गांधी की खादी अब मोदी की खादी...

पुनः संशोधित शुक्रवार, 13 जनवरी 2017 (20:40 IST)
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आयोग के इस साल के और डायरी पर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जगह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीर छापे जाने को लेकर बवाल खड़ा हो गया है। राजनीति दलों के साथ ही सोशल मीडिया पर भी तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। हालांकि भाजपा और उसके समर्थक संगठनों की ओर से मोदी का समर्थन भी किया जा रहा है।
लेकिन, लोगों को यह बात गले नहीं उतर रही है खादी के ग्रामोद्योग के जिस कैलेंडर और डायरी पर बापू हुआ करते थे, अब वहां मोदी दिखाई दे रहे हैं। इसके पीछे की मंशा क्या है इसका तो अभी खुलासा नहीं हुआ है, लेकिन देशवासियों के मन में यह सवाल जरूर है कि यह सब कुछ मोदी के कहने पर हुआ है या फिर चंद 'चापलूसों' ने मोदी को खुश करने के लिए ऐसा किया है। इतना तय है कि इससे नरेन्द्र मोदी की ही किरकिरी होगी। 
 
गांधीजी के प्रपौत्र के तुषार गांधी ने भी इस तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि बापू अब खादी ग्रामोद्योग आयोग को राम-राम कह दें। तुषार ने कहा  कि आयोग ने ने खादी और बापू दोनों की विरासत को कमजोर ही किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि मोदी को 10 लाख के सूट पसंद हैं और शायद खादी  भी गरीबों की पहुंच से बाहर हो गई है। गांधी ने साफ किया कि ये उनकी नाराजगी नहीं बल्कि दर्द है।
 
प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि खादी के 2017 के कैलेंडर और डायरी पर प्रधानमंत्री का चित्र छपा है और ऐसा पहले कभी नहीं हुआ।  खादी की सोच, खादी के प्रचार, खादी से संबंध और इसके चरखे पर बापू के अलावा किसी और का अधिकार नहीं हो सकता। बापू महान विभूति थे और  उनकी जगह कोई नहीं ले सकता। उन्होंने कहा कि गांधी राष्ट्रपिता अपने कर्मों से बने और उन्होंने कभी दिखावा नहीं किया। मोदी का चित्र छापने की तीखी  आलोचना करते हुए उन्होंने कहा कि आरएसएस पर महात्मा गांधी की हत्या के आरोप लगे थे और अब मोदी उनकी जगह खुद को पेश कर रहे हैं।
 
जदयू के महासचिव एवं प्रवक्ता केसी त्यागी ने कहा कि प्रधानमंत्री को कैलेंडर पर से अपनी तस्वीर वापस ले लेनी चाहिए। उन्होंने राष्ट्रपिता की जगह  प्रधानमंत्री का चित्र छापने की निंदा करते हुए कहा कि खादी ग्रामोद्योग आयोग के अध्यक्ष वीके सक्सेना भारतीय प्रशासनिक सेवा के गुजरात कैडर के  सेवानिवृत्त अधिकारी हैं तथा मोदी के निर्देश पर ही उनकी नियुक्ति हुई है। उन्हें तुरंत पद से हटाना चाहिए।
 
ममता बनर्जी ने भी इसका विरोध करते हुए ट्‍वीट किया कि महात्मा गांधी और चरखे के महान प्रतीक की जगह अब मोदी बाबू ने ले ली है। उन्होंने सवाल  उठाते हुए कहा कि गांधीजी राष्ट्रपिता थे, मोदी जी क्या हैं? 
 
ट्‍विटर पर भी इस प्रकरण पर तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही हैं। इस मामले में #चरखा चोर मोदी काफी ट्रेंड कर रहा है। दर्शन भट्‍ट नाम से एक ट्‍वीट किया गया है कि गाधी, सरदार, लाल, बाल, पाल, भगतसिंह, बोस, नेहरू आदि वास्तविक हीरो हैं। कोई भी उनकी जगह नहीं ले सकता। सरफरात अपने ट्‍वीट में लिखते हैं फादर ऑफ नेशन गांधी, फादर ऑफ भाषण मोदी। सौरभ शर्मा लिखते हैं कि यदि इससे खादी की बिक्री बढ़ रही है तो यह देश के लिए अच्छा है। एक अन्य ट्‍वीट में भी कहा गया है कि यदि कैलेंडर और डायरी पर मोदी की तस्वीर से खादी लोकप्रिय होती है तो हमें इसका समर्थन करना चाहिए।
 
प्रिंस बी पॉल ने अपने ट्‍वीट में कटाक्ष करते हुए लिखा है कि मोदी अपने डिजाइनर सूट के लिए धागा तैयार कर रहे हैं। भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने ट्‍वीट किया कि कांग्रेस के 50 साल के शासन में खादी की मांग 2 से 7 फीसदी हुई, जबकि पिछले 2 साल में खादी की मांग 34 फीसदी हो गई। ये मोदी जी के आग्रह के कारण ही संभव हुआ है। जफर नामक व्यक्ति ने ट्‍वीट किया है कि गांधी जी ने खादी उद्योग को स्थापित किया, आप पर यह नहीं जंचती। आप और आरएसएस तो अंग्रेजी हाफ पैंट और टीशर्ट पहनते हैं।
 
भाजपा की सफाई : भाजपा ने आज उन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया कि खादी और ग्रामोद्योग आयोग के कैलेंडरों पर महात्मा गांधी के चित्र के स्थान पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का चित्र लगा दिया गया है । पार्टी ने कहा कि गांधी के चित्र का अतीत में कई बार उपयोग किया गया, साथ ही दावा किया कि मोदी गांधीजी के दर्शन को बढ़ावा दे रहे हैं जबकि कांग्रेस उनके नाम और चित्र का इस्तेमाल कर रही है।
 
भाजपा प्रवक्ता संबित पात्र ने कहा कि एक गैर मुद्दे को बेवजह तुल दिया जा रहा है, साथ ही दावा किया किया केवीआईसी के कैलेंडरों और डायरी में गांधीजी के चित्रों का इस्तेमाल 1996, 2002, 2005, 2011, 2012 और 2013 में उपयोग नहीं किया गया था।



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