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जय शीतला माता, मैया जय शीतला माता : शीतला माता जी की आरती

शुक्रवार,जुलाई 30, 2021
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मां शीतला चालीसा :ये देवी हाथों में कलश, सूप, मार्जन यानी झाड़ू तथा नीम के पत्ते धारण करती हैं। यह चेचक आदि कई रोगों की देवी बताई गई है। यहां पाठकों के लिए प्रस्तुत हैं शीतला माता चालीसा।
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चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की सप्तमी-अष्टमी को शीतला माता का पर्व मनाया जाता है। इसे बसौड़ या बसौरा भी कहते हैं। शीतला सप्तमी को भोजन बनाकर रखा जाता है और दूसरे दिन उसी भोजन को ही खाया जाता है। इस दौरान विशेष प्रकार का भोजन बनाया जाता है। कहते हैं कि ...
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शीतला सप्तमी के एक दिन पहले मीठा भात (ओलिया), खाजा, चूरमा, मगद, नमक पारे, शक्कर पारे, बेसन चक्की, पुए, पकौड़ी,राबड़ी, बाजरे की रोटी, पूड़ी, सब्जी आदि बना लें।
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प्रतिवर्ष शीतला सप्तमी या अष्टमी के दिन शीतला माता का व्रत किया जाता है। यह व्रत केवल चैत्र मास की कृष्ण पक्ष की सप्तमी-अष्टमी को होता है और यही तिथि मुख्य मानी गई है।
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Shitala Mata Katha : शीतला माता की कथा

शनिवार,अप्रैल 3, 2021
शीतला माता भगवती दुर्गा का ही रूप है। भारतीय उपासना पद्धति जहां मनुष्य को आध्यात्मिक रूप से मजबूत करती है वहीं शारीरिक और मानसिक रोगों को दूर करने का भी इसका उद्देश्य होता है। कहा जाता है कि गर्मी के दिनों में शरीर में अनेक प्रकार के पित्त विकार भी ...
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शीतला अष्टमी का व्रत रखकर माता की भक्ति करके अपने परिवार की रक्षा करने के लिए माता से प्रार्थना करते हैं। इस बार 13 जून 2020, शनिवार को शीतलाष्टमी बसौरा पर्व मनाया जाएगा।
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मां शीतला स्वच्छता की अधिष्ठात्री देवी हैं। सभी शीतल वस्तुओं पर इनका आधिपत्य है।
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शीतला माता की पूजा शीतला सप्तमी और शीतला अष्टमी पर की जाती है। शीतला माता के यूं तो कई प्रचीन मंदिर है जैसे राजस्थान के पाली जिले में, जबलपुर के पास पालन में घमापुर-शीतलामाई मार्ग पर और भोपाल की बड़ी झील के किनारे वीआईपी रोड स्थित शीतला माता मंदिर ...
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शीतला दिगम्बरा हैं, गर्दभ पर आरूढ़ रहती हैं। सूप (छाज), झाडू और नीम के पत्तों से अलंकृत होती हैं तथा हाथ में शीतल जल का कलश रखती हैं।
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वन्देऽहं शीतलां-देवीं, रासभस्थां दिगम्बराम् । मार्जनी-कलशोपेतां, शूर्पालङ्कृत-मस्तकाम् ।।1।। वन्देऽहं शीतलां-देवीं, सर्व-रोग-भयापहाम् । यामासाद्य निवर्तन्ते, विस्फोटक-भयं महत् ।।2।।
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मां शीतला एक प्रसिद्ध हिन्दू देवी हैं। इस देवी की महिमा प्राचीनकाल से ही बहुत अधिक है। यहां पाठकों के लिए प्रस्तुत हैं शीतला माता चालीसा।
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शीतला माता जी की आरती- जय शीतला माता, मैया जय शीतला माता, आदि ज्योति महारानी सब फल की दाता। जय शीतला माता...
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भगवती शीतला की पूजा-अर्चना का विधान भी अनोखा होता है। शीतलाष्टमी के 1 दिन पूर्व उन्हें भोग लगाने के लिए विभिन्न प्रकार के पकवान तैयार किए जाते हैं। अष्टमी के दिन बासी पकवान ही देवी को नैवेद्य के रूप में समर्पित किए जाते हैं।
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शीतला सप्तमी या अष्टमी का व्रत केवल चैत्र मास की कृष्ण पक्ष की सप्तमी या अष्टमी को होता है।
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शीतला सप्तमी के एक दिन पहले नौ कंडवारे, एक कुल्हड़ और एक दीपक कुम्हार के यहां से मंगवा लेने चाहिए।
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होली के सात दिन बाद शीतला सप्तमी मनाई जाती है जबकि कुछ लोग अष्टमी को पर्व मनाते हैं। शीतला सप्तमी के दिन ही बासी भोजन ग्रहण किया जाता है। उसके बाद से बासी भोजन नहीं खाया जाता है क्योंकि शीतला सप्तमी के बाद से ही मौसम गर्म होने लगता है।
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रंगपंचमी के बाद आने वाली चैत्र कृष्ण सप्तमी-अष्टमी के दिन शीतला सप्तमी-अष्टमी का पर्व मनाया जाता है। इस दिन माता शीतला को पूजन के समय शीतल पदार्थों का भोग लगाया जाता है।
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शीतला सप्तमी/अष्टमी के दिन, भक्त खुद खाना नहीं पकाते हैं और वे केवल उस सामान या भोजन को खाते हैं जो एक दिन पहले तैयार किया गया था। इस विशेष दिन में गर्म और ताजा पके हुए भोजन का सेवन पूरी तरह से निषिद्ध है।
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सास तो शीतला माता के भजन करने के लिए बैठ गई। दोनों बहुएं बच्चे रोने का बहाना बनाकर घर आई। दाने के बरतन से गरम-गरम रोटला निकालकर चूरमा किया और पेटभर कर खा लिया। सास ने घर आने पर बहुओं से भोजन करने के लिए कहा। बहुएं ठंडा भोजन करने का दिखावा करके घर ...
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