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गजलक्ष्मी व्रत कब है, इस दिन विशेष वरदान देती हैं महालक्ष्मी, जानिए शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

शनिवार,सितम्बर 25, 2021
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गजलक्ष्मी व्रत के दिन हाथी की पूजा और महालक्ष्मी के गजलक्ष्मी स्वरूप की पूजा की जाती है। इस साल यह व्रत मत-मतांतर से 28 और 29 सितंबर को मनाया जा रहा है। इस व्रत में मिट्टी के गज बनाए जाते हैं।
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श्राद्ध पक्ष में आने वाली अष्टमी को लक्ष्मी जी का वरदान प्राप्त है। यह दिन विशेष इसलिए भी है कि इस दिन सोना खरीदने का महत्व है। मान्यता है कि इस दिन खरीदा सोना आठ गुना बढ़ता है। साथ ही शादी की खरीदारी के लिए भी यह दिन उपयुक्त माना गया है। इस दिन ...
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इस वर्ष 24 सितंबर 2021, शुक्रवार को आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की संकष्टी चतुर्थी मनाई जा रही है। इस दिन श्रीकृष्ण तथा बाणासुर की यह कथा पढ़ी जाती है। आइए पढ़ें-
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मां संतोषी को प्रिय शुक्रवार के दिन विधि-विधान से पूजन, विधि, कथा सुनने तथा आरती आदि करने से जीवन में लाभदायी परिणाम प्राप्त होते है।
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पितृ पक्ष में आने वाले गजलक्ष्मी व्रत पूजन की सरल प्रामाणिक विधि... व्रत को 16 वर्षों तक ही पूरे करना चाहिए। यदि परिस्थितिवश 16 वर्ष के बाद उद्यापन नहीं कर सकें, तो व्रत को आगे भी किया जाता रहे, जब तक कि उद्यापन न हो। यह व्रत आश्विन (क्वांर) कृष्ण ...
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महालक्ष्मी पर्व यानी गजलक्ष्मी व्रत है। इस दिन को दीपावली से भी अधिक शुभ माना जाता है। पितृ पक्ष में आने वाले गजलक्ष्मी व्रत में अगर अपनी राशि अनुसार विधि-विधान से पूजन किया जाए तो महालक्ष्मी विशेष प्रसन्न होती हैं और जीवन में धन-समृद्धि आती है।
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भाद्रपक्ष की शुक्ल अष्टमी (राधा अष्टमी) से लेकर श्राद्ध की अष्टमी तक महालक्ष्मी के विशेष आशीष झरते-बरसते हैं।
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हिन्दू कैलेंडर के अनुसार भाद्रपद के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी को अनंत चतुर्दशी ( Anant Chaturdashi 2021 ) का व्रत रखा जाएगा। अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार इस वर्ष यह पर्व 19 सितंबर 2021 को रहेगा। आओ जानते हैं इस दिन का महत्व के साथ ही 14 पौराणिक तथ्य।
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भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की द्वादशी (12वें दिन) के दिन भुवनेश्वरी देवी की जयंती मनाई जाती है। अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार 2021 में ये 18 सितम्बर को मनाई जाएगी। आओ जानते हैं माता भुवनेश्वरी के संबंध में 10 अनजाने रहस्य।
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भाद्रपद के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी से 10 दिवसीय गणेश चतुर्थी उत्सव की शुरुआत होती है जो अनंत चतुर्दशी तक चलती है। इस बार गणेश उत्सव की शुरुआत 10 सितंबर से होगी और 19 सितंबर को अंत चतुर्दशक्ष का व्रत रखा जाएगी। आओ जानते हैं अनंत चतुर्दशी के व्रत के ...
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अनंत चतुर्दशी भाद्रपद के शुक्ल पक्ष में आती है। डोल ग्यारस के बाद अनंत चतुर्दशी और उसके बाद पूर्णिमा। अनंत चतुर्दशी के दिन जहां भगवान अनंत की पूजा की जाती है वहीं इसी दिन गणेश प्रतिमा विसर्जन भी होता है। छह चतुर्थियों का खास महत्व है- भाद्रपद शुक्ल ...
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17 सितंबर 2021 - विश्वकर्मा पूजा ( vishwakarma puja ) : भाद्रपद की एकादशी को वास्तुकार एवं शिल्पकार भगवान विश्वकर्मा विधि-विधान से पूजा की जाती है। इस बार यह पूजा 17 सितंबर शुक्रवार को होगी। भारत के कर्नाटक, असम, पश्चिमी बंगाल, बिहार, झारखण्ड, ओडिशा ...
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डोल ग्यारस का महत्व श्री कृष्ण ने युधिष्ठिर से कहा था। एकादशी व्रत सबसे महान व्रत में आता है। इसके प्रभाव से सभी दुखों का नाश होता है, समस्त पापों का नाश करने वाली
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भाद्रपद में शुक्ल पक्ष की एकादशी को परिवर्तनी एकादशी कहते हैं। इसके अलावा इसे जलझूलनी यानी डोल ग्यारस भी कहते हैं। इसके अलावा इसे वामन और पद्मा एकादशी भी कहते हैं। इस बार यह एकादशी 17 सितंबर 2021 शुक्रवार को रहेगी। आओ जानते हैं श्रीकृष्‍ण के जलवा ...
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लोक देवता वीर तेजाजी का जन्म नागौर जिले में खड़नाल गांव में ताहरजी (थिरराज) और रामकुंवरी के घर माघ शुक्ल चौदस को जाट परिवार में हुआ था। तेजा, राजा बाक्साजी के पुत्र थे।
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भारत के अनेक प्रांतों में तेजादशमी का पर्व श्रद्धा, आस्था एवं विश्वास के प्रतीकस्वरूप मनाया जाता है। इस साल 16 सितंबर, गुरुवार को तेजा दशमी मनाई जाएगी। भाद्रपद शुक्ल दशमी को तेजादशमी पर्व मनाया जाता है।
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हर माह आने वाली शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को मासिक दुर्गाष्टमी व्रत मनाया जाता है। हिंदू कैलेंडर के अनुसार, भाद्रपद माह का मासिक दुर्गा अष्टमी पर्व मंगलवार, 14 सितंबर, 2021 को मनाया जाएगा।
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अनंत चतुर्दशी भाद्रपद के शुक्ल पक्ष में आती है। डोल ग्यारस के बाद अनंत चतुर्दशी और उसके बाद पूर्णिमा। अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार अनंत चतुर्दशी का पर्व 19 सितंबर 2021 रविवार को रहेगा। अनंत चतुर्दशी के दिन भगवान अनंत (विष्णु) की पूजा का विधान होता है। ...
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भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को ज्येष्ठा गौरी पूजन व्रत मनाया जाता है। मान्यतानुसार अपने सुहाग की रक्षा के लिए जब असुरों से पीड़ित सर्व स्त्रियां श्री महालक्ष्मी माता गौरी की शरण में गईं
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