हैदराबाद एनकाउंटर 'फर्जी', 10 पुलिस अधिकारियों पर हत्या का मामला चलाने की सिफारिश

Last Updated: शनिवार, 21 मई 2022 (23:18 IST)
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हैदराबाद। हैदराबाद में दिसंबर 2019 में एक पशु चिकित्सक के साथ सामूहिक बलात्कार और हत्या के मामले में 4 संदिग्धों की मुठभेड़ में मौत की जांच के लिए उच्चतम न्यायालय द्वारा नियुक्त आयोग ने कहा है कि घटना स्थल के कुछ ही वीडियो फुटेज उसे पेश कराए गए थे और (घटना की) प्राथमिकी अदालत भेजने में देरी की गई।

उच्चतम न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश वीएस. सिरपुरकर की अध्यक्षता वाले आयोग ने सर्वोच्च अदालत को सौंपी अपनी रिपोर्ट में खुलासा किया था कि पुलिसकर्मियों ने जानबूझकर गोली चलाई थी और उस समय संदिग्धों में से 3 नाबालिग थे।

चार संदिग्धों मोहम्मद आरिफ, चिंताकुंटा चेन्नाकेशवुलु, जोलू शिवा और जोलू नवीन को 29 नवंबर, 2019 को पशु चिकित्सक से सामूहिक बलात्कार और हत्या के मामले में गिरफ्तार किया गया था। 4 संदिग्धों को पुलिस ने 6 दिसंबर, 2019 को यहां चटनपल्ली में उसी राजमार्ग पर कथित मुठभेड़ में मार गिराया था, जहां 25 वर्षीय पशु चिकित्सक का जला हुआ शव मिला था।
पुलिस का बयान मनगढ़ंत : रिपोर्ट में कहा गया है कि रिकॉर्ड से पता चलता है कि सुरक्षित गृह से लेकर चटनपल्ली में हुई घटना तक का पुलिस दल का पूरा बयान मनगढ़ंत है। संदिग्धों के लिए पुलिस के हथियार छीनना असंभव था और वे आग्नेयास्त्रों को नहीं चला सकते थे। इसलिए, पूरा बयान अविश्वसनीय है।

आयोग ने यह भी कहा कि तेलंगाना में, यहां तक कि ग्रामीण क्षेत्रों में और विशेष रूप से राजमार्गों पर सीसीटीवी कैमरों का प्रभावी नेटवर्क है और संदिग्धों की गिरफ्तारी के बाद आयोजित संवाददाता सम्मेलन में यह दावा किया गया था कि अपराध का पता लगाने और अपराधियों की गिरफ्तारी में वैज्ञानिक साक्ष्य की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
सीसीटीवी फुटेज नहीं किए एकत्र : रिपोर्ट के अनुसार जांच अधिकारी ने कहा कि उन्होंने शादनगर थाने या रवि गेस्ट हाउस या रवि गेस्ट हाउस से घटना स्थल तक कोई सीसीटीवी फुटेज नहीं एकत्र किया है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि पुलिस अधिकारियों ने सूचित किया कि उन्हें लगा कि सीसीटीवी फुटेज किसी काम का नहीं है और इसलिए उन्होंने वीडियो क्लिप संभाल कर रखने का कोई प्रयास नहीं किया।
आयोग ने कहा कि घटना स्थल के कुछ वीडियो फुटेज आयोग के समक्ष पेश किए गए, जो क्रमानुसार नहीं हैं और वे बहुत छोटी हैं जो किसी प्राथमिक फुटेज से लिए गए प्रतीत होते हैं। इस संबंध में राज्य द्वारा कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया गया कि सभी फुटेज आयोग के समक्ष क्यों नहीं रखे गए।

सच्चाई को छिपाया गया : आयोग ने टिप्पणी की कि इन खामियों के अलावा, ऐसा प्रतीत होता है कि सच्चाई को सामने आने से रोकने के लिए जानबूझकर प्रयास किया गया है। उसने कहा कि इन हत्याओं में शामिल सभी 10 पुलिस अधिकारियों के खिलाफ हत्या का मामला चलाया जाना चाहिए और उनमें से सभी पुलिसकर्मी 4 संदिग्धों की सुरक्षा के लिए जिम्मेदार थे।



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