हिंदू राष्ट्र की अवधारणा में कुछ गलत नहीं : योगी आदित्यनाथ

Last Updated: शुक्रवार, 7 अप्रैल 2017 (01:57 IST)
लखनऊ। उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री ने अपने पहले टीवी इंटरव्यू में कहा कि हिंदू राष्ट्र की अवधारणा गलत नहीं है। योगी ने कहा कि मोदी सरकार जो केंद्र में कदम उठा रही है, वही मुझे राज्य में करना है। सुप्रीम कोर्ट ने हिंदुत्व को 'वे ऑफ लाइफ' बताया है। ये कोई उपासना पद्धति नहीं है। अगर लोगों की जीवन पद्धति को सुधारने के लिए ये रास्ता उचित है तो हमें इसे अपनाने में कोई संकोच नहीं होना चाहिए।

मुख्यमंत्री योगी ने टीवी पर यह पहला इंटरव्यू

डीडी न्यूज को
और पांचजन्य अखबार को दिया है, जिसमें उन्होंने हिंदुत्व को लेकर अपनी सरकार के पक्ष को बड़े बेबाक तरीके से रखा। उनके इस विचार के बाद सियासी गलियारे में संग्राम मचना शुरू हो गया है।

मुख्यमंत्री की कुर्सी संभालने के बाद से लगातार सरकारी अमले पर शिकंजा कसने के साथ ही भाजपा का संकल्प पत्र लागू कराने में लगे योगी ने अपने सभी काम को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रेरणा माना है। इस इंटरव्यू
में योगी ने राज्य के किसानों की कर्जमाफी और अन्य समस्याओं को लेकर भी विस्तार से बताया।

डीडी न्यूज को मुख्यमंत्री आदित्यनाथ ने जो इंटव्यू दिया, वह इस प्रकार है...
प्रश्‍न : 9 अप्रैल को आपकी सरकार को 20 दिन पूरे हो जाएंगे। इस 20 दिनों में आपकी कैबिनेट के कई फैसले हुए। इसमें आजादी के बाद पहली बार किसी राज्‍य सरकार ने इतनी बड़ी मात्रा में किसानों की कर्जमाफी का फैसला लिया। आपने किसानों को लेकर जो रोडमैप तैयार किया है, आपको क्‍या लगता है आने वाले समय में किसान कर्ज के इस जाल में नहीं फंसेंगे?
* देखिए, कल हमारी सरकार ने जो निर्णय लिया है। इलेक्‍शन के पहले हमारे राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष माननीय अमित शाह जी ने लोक कल्‍याण संकल्‍प पत्र को बनाने का निर्देश दिया था, उनके निर्देशन में जो इलेक्‍शन मैनिफेस्‍टो बना था, उस मैनिफेस्‍टो के साथ-साथ हमारे माननीय प्रधानमंत्री की जो चिंता हमेशा रही है कि इस देश का अन्‍नदाता किसान कैसे खुशहाल हो, कैसे इस देश के किसानों की आत्‍महत्‍याओं का जो लंबा सिलसिला चला था, उस पर ब्रेक लगाया जाए। वह हम सबके सामने एक चुनौती थी और इस दृष्टि से हम लोगों ने कई स्‍तर पर विचार-विमर्श किया।

हमारे सामने दोनों प्रकार की चीजें थीं- एक किसान को राहत देना, अपने मैनिफेस्‍टो के अनुसार अपने वायदे को पूरा, दूसरी तरफ राजकोष पर भी उसका असर न पड़े, हमारे सामान्‍य कार्यक्रम भी जो प्रदेश के अंदर विकास की जो हमारी परिकल्‍पना है, उसके ऊपर इसका कोई प्रभाव न पड़े। इन दोनों में संतुलन बनाना हमारे लिए एक चैलेंज था और इस दृष्टि से हम लोगों ने निर्णय लिया है। मुझे लगता है कि यह माननीय प्रधानमंत्री जी की प्रेरणा थी। माननीय राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष जी ने चुनाव से पहले जो कहा था, पार्टी की बनी इस सरकार ने उस वायदे को पूरा किया है और अन्‍नदाता के प्रति सम्‍मान व्‍यक्‍त किया है।

प्रश्‍न :
प्रधानमंत्री ने चुनाव प्रचार के दौरान गाजीपुर की एक रैली में कहा था कि पहली कैबिनेट होगी जिसमें किसानों का कर्ज माफ होगा, जो कि हुआ भी और कई कदम भी आपने उठाए हैं। क्‍या आपको लगता है कि ये तमाम कदम जो आप लोगों ने उठाए हैं, वो चाहे आलू के किसानों को लेकर हों या गेहूं की खरीदी को लेकर। आने वाले समय में किसान ऐसे माहौल में अपनी खेती भी करेगा। उसकी खेती जो नुकसानदायक है, जिसमें उसका असर उस पर पड़ रहा है, जो नहीं पड़ेगा?


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देखिए, हम कृत संकल्पित हैं, इस सब कार्यों को करने के लिए। आप याद करिए प्रधानमंत्री के रूप में जब मोदीजी ने शपथ ली थी, उनसे पूछा गया था कि आपकी सरकार किसके लिए काम करेगी तो उन्‍होंने एक बात साफ कही थी, जो इलेक्‍शन के पहले भी कही थी, सबका साथ, सबका विकास। उन्‍होंने कहा था, हमारी सरकार गांव, गरीब, किसान और नौजवान के लिए समर्पित होगी। इस देश के अंदर किसानों के लिए स्‍वाइल्‍ड कार्ड जारी कराए गए।

इस देश के किसानों के पास उनके हर खेत को पानी मिले, प्रधानमंत्री ग्रामीण सिंचाई योजना को लागू करने के लिए उन्‍होंने कार्यक्रम प्रारंभ किए। इस देश के किसानों में किसी भी प्राकृतिक आपदा के कारण उनकी फसल को होने वाले नुकसान को बचाने के लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना उन्‍होंने लागू करवाई।

इस देश में आजादी के बाद पहली बार किसानों के द्वारा क्रय की जाने वाली उर्वरक के दाम भी कम हो सकते हैं, यह मोदीजी के नेतृत्‍व में केंद्र की सरकार ने किया। स्‍वाभाविक रूप से हमारे प्रधानमंत्री हैं, हमारे राष्‍ट्रीय नेता भी हैं और हमारे गार्जियन भी हैं। इस नाते केंद्र की सरकार किसानों के लिए जिस भी प्रकार कदम उठा रही है, उत्‍तर प्रदेश सरकार उसका अनुसरण करेगी और किसानों को खुशहाल करेगी। किसानों की आय को दोगुना करना वो हमारी प्राथमिकता में है और हम लोगों का प्रयास होगा कि 2019-20 तक हम उस लक्ष्‍य को प्राप्‍त करेंगे। किसानों की खुशहाली के लिए कदम उठाया गया है, क्‍योंकि वह अन्‍नदाता है, उसकी खुशहाली, हमारी खुशहाली है।

प्रश्‍न :
उद्योगों को लेकर एक विशेष ठोस नीति आपकी कब तक आ सकेगी, क्‍योंकि उसके लिए एक मंत्रिपरिषद का गठन आपकी कैबिनेट में हो चुका है?
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देखिए, कल हमने कुल नौ निर्णय लिए हैं और वो नौ निर्णय अत्‍यंत महत्‍वपूर्ण हैं। जिसमें हमने एक निर्णय लिया है उत्‍तर प्रदेश में एक नर्इ औद्योगिक नीति को लागू करने के लिए, हमारे सामने सबसे बड़ी चुनौती है, उत्‍तर प्रदेश से नौजवानों का पलायन और मैं आश्‍चर्य करता हूं कि इन नौजवानों के अंदर प्रतिभा है, वो कार्य करना चाहता है लेकिन उसके लिए प्रदेश के अंदर उस प्रकार का माहौल नहीं बनाया गया, बल्कि पहले से जो बने उद्योग थे उन्‍होंने यहां से पलायन किया है, लोग यहां से भागे हैं, गए हैं। कोई सुरक्षा का वातावरण यहां नहीं था, न माताएं-बहनें सुरक्षित थीं, न उद्योगपति सुरक्षित था, न व्‍यापारी सुरक्षित था, कानून व्यवस्‍था की बदहाल स्थि‍ति हो गई थी, तो हम लोगों ने आते ही सबसे पहला काम तो कानून व्‍यवस्‍था को सुधारने के लिए कदम उठाए और स्‍पष्‍ट निर्देश जारी कर दिए।

