बैडमिंटन 2010 : साइना की ऊँची उड़ान

नई दिल्ली| भाषा|
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स्टार खिलाड़ी साइना नेहवाल पिछले साल के अपने बेजोड़ प्रदर्शन को जारी रखते हुए 2010 में पाँच खिताब और देश के सर्वोच्च खेल पुरस्कार 'राजीव गाँधी खेल रत्न' के साथ बैडमिंटन में पूरे साल सुर्खियों में बनी रही जबकि भारत ने इस बीच राष्ट्रमंडल खेलों में दो स्वर्ण, एक रजत और एक काँस्य पदक के साथ अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया लेकिन विश्व चैम्पियनशिप और एशियाई खेलों में देश के हाथ निराशा लगी।


भारत के लिए राष्ट्रमंडल खेलों में साइना के अलावा ज्वाला गुट्टा और अश्विनी पोनप्पा ने महिला युगल का स्वर्ण जीता। टीम स्पर्धा में देश को रजत पदक मिला जबकि पी कश्यप ने पुरुष एकल में कांसे का तमगा जीता।

साइना ने इंडियन ओपन ग्रां प्री, सिंगापुर ओपन सुपर सिरीज, इंडोनेशिया ओपन सुपर सिरीज और हांगकांग सुपर सिरीज का खिताब भी जीता जबकि विश्व रैंकिंग में दूसरे स्थान तक पहुँचने में भी सफल रही।
इस बीच भारतीय बैडमिंटन संघ नोटिसों के पचड़े में भी पड़ा रहा जब इसके अध्यक्ष वीके वर्मा खेल मंत्रालय के सीमित कार्यकाल के दिशानिर्देशों को दरकिनार करते हुए लगातार चौथी बार इस पद के लिए मैदान पर उतरे और निर्विरोध चुने गए।

खेल मंत्रालय ने इसके बाद बैडमिंटन संघ को नोटिस जारी करके कहा कि क्यों न उसका पंजीकरण रद्द कर दिया जाए जिस पर संघ ने कड़ा रुख दिखाते हुए कहा कि उसे सरकार की वित्तीय मदद की जरूरत नहीं है।
साइना ने 2010 की शुरूआत मलेशिया सुपर सिरीज के क्वार्टर फाइनल में जगह बनाकर की लेकिन हैदराबाद की इस दिग्गज खिलाड़ी को पता था कि अगर उन्हें शीर्ष 10 में बरकरार रहना है तो इससे कहीं बेहतर प्रदर्शन करना होगा।

साइना मार्च में ऑल इंग्लैंड के सेमीफाइनल में पहुँचने वाली पहली भारतीय महिला खिलाड़ी भी बनी लेकिन अपने अभियान को इससे आगे नहीं बढ़ा पाई।
उम्मीद थी कि साइना भारतीय सरजमीं पर अप्रैल में एशियाई चैम्पियशिप में ऑल इंग्लैंड की निराशा की भरपाई करने में सफल रहेगी लेकिन यहां भी इस शीर्ष वरीय खिलाड़ी को सेमीफाइनल में चीन की क्वालीफायर के हाथों हार झेलनी पड़ी। उन्होंने हालाँकि तीसरे स्थान के प्लेआफ में जीत दर्ज करके काँस्य पदक के साथ अपने प्रशंसकों को खुश होने का मौका दिया।
इस 20 वर्षीय खिलाड़ी ने इसके बाद जून में इंडिया ओपन ग्रांप्री, सिंगापुर सुपर सिरीज और इंडोनेशिया सुपर सिरीज के साथ लगातार तीन खिताब जीतते हुए हैट्रिक बनाई और दुनिया की दूसरे नंबर की खिलाड़ी बनने में सफल रही जो उनकी करियर की सर्वश्रेष्ठ रैंकिंग भी थी। यह उपलब्धि इसलिए भी खास रही क्योंकि साइना ने ये तीनों खिताब लगातार तीन हफ्ते में जीते।

साइना इसके बाद लगातार सात हफ्तों तक दुनिया की नंबर दो खिलाड़ी रही। अगस्त में हालाँकि विश्व चैम्पियनशिप के क्वार्टर फाइनल में शिकस्त के साथ उन्हें अपनी यह रैंकिंग गँवानी पड़ी। उन्हें इसी महीने 'राजीव गाँधी खेल रत्न' के लिए भी चुना गया।
इस दिग्गज खिलाड़ी ने विश्व चैम्पियनशिप की निराशा को अक्तूबर में भारतीय सरजमीं पर पहली बार हो रहे राष्ट्रमंडल खेलों की महिला एक स्पर्धा का स्वर्ण पदक जीतकर दूर किया। उन्होंने फाइनल में मलेशिया की म्यू चू वांग को 19 -21, 23-21, 21-13 से हराया।

राष्ट्रमंडल खेलों में साइना का यह स्वर्ण इसलिए भी काफी अहम रहा क्योंकि यह भारत का इन खेलों में 38वाँ स्वर्ण था जिसकी मदद से मेजबान देश इंग्लैंड को एक स्वर्ण से पीछे छोड़ते हुए इन खेलों में अपना अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए दूसरे स्थान पर रहा।
साइना के अलावा ज्वाला और अश्विनी ने भी राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण जीता लेकिन बाकी पूरे साल यह जोड़ी खिताबी सफलता को तरसती रही। यह जोड़ी विश्व चैम्पियनशिप के प्री क्वार्टर तक ही पहुंच सकी जबकि इंडियन ग्रां प्री के फाइनल तक पहुंचने में सफल रही।

भारत के नंबर एक पुरुष एकल खिलाड़ी चेतन आनंद के लिए हालांकि यह साल निराशाजनक रहा और वह चोट के कारण अधिकतर समय कोर्ट से दूर ही रहे। वह विश्व चैम्पियनशिप के पहले दौर में ही बाहर हो गए जबकि राष्ट्रमंडल खेलों में भी उन्हें हमवतन कश्यप के हाथों काँस्य पदक के मुकाबले में शिकस्त झेलनी पड़ी।
कश्यप ने टुकड़ों में अच्छा प्रदर्शन किया और सिंगापुर ओपन तथा इंडियन ओपन के सेमीफाइनल में पहुंचे लेकिन उनके प्रदार्शन में निरंतरता की कमी दिखी।

ज्वाला और वी दीजू की भारत की शीर्ष मिश्रित युगल जोड़ी भी पूरे साल इंडियन ओपन ग्रां प्री के रूप में अपना एकमात्र खिताब जीत पाई। यह जोड़ी हालाँकि एशिया और विश्व चैम्पियनशिप के क्वार्टर फाइनल में पहुँची।
भारत के लिए अजय जयराम ने चेक इंटरनेशनल का खिताब जीता जबकि वह डच ग्रांप्री के फाइनल में भी पहुँचे। वह मलेशिया ओपन ग्रांप्री में भी अंतिम चार में जगह बनाने में सफल रहे। इसके अलावा भारत के खिताब विजेताओं में आनंद पवार (मालदीव इंटरनेशनल) भी शामिल रहे। (भाषा)



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