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कही-अनकही 15 : बचपन के दोस्त

गुरुवार,सितम्बर 30, 2021
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दादी ने तोहफे में दे दी जीजाजी को वही ‘सोने की गिन्नी’ जो एना के पापा ने आदि के पापा को दी थी। जीजाजी ने मना किया, लेकिन दादीजी कहां मानने वाली थीं... फिर एना ने जीजाजी के पैर छुए। जीजाजी ने वही सोने की गिन्नी एना को आशीर्वाद स्वरुप दे दी।
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‘एना, आज से गांठ बांध लो, न यहां की कोई बात मायके में करनी है, न मायके की बात यहां। अब तुम यहीं की हो, यहीं के हिसाब से रहो और नौकरी छोड़ दो तुम। क्या करोगी 10 घंटे की नौकरी कर के? पति का ख्याल कैसे रखोगी?’
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रिश्तों में स्पष्ट संचार और वार्तलाप बेहद आवश्यक है, मस्ती-मजाक, रूठना-मनाना भी रिश्तों को मजबूती देता है, एक-दूसरे को समय देना और एक-दूसरे की निजता का भी सम्मान करना ज़रूरी है... लेकिन क्या इसकी आड़ में हर बात पर ‘अबोला’ सही है?
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यदि तुम यह सोचते हो कि तुम्हें कोई मदद करने आएगा तो यह बात दिमाग से निकाल लो, क्योंकि अधिकतर मोर्चों पर अपनी लड़ाई खुद ही लड़ना पड़ती है। अकेले ही जीने, लड़ने और करने की ताकत पैदा करो, किसी के भरोसे मत रहो। जो व्यक्ति ऐसा करने की क्षमता नहीं रखते ...
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वर्तमान युग में अब रिश्ते दिल की बजाय दिमाग से निभाए जा रहे हैं। जब से रिश्तों को दिमाग से निभाया जाने लगा है तब से रिश्तों का महत्व भी धीरे-धीरे खत्म होने लगा है। संयुक्त परिवार तो टूट ही गए अब परिवार भी टूट रहे हैं और सब कुछ बिखर रहा है। इस ...
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जन्मदिन के एक दिन पहले, रौनक रिद्धि को डिनर पर ले गया, जहाँ वह पूरे समय अपने फ़ोन पर ही लगा रहा। खाना हो गया और दोनों घर आ गए। 12 बजे रात को बड़े बेमन से रौनक ने रिद्धि से केक कटवाया, जिससे रिद्धि उदास हो गई।
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रक्षाबंधन का त्‍योहार बहन और भाई के प्रतीक का त्‍योहार है। इस दिन बहन अपने भाई को राखी बांधती है और उसकी रक्षा की कामना करती है। वहीं भाई अपनी बहन को रक्षा का वचन देता है। कई बार तो भाई-बहन में राखी वाले दिन भी नोक-झोंक हो जाती है। लेकिन वह सुलझ भी ...
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प्रचीन काल या मध्यकाल में राखियां जैसी होती थीं आजकल वैसी नहीं होती। अब तो राखी को स्वरूप बहुत बदल गया है। राखी का स्वरूप ही नहीं बदला बल्कि पहले राखी को राखी नहीं कहा जाता था। मतलब यह कि नाम के साथ ही स्वरूप भी बदला है। इस बार राखी का मार्केट भी ...
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बाजार में कई तरह की सुंदर सुंदर राखियां आ चुकी हैं। पहले सूत का धागा होता था, फिर नाड़ा बांधने लगे। फिर नाड़े जैसा एक फुंदा बांधने का प्रचलन हुआ। बाद में पक्के धागे पर फोम से सुंदर फुलों को बनाकर चिपकाया जाने लगा और अब वर्तमान में तो राखी के कई रूप ...
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श्रावण माह की पूर्णिमा को रक्षा बंधन का त्योहार मनाया जाता है। अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार इस बार यह पर्व 22 अगस्त 2021 रविवार के दिन रहेगा। यदि भाई और बहन एक समान उम्र के हैं तो उनमें प्यार और तकरार चलती रही है परंतु उन्हें एक दूसरे का दोस्त भी बनना ...
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प्रतिवर्ष श्रावण माह की शुक्ल पक्ष की तृतीया को हरियाली तीज का त्योहार मनाया जाता है। इस बार बुधवार, 11 अगस्त 2021 को हरियाली तीज मनाई जाएगी। इस दिन सुहागन स्त्रियां अपने पति की लंबी उम्र और अच्छे स्वास्थ्य के लिए भगवान शंकर और मां पार्वती की पूजा ...
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कोरोना काल ने कई दिलों को अच्छा/बुरा बदला। रिश्ते टूटे भी, जुड़े भी। जीने का अंदाज भी बदला। ऐसा ही किस्सा सामने आया। रुषी का पूरा परिवार कोरोना की चपेट में आ गया। खबर लगने पर पुष्पा दीदी ने उसे फोन किया। जग जाहिर है कि सिवाय सांत्वना और हिम्मत के कोई ...
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सोशल मीडिया रिश्ते ‘प्रस्तुत’ करने का सर्वसुलभ और सबसे सस्ता साधन है। दोस्ती फिर इससे अछूती कैसे रहती? लोगों ने खूब दोस्ती का प्रदर्शन किया। कुछ सच्चे, कुछ समय से बने। ऐसे ही कुछ उदाहरण देखने को मिले वीडियो के रूप में जिनके टाइटल थे ‘फ्रेंड्स फॉर ...
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अथॉरिटेटिव पेरेंट्स अपने बच्चों के स्वभाव और हरकतों को समझने और उन्हें बेहतर बनाने में समय और एनर्जी व्यतीत करते हैं। इस बात की भी पूरी कोशिश करते हैं कि बच्चों को पॉजिटिव डिसिप्लिन सिखाया जा सके!
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लॉक डाउन के दौरान सोशल मीडिया पर ही पूरा घर-बंद देश उमड़ पड़ा... क्योंकि बाकि बचे हुए तो जीने मरने, अपने देश-गांव की मिटटी में लौटने की, जान की परवाह किए बिना, भूखे-प्यासे अपने परिवारों के साथ संघर्ष कर रहे हैं। देश इन्हीं दो वर्गों में बंट गया।
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अमेरिकी महिलाओं ने 122 करोड़ बार सर्च किया कि -मदद करो, वो मुझे नहीं छोड़ेगा। 1.07 करोड़ बार सर्च किया - वह मुझे मार डालेगा. 32 करोड़ बार–वह मुझे मारता है। और अमेरिकी पुरुष सर्च कर रहे थे - 16.5 करोड़ बार - पत्नी को कैसे काबू करें? उन्हें प्रताड़ित ...
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जून का महीना कुछ लोगों के लिए बेहद खास महीना है या हम कह सकते हैं यह महीना एलजीबीटी के लिए खास होता है। हर साल जून माह को एक प्राइड मंथ के तौर पर सेलिब्रेट किया जाता है। पूरे महीने जश्न का माहौल रहता है। धरती को इंद्रधनुष के रंगों से भर दिया जाता ...
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छोटे से गुड्डू को पार्क में खेलने जाना है, बिट्टू को गग्गा माता को रोटी,घास खिलाने, उसकी गर्दन में हाथ फेरने जाना है। छोटू को गली के नुक्कड़ पर जो उसकी जूली ‘तू-तू’ ने रूई के गोले से नर्म-नर्म बच्चे दिए थे उन्हें खिलाने और दूधू-रोटी देने जाना है। ...
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बदलते हुए इस भयावह दौर में हमने बात की इस देश की तरुणाई से.....और जाना उनसे कि कोविड काल में वे क्या सोच रहे हैं....क्या सीखा उन्होंने इस वक़्त से....हमने देखा कि इस विषम दौर ने इन युवाओं के भीतर संवेदनशीलता की एक नई परिभाषा रची है...उनके भीतर ...
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