कार्रवाई प्रारंभ हो गई है और स्‍पष्‍ट निर्देश दिया है कि चेहरा देखकर कार्रवाई मत करिए, अपराधी को अपराधी के अनुसार ट्रीट कीजिए, किसी भी जाति का हो, मजहब का हो। दूसरा इस बात को ध्‍यान में रखना कि ये भी मत देखिए कि किस पार्टी का है और किसका नहीं। जो अपराधी है, सख्‍ती के साथ निपटिए उसके साथ। माताओं-बहनों की सुरक्षा के लिए हमने सख्‍त कदम उठाएं और इससे भी सख्‍त कदम उठाएंगे हम।

हमने अपने लोक कल्‍याण संकल्‍प पत्र में एक बात कही थी, सिंगल विंडो सिस्‍टम की हम उसको लागू करने जा रहे हैं और हमें लगता है कि 15 दिन के अंदर हमारा मंत्री समूह इसकी रिपोर्ट दे देगा। हमने इस बात को कहा है कि गुजरात, महाराष्‍ट्र, मध्‍यप्रदेश, छत्‍तीसगढ़, इन राज्‍यों के अंदर उन्‍होंने उद्योगों और निवेश के लिए किस प्रकार का वातावरण बनाया है, किस प्रकार की पालिसी तय की है। भारत के उद्योगपतियों के साथ प्रदेश के उद्योगपतियों के साथ बैठकर आप एक रणनीति बनाइए। समय बहुत कम है, 15 दिन के अंदर सारा काम होना है, आप एक ठोस नी‍ति मेरे सामने प्रस्‍तुत कीजिए। हम अपनी एक उद्योग नी‍ति के साथ आपके सामने आएंगे, उद्योगों के लिए हम उन्‍हें एक वातावरण देंगे, हम उनको सुविधाएं भी देंगे। पूंजी निवेश की यहां एक गारंटी हो, यहां हमारी एक शर्त होगी उत्‍तर प्रदेश के 90 प्रतिशत नौजवानों को रोजगार मिले।

प्रश्‍न :
एक अहम् मुद्दा है प्रदेश में शिक्षा, जिसका स्‍तर लगातार गिरता जा रहा है और जिसके बारे में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भी कहा है। आप सर‍कारी शिक्षा की गुणवत्‍ता और उसके स्‍तर को लेकर क्‍या करने जा रहे हैं?
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देखिए, हम इस पर काम करेंगे, हमने विभिन्‍न मंत्रालयों को एक काम दिया है और वह काम है कि वो अपना प्रजेंटेशन प्रस्‍तुत करें मंत्रिपरिषद के सामने। हम यहां बैठने के लिए नहीं आए हैं, सत्‍ता हमारे लिए मौज-मस्‍ती का अड्डा नहीं है। यह हमारे लिए एक साधना है और उस दृष्टि से मैंने प्रत्‍येक मंत्रालय से आग्रह किया है कि देखिए, हम लोग तो कुछ जानते नहीं हैं, हम तो सीखने के लिए आए हैं और जो प्रदेश के हित में होगा उसे लागू करने लिए आए हैं।

हम यहां परमानेंटली रहने के लिए भी नहीं आए हैं, एक समय तक काम करेंगे और उसके बाद अपना रास्‍ता निकाल लेंगे, लेकिन जितने दिन रहेंगे प्रभावी ढंग से काम करेंगे और हमारे साथ काम करना होगा। प्रजेंटेशन लेना हमने प्रारंभ किया है और उस क्रम में सबसे पहले मैंने शिक्षा को ही चुना है। यहां की प्राथमिक, माध्‍यमिक, उच्‍च, व्‍यावसायिक शिक्षा, चिकित्‍सा शिक्षा इन सभी को हमने लिया है और आमूलचूल परिवर्तन की आवश्‍यकता है।

हमने इस बात को तय कर लिया है कि पाठ्यक्रम को आप इस प्रकार का बनाएं कि यहां का जो बच्‍चा है, यहां जो बालक है, यहां की जो बालिका है वह राष्‍ट्रीय स्‍तर की प्रतिस्‍पर्धा में अपने को सक्षम पाए। प्राथमिक स्‍कूल में गांव, गरीब का बच्‍चा उसके अंदर कोई हीनभावना पैदा न होने पाए, इसके लिए हम उसे यूनिफार्म देने जा रहे हैं। हम उसे अच्‍छी क्‍वालिटी की यूनिफार्म देंगे, जूते देंगे, कॉपी-किताब देंगे, उसके पाठ्यक्रम को हम आधुनिकता के साथ जोड़ेंगे और इस बात को सुनिश्चित कर दिया गया है इसके पहले जो यूनिफार्म मिलती थी वह नवंबर-दिसंबर में मिलती थी, उसे जुलार्इ के प्रथम सप्‍ताह में उपलब्‍ध कराया जाए।

