उत्तराखंड : चारधाम यात्रा में 12 दिनों में अब तक 36 श्रद्धालुओं की मौत, स्वास्थ्य सुविधाओं पर उठे सवाल

एन. पांडेय| Last Updated: सोमवार, 16 मई 2022 (00:10 IST)
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देहरादून। चारधाम यात्रा में अभी तक 36 श्रद्धालुओं की मौत हो चुकी है। यमुनोत्री धाम में 14 श्रद्धालुओं की मौत हुई है। इसमें 11 पुरुष और 3 महिला तीर्थयात्री शामिल हैं। में 13 श्रद्धालुओं की मौत हुई है। बदरीनाथ धाