कहां से आएंगे नए नोट, आरबीआई के पास कागज ही नहीं!

पुनः संशोधित शुक्रवार, 18 नवंबर 2016 (13:04 IST)
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इस समय पूरे देश में पिछले एक हफ्ते से नए नोटों को बदलवाने के लिए भारी भीड़ लगी है और दिन पर दिन लोगों में इस प्रक्रिया को लेकर नाराजगी बढ़ती ही जा रही है। वित्त मंत्रालय का कहना है कि उनके पास पुराने नोटों को बदलने के लिए पर्याप्त हैं लेकिन हर दिन बयान बदलती सरकार और नोटों की सीमा कम किए जाने से पूरी प्रक्रिया पर सवाल उठने लाजमी है।


इस बीच एक खबर के अनुसार नोटबंदी के बाद नए नोट छापने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) अभी तक टेंडर प्रक्रिया शुरु नहीं कर पाया है। एक प्रमुख दैनिक में छपी खबर के अनुसार सरकार की मैसूर स्थित पेपर मिल में प्रयोग के तौर पर कम मात्रा में जो मुद्रा कागज बनाए गए थे फिलहाल, इन्हीं से काम चलाया जा रहा है। बताया जा रहा है कि पूरी क्षमता से काम करने पर भी यह पेपर मिल जरूरत के सिर्फ पांच फीसदी हिस्से को ही पूरा कर सकती है। बाकी बचे हुए पेपर के लिए सरकार अमेरिका, ब्रिटेन और जर्मनी की कंपनियों पर निर्भरता है।

सूत्रों के अनुसार अब रिजर्व बैंक जरूरत के हिसाब से नए करेंसी नोट छापने के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू करेगा। इन कंपनियों को को उसमें शामिल करने के लिए प्रस्ताव भेजा जा रहा है। लेकिन इस समय आरबीआई द्वारा वित्त मंत्रालय को भेजी गई एक रिपोर्ट में नए नोट छापने के लिए 22,000 मीट्रिक टन करेंसी कागज की जरूरत बताई गई है और फिलहाल, भारत के पास जरूरत का 10 फीसदी ही मुद्रा कागज उपलब्ध है जिसे भारत में तैयार किया जाता है। ऐसी स्थिति में सरकार नोट कहां से लाएगी और पुराने नोटों को किस तरह बदलेगी इसपर सवालिया निशान उठ रहे हैं।



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