राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने दो और क्षमा याचनाएं ठुकराईं

पुनः संशोधित रविवार, 18 जून 2017 (14:19 IST)
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नई दिल्ली। राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने अपना कार्यकाल पूरा करने से बस 2 माह पहले मई के आखिरी हफ्ते में 2 और क्षमा-याचनाएं ठुकरा दीं।

एक क्षमा-याचना 4 साल की बच्ची के और हत्या के मामले से जुड़ी थी। इंदौर में 2012 में 3 पुरुषों ने इस जघन्य अपराध को अंजाम दिया था। दूसरी घटना पुणे की 2007 की है जिसमें 2 पुरुषों ने 22 साल की एक लड़की के साथ बलात्कार कर उसकी हत्या कर दी थी। ये दोनों याचनाएं राष्ट्रपति सचिवालय को अप्रैल और मई माह में मिली थीं।

दोषियों ने राष्ट्रपति से याचना की थी कि उनको सुनाई गई सजा-ए-मौत माफ कर दी जाएं। उच्चतम न्यायालय इन सजाओं की पुष्टि कर चुका है। बलात्कार और हत्या के इंदौर के जघन्य मामले में अपराध के 1 साल बाद ही शहर की एक अदालत ने जितेंद्र उर्फ जीतू, बाबू उर्फ केतन और सन्नी उर्फ देवेन्द्र को सजा-ए-मौत सुना दी थी।

मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय ने 2014 में और उच्चतम न्यायालय ने 6 जनवरी 2015 को सजा-ए-मौत की पुष्टि कर दी थी। राष्ट्रपति भवन की एक विज्ञप्ति के अनुसार मुखर्जी ने 25 मई को उनकी क्षमा-याचना खारिज कर दी।

पुणे मामले में टैक्सी ड्राइवर पुरुषोत्तम दशरथ बोराटे और उसके सहयोगी प्रदीप यशवंत कोकाड़े ने महिला का बलात्कार कर उसकी हत्या कर दी थी। महिला ने दफ्तर जाने के लिए टैक्सी ली थी।

निचली अदालत ने दोनों को सजा-ए-मौत सुनाई थी। बंबई उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय इसकी पुष्टि कर चुके हैं। राष्ट्रपति ने 26 मई को उनकी क्षमा-याचना ठुकरा दी। मुखर्जी राष्ट्रपति के अपने कार्यकाल में अब तक 30 क्षमा-याचनाएं ठुकरा चुके हैं। वे 5 जुलाई को अपना 5 साल का कार्यकाल पूरा कर लेंगे। (भाषा)



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