इस बार इलेक्‍शन के नाते उनका सेशन थोड़ा लेट चल रहा है, लेकिन हमने कहा है कि उनको पहले सप्‍ताह में सारी चीजें मिल जाएं, इस पर हम लोगों ने कार्रवाई प्रारंभ की है। हम लोगों ने यह भी कहा है कि वर्ष में 365 दिन होते हैं और विद्यालय यहां केवल 120 दिन चल पाते हैं, इसको बढ़ाकर उसे 220 दिन आप कैसे करेंगे, पाठ्यक्रम को कैसे आप ठीक करेंगे, पाठ्यक्रम को आप राष्‍ट्रीयता के साथ, राष्‍ट्रभक्ति के साथ कैसे जोड़ेंगे, उन बच्‍चों को कैसे शिक्षा के संस्‍कारों के साथ जोड़ेंगे, पाठ्यक्रम को इस सबके साथ समाहित करने की व्‍यवस्‍था करिए।

माध्‍यमिक शिक्षा में कुछ परिवर्तन करने के प्रयास करने का भी उनको कहा है। आवश्‍यकता पड़ती है तो आप सीबीएसई पैटर्न को अपनाइए, क्‍यों‍कि राष्‍ट्रीय स्तर की जितनी भी प्रतियोगिताएं होती हैं, उनका आधार यही है। एनसीआरटी का आप सहयोग लीजिए और अच्‍छा पाठ्यक्रम देकर उन बच्‍चों को उस योग्‍य बनाने का प्रयास करिए। उनको जो सुविधा मिलनी है उसे आप उपलब्‍ध कराने की तैयारी करिए और हम अंग्रेजी और संस्‍कृत उनको प्रा‍थमिक स्‍तर से पढ़ाने का प्रयास करें, लेकिन जब वह 10वीं में आए तो माध्‍यमिक स्‍तर पर विदेशी भाषा को भी उसके पाठ्यक्रम का हिस्‍सा बनाएं।

अगर वह शोध के लिए जाना चाहता है, जर्मनी में, फ्रांस में, जापान में तो उसे तीन महीने वहां जाकर उसे पहले वहां की भाषा को सीखना पड़ता है। अगर हमारा बच्‍चा 11वीं-12वीं में ही वहां की भाषा को सीख लेगा, जान लेगा तो शोध के लिए जाते समय उसका वहां 3 महीने का समय बरबाद नहीं होगा। हम विदेशी भाषा को उसका हिस्‍सा बनाएंगे। हमने कहा कि यहां नकल मुक्त शिक्षा हो, इसकी व्‍यवस्‍था करिए। क्‍वालिटी कैसे आप मेंटेन कर पाएंगे यह देखिए।

एजुकेशन में गुणवत्‍ता बनाए रखने के लिए हमारे प्रयास होने चाहिए और उत्‍तर प्रदेश के अंदर जो विश्‍वविद्यालय हैं उनकी अपनी एटानॉमी है, यूजीसी के मार्गदर्शन में सबको अपनी स्‍वायत्‍तता है, लेकिन स्‍वायत्‍तता का मतलब इतनी छूट नहीं है कि लोग हमारे नौजवान बच्‍चों के साथ खिलवाड़ करें। हम लोगों ने कहा, क्‍या यह संभव है कि पूरे उत्‍तर प्रदेश में हम एक समान पाठ्यक्रम लागू कर सकें जो गुणवत्‍तायुक्‍त पाठ्यक्रम हो।

इसके अलावा संस्‍कृति के बारे में, उर्दू के बारे में हम क्‍या कर सकते हैं। फारसी, अरबी के बारे में क्‍या कुछ कर सकते हैं। अन्‍य विदेशी भाषाओं के बारे में क्‍या कुछ कर सकते हैं। इन सबको समाहित करके आप उसकी तैयारी करिए और मुझे विश्‍वास है कि जब नया सत्र प्रारंभ हो रहा है तो इसमें यह सब चीजें दिखेंगी और सबको 90 दिन का कार्य दे दिया गया है और 90 दिन के अंदर अपना काम पूरा कीजिए और 100 दिन की उपलब्धि मेरे सामने प्रस्‍तुत कीजिए।

प्रश्‍न :
क्‍या प्रदेश में भय का माहौल बनाया जा रहा है या कानून व्‍यवस्‍था सही तरीके चले उसके जो दिशा-निर्देश हैं उनका पालन किया जाए, इस पर ज्‍यादा तबज्‍जो है?
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देखिए, कानून का राज हो, यह हमारी प्राथमिकता है और भारतीय जनता पार्टी के प्रति आम जनमानस का जो अपनी जातीय दीवारों को तोड़कर, उससे बाहर निकलकर भारतीय जनता पार्टी को जो समर्थन दिया है, वो इसीलिए दिया है कि कानून का राज स्‍थापित हो सके और हमने इसी बात को कहा है कि कानून से बड़ा कोई नहीं। मैं भी अगर कानून का उल्‍लंघन करूंगा तो कठघरे में खड़ा होऊंगा, लेकिन कानून का राज स्‍थापित हो, इसके लिए हम कृत संकल्पित हैं।

हम शिक्षकों की भर्ती भी पारदर्शी ढंग से करने जा रहे हैं। पुलिस में आधी जगह खाली पड़ी हुई है, एकदम पारदर्शी व्‍यवस्था के साथ हम पुलिस की भर्ती करेंगे। कहीं किसी को बोलने का अवसर नहीं प्राप्‍त होगा, हम ऐसी व्‍यवस्‍था देंगे और किसी को भी कानून हाथ में लेने नहीं देंगे। कानून के साथ खिलवाड़ नहीं करने देंगे, सरकार इसके साथ कृत संकल्पित है। हमने अपने लोक कल्‍याण संकल्‍प पत्र में इसको कहा है। हम इसे लागू करेंगे।

प्रश्‍न :
प्रदेश में गन्‍ना किसानों के सा‍थ चीनी मिलों से जुड़ी समस्‍‍याओं के बारे में आप क्‍या कहना चाहेंगे?
* देखिए, हम लोग इस पर निर्णय कर चुके हैं और मुझे लगता है कि आवश्‍यकता पड़ी तो हम कैबिनेट में कुछ नई चीनी मिलों के सा‍थ उत्‍तर प्रदेश में आएंगे। हम लोगों ने इस बात को तय कर दिया है कि जिन किसानों ने करंट ईयर में चीनी मिलों को गन्‍ना भेजा है, 15 दिन के अंदर उन्‍हें इसका भुगतान हो जाना चाहिए और जिनका इससे पूर्व का बकाया है उन्‍हें 2 माह के अंदर भुगतान हो जाना चाहिए। नहीं तो चीनी मिल के प्रबंधन ही नहीं मालिक के खिलाफ भी कार्रवाई करेंगे, आरसीएम जारी करेंगे और आगे की कार्रवाई हम लोग करेंगे।

इतना ही नहीं, हमने गेहूं उत्‍पादक किसानों के बारे में भी निर्णय लिए हैं। आप आश्‍चर्य करेंगे उत्‍तर प्रदेश इतना बड़ा राज्‍य है जिसमें 22 करोड़ से ज्‍यादा लोग निवास करते हैं। 77.7 प्रतिशत लोग किसान हैं और इस सबके बावजूद यहां गेहूं क्रय होता था मात्र 5 लाख टन, वो भी किसानों से सीधे नहीं, दलालों के जरिए। हमने कहा, ऐसा नहीं होगा। हम लोगों की पूरी टीम छत्‍तीसगढ़ गई, वहां का पीवीएस सिस्‍टम बहुत अच्‍छा है। हमने इस काम को यहां पर लागू किया।

हमने 5 हजार सेंटर खोले हैं। किसान जहां भी अपना गेहूं बेचना चाहते हैं, अपना आधार कार्ड लेकर जाएं, वहां आपका गेहूं खरीदेंगे। किसानों के बैठने की व्‍यवस्‍था वहां रहेगी और प्रति क्विंटल उन्‍हें 10 रुपए दिए जाएंगे। पहले चरण में हम 40 लाख टन गेहूं खरीदी करने जा रहे हैं, जिसे बढ़ाकर 80 लाख टन करेंगे। और गेहूं की फसल अभी पूरी तरह स्‍टार्ट भी नहीं हुई और किसानों को प्रति क्विंटल 1700 रुपए मिलना शुरू हो गए हैं। किसानों को जहां से भी लाभ मिले, वह वहां बेचने को स्‍वतंत्र है। हम उसे बाध्‍य नहीं करेंगे। लेकिन कोई उसका गेहूं नहीं खरीदेगा तो उसे हम खरीदेंगे। किसान हमारी प्राथमिकता में हैं। उसे कोई परेशानी नहीं आने देंगे।




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