पहले से बेहतर और फिट महसूस कर रहा हूं। मुझे लगता है कि मैं अब वापिस से शीर्ष 100 में जगह बना सकता हूं। हालांकि एशियाड से हटना अच्छा नहीं है लेकिन मेरे करियर और रैंकिंग के लिए यह सही निर्णय है। 
     
इंचियोन में सिपजियोंग स्टेडियम में भारत के टेनिस में सात स्वर्ण पदक दाव पर लगे होंगे लेकिन पिछले खेलों के स्वर्ण पदक विजेता सोमदेव के हटने से इस बार भारत की पदक उम्मीदों को झटका लगा है। 29 वर्षीय सोमदेव के इस निर्णय पर अखिल भारतीय टेनिस संघ (आइटा) ने कड़ी प्रतिक्रिया भी जताई है। 
     
आइटा ने कहा सोमदेव का कहना है कि एशियाड में हिस्सा लेने से उन्हें तीन पेशेवर टूर्नामेंटों को छोड़ना होगा। हमने उनसे एशियाई खेलों में हिस्सा लेने की अपील की है लेकिन वह अपने निर्णय पर अडिग हैं। हम उन्हें खेलने के लिए बाध्य नहीं कर सकते हैं लेकिन यह निराशाजनक है। (वार्ता)



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