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Gaj Lakshmi Vrat Katha : क्यों मनाया जाता है महालक्ष्मी व्रत, 1 लोककथा और 2 पौराणिक कथा से जानिए राज

शनिवार,सितम्बर 25, 2021
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इस वर्ष 24 सितंबर 2021, शुक्रवार को आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की संकष्टी चतुर्थी मनाई जा रही है। इस दिन श्रीकृष्ण तथा बाणासुर की यह कथा पढ़ी जाती है। आइए पढ़ें-
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शुक्रवार के दिन माता लक्ष्मी और माता कालिका के साथ ही संतोषी माता की उपासना भी की जाती है। इस दिन खटाई नहीं खाते हैं और माता का व्रत रखते हैं। माता संतोषी का व्रत रखने और उनकी कथा सुनने से भक्त की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती है। अविवाहितों के विवाह हो ...
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इस बार पितृ पक्ष ( Pitru Paksha 2021 Start Date) 20 सितंबर 2021, सोमवार को भाद्रपद मास की शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि से आरंभ होंगे। पितृ पक्ष का समापन 6 अक्टूबर 2021, बुधवार को आश्विन मास की कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को होगा। श्राद्ध पक्ष में ...
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श्राद्ध पक्ष की लोककथा के अनुसार जोगे तथा भोगे दो भाई थे। दोनों अलग-अलग रहते थे। जोगे धनी था और भोगे निर्धन। दोनों में परस्पर बड़ा प्रेम था।
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अनंत चतुर्दशी की व्रत कथा कुछ इस प्रकार है। पुराने समय में सुमंत नाम के एक ऋषि हुआ करते थे उनकी पत्नी का नाम दीक्षा था। दोनों की बेटी सुशीला थी। सुशीला थोड़ी बड़ी हुई तो मां दीक्षा का स्वर्गवास हो गया।
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श्री वेद व्यास ने गणेश चतुर्थी से श्री गणेश को लगातार 10 दिन तक महाभारत कथा सुनाई थी जिसे श्री गणेश जी ने अक्षरश: लिखा था। 10 दिन बाद जब वेद व्यास जी ने आंखें खोली तो पाया कि 10 दिन की अथक मेहनत के बाद गणेश जी का तापमान बहुत अधिक हो गया है।
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हिंदू धर्म के अनुसार हर माह त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत रखा जाता है. इस दिन प्रदोष व्रत रखकर भगवान भोलेनाथ की उपासना की जाती है।
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विश्वकर्मा एक महान ऋषि और ब्रह्मज्ञानी थे। ऋग्वेद में उनका उल्लेख मिलता है। कहते हैं कि उन्होंने ही देवताओं के घर, नगर, अस्त्र-शस्त्र आदि का निर्माण किया था। वे महान शिल्पकार थे। आओ जानते हैं उनके जीवन से जुड़ी 3 लोककथाएं। विश्वकर्मा की जयंती कन्या ...
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भगवान श्रीकृष्ण की प्रेमिका राधा। महाभारत में 'राधा' के नाम का उल्लेख नहीं मिलता है। राधा का जिक्र विष्णु, पद्म पुराण और ब्रह्मवैवर्त पुराण में मिलता है। राधा और रुक्मणि दोनों ही कृष्ण से उम्र में बड़ी थीं। मान्यता और किवदंतियों के आधार पर आओ हम ...
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श्रीराधा को भगवान श्रीकृष्‍ण की प्रेमिका कहा जाता और श्रीरुक्मिणी जी उनकी पत्नी थीं। सबसे बड़ा अंतर तो यही था परंतु इससे अलावा भी 12 बड़े अंतर थे। आओ जानते हैं दोनों के बीच के अंतर को। difference between Radha and Rukmini.
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ऐसे कई अवसार आए जब भगवान विष्णु और शिवजी मुसीबत में फंस गए थे। तब उन्हें भी प्रथम पूज्य गणेशजी की पूजा करना पड़ी थी। आओ जानते हैं इस रोचक प्रसंग को जब भगवान शिव को भी एक दिन इस कारण करना पड़ी थी गणेशजी की पूजा।
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शिव पुराण में वर्णित एक कथा के अनुसार एक बार माता पार्वती ने अपने शरीर पर हल्दी लगाई थी, इसके बाद जब उन्होंने अपने शरीर से हल्दी उबटन उतारी तो उससे उन्होंने एक पुतला बना दिया।
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चतुर्थी तिथि शुरू होने से लेकर खत्म होने तक चंद्रमा का दर्शन नहीं करना चाहिए। यदि भूल से गणेश चतुर्थी के दिन चंद्रमा के दर्शन हो जाएं तो मिथ्या दोष से बचाव के
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भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी से 10 दिवसीय गणेश उत्सव की शुरुआत होती है जो अनंत चतुर्दशी तक चलती है। अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार यह पर्व 10 सितंबर 2021 शुक्रवार को गणेश चतुर्थी रहेगी। परंपरा से यह प्रचलित है कि इस दिन चंद्र या चांद को नहीं ...
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गणेशजी को मोदक प्रिय है यह तो सभी जानते हैं, परंतु उनके मोदक प्रिय होने के कई कारण हैं। मोदक लड्डू को गणपति जी को अर्पित करने से वे प्रसन्न हो जाते हैं।
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भगवान विष्णु की बारात जाने का समय आ गया। सभी देवता अपनी पत्नियों के साथ विवाह समारोह में आए। उन सबने देखा कि गणेशजी कहीं दिखाई नहीं दे रहे हैं। तब वे आपस में चर्चा करने लगे कि क्या गणेशजी को नहीं न्योता है? या स्वयं गणेशजी ही नहीं आए हैं? सभी को इस ...
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भाद्रपद की चतुर्थी से गणेश उत्सव का प्रारंभ होता है जो अनंत चतुर्दशी तक चलता है। इस बार 10 सितंबर से 19 सितंबर 2021 तक गणेश उत्सव रहेंगे। दक्षिण भारत में गणेश पूजा का बहुत प्रचलन है। वहां पर भगवान कार्तिकेय और महालक्ष्मी की पूजा के साथ ही गणेश पूजा ...
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'हे गौरा, पिछले जन्म में तुमने मुझे पाने के लिए बहुत छोटी उम्र में क‍ठोर तप और घोर तपस्या की थी। तुमने ना तो कुछ खाया और ना ही पीया बस हवा और सूखे पत्ते चबाए। जला देने वाली गर्मी हो या कंपा देने वाली ठंड तुम नहीं हटीं। डटी रहीं। बारिश में भी तुमने ...
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श्री गणेश का जन्म भाद्रप्रद शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को दोपहर 12 बजे हुआ था। अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार इस बार 10 सितंबर को गणेश चतुर्थी का व्रत रखा जाएगा। आओ जानते हैं गणेशजी के मस्तक की कथा।
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