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सूर्यास्त के बाद यदि कर लिए ये 10 कार्य तो पछताएंगे और होगा ये बड़ा नुकसान

रविवार,अक्टूबर 24, 2021
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घर या मंदिर में पूजा करने के लिए कुछ विशेष सामग्री का होना जरूरी है। उन सभी को मिलाकर ही पूजा की जाती है। हालांकि पूजा सामग्री तो बहुत सारी होती है, लेकिन यहां प्रस्तुत है पूजा के 20 प्रतीक वस्तुएं।
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प्राचीनकाल में संध्योपासना या संध्यावंदन की जाती थी। आगे चलकर यह पूजा, आरती और तरह तरह की पूजा विधियों में बदल गई। अब मोटे तौर पर कह सकते हैं कि संध्योपासना के 5 प्रकार हैं- 1. प्रार्थना, 2. ध्यान-साधना, 3. भजन-कीर्तन 4. यज्ञ और 5. पूजा-आरती। इसमें ...
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प्रत्येक माह में 2 चतुर्दशी और वर्ष में 24 चतुर्दशी होती है। चतुर्दशी को चौदस भी कहते हैं। इस दिन व्रत और पूजा करने का बहुत महत्व माना गया है। आओ जानते हैं इस तिथि की 5 खास बातें।
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रंगों का हमारे जीवन में बहुत महत्व है। हिन्दू धर्म में पूजा के दौरान यूं तो 3 रंगों का खास महत्व है परंतु अन्य 2 रंगों का भी उपयोग होता है। इस तरह पंचरंगी पूजा होती है। आओ जानते हैं इन 5 रंगों का महत्व।
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दीपदान के बारे में सभी ने सुना होगा परंतु कम लोग ही जानते होंगे कि दीपदान क्या है, कैसे करें दीपदान और क्या है दीप दान करने के फायदे। आओ इस संबंध में जानने हैं कुछ खास जानकारी।
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अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार इस बार चातुर्मास का प्रारंभ 20 जुलाई 2021 को हो गया है। आओ जानते हैं इस चार माह में क्या करें और क्या नहीं। आओ जानते हैं चातुर्मास के 20 बड़े नियम और पूजा के तरीके।
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शुद्ध जल से काया निरोगी होती है और अशुद्ध जल से रोगी। शुद्ध अन्न और वायु के बाद शुद्ध जल जरूरी है। अशुद्ध जल से लिवर और गुर्दों का रोग हो जाता है। यदि उक्त दोनों में जरा भी इंफेक्शन है तो इसका असर दिल पर भी पड़ता है। लगभग 70 प्रतिशत रोग जल की ...
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प्राचीनकाल से ही प्याज और लहसुन को खाने की मनाई की गई है, परंतु ऐसा क्यों और किसे प्याज या लहसुन खाना चाहिए और किसे नहीं यह जानना भी जरूरी है। इतनी महत्वपूर्ण चीज को आखिर क्यों खाने के लिए मना किया गया है। आओ जानते हैं इस संबंध में महत्वपूर्ण ...
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प्राचीनकाल में संध्योपासना या संध्यावंदन की जाती थी। आगे चलकर यह पूजा, आरती और तरह तरह की पूजा विधियों में बदल गई। अब मोटे तौर पर कह सकते हैं कि संध्योपासना के 5 प्रकार हैं- 1. प्रार्थना, 2. ध्यान-साधना, 3. भजन-कीर्तन 4. यज्ञ और 5. पूजा-आरती। आओ ...
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प्राचीनकाल में संध्योपासना या संध्यावंदन की जाती थी। आगे चलकर यह पूजा, आरती और तरह तरह की पूजा विधियों में बदल गई। अब मोटे तौर पर कह सकते हैं कि संध्योपासना के 5 प्रकार हैं- 1. प्रार्थना, 2. ध्यान-साधना, 3. भजन-कीर्तन 4. यज्ञ और 5. पूजा-आरती। इसमें ...
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हिंदू धर्म ग्रंथों में स्कंदपुराण को महापुराण कहा जाता है। पुराणों के क्रम में इसका तेरहवां स्थान है इसके खंडात्मक और संहितात्मक उपलब्ध दो रूपों में से प्रत्येक में 81 हजार श्लोक हैं। इस पुराण का नाम भगवान शंकर के बड़े पुत्र कार्तिकेय के नाम पर है। ...
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बिस्तर पर हम 6 से 7 या 8 घंटे सोते हैं। इसीलिए यह जाना जरूरी है कि बिस्तर पर किस तरह से या तरीके से सोना चाहिए। आप किसी बस या ट्रेन में 2 घंटे का भी यदि सफर करते हो तो अच्‍छी सीट पर बैठना पसंद करते हो या नहीं? इसी तरह सोने से पहले यह तय कर लें कि ...
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हिन्दू धर्म का नृत्य, कला, योग और संगीत से गहरा नाता रहा है। हिन्दू देवी और देवताओं के पार अपना खुद का एक वाद्य यंत्र रहा है जिसे वे समय समय पर बजाकर संगीत के सुर उत्पन्न करते रहते हैं। आओ जानते हैं कि ऐसे कौनसे 8 वाद्य यंत्र का संगीत भगवान को पसंद ...
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पुराण शब्द 'पुरा' एवं 'अण शब्दों की संधि से बना है। पुरा का अथ है- 'पुराना' अथवा 'प्राचीन' और अण का अर्थ होता है कहना या बतलाना। पुराण का शाब्दिक अर्थ है- प्राचीन आख्यान या पुरानी कथा। पुराणों में दर्ज है प्राचीन भारत का इतिहास। आओ जानते हैं 18 ...
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आपने आम का पेड़ देखा होगा। इस पेड़ की घनी और ठंडी छाव रहती है। पहले यह बहुतायत में पाया जाता था अब बहुत सी जगहों से देशी आप का पेड़ लुप्त होने लगा है। मालवा की धरती पर पहले पग पग पर आम का पेड़ हुआ करता था और खासियत यह थी कि हर पेड़ के आम का अलग ही ...
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मंदिर में जब भी कोई जाता है तो पंडितजी उसे चरणामृत या पंचामृत देते हैं। लगभग सभी लोगों ने दोनों ही पीया होगा। लेकिन बहुत कम ही लोग इसकी महिमा और इसके बनने की प्रक्रिया को नहीं जानते होंगे। आओ जानते हैं पंचामृत आत्मोन्नति के 5 प्रतीक और सेवन के 10 ...
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यदि निम्नलिखित 10 नियम आपने अपना लिए तो निश्चित ही शर्तिया आपको कभी भी कोई गंभीर रोग नहीं होगा और आप जीवनभर निरोगी बने रहेंगे, परंतु उससे पूर्व आपको 3 शर्तों का पालन करना होगा। जैसे कुछ पाने के लिए खोना पड़ता है उसी तरह यह 3 शर्तें अपनाएं।
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हम यहां पर व्रतों का वर्षिक चक्र संक्षिप्त में बता रहे हैं जिन्हें करने से निरोगी काया प्राप्त की जा सकती है। इन निम्मलिखित में से किसी भी एक को जीवनभर पाल लिया तो हर तरह के रोग और शोक मिट जाते हैं।
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भारत में कई नीतिकार हुए हैं, जिन्होंने भारत के धर्म और राज्य को एक दिशा दी है। उन्हीं नीतिकारों में से एक प्रसिद्ध नीतिकार हैं शुक्राचार्य। ऋषि भृगु के पुत्र और दैत्यों के गुरु शुक्राचार्य की शुक्र नीति आज भी प्रासंगिक मानी जाती है। आज के संदर्भ में ...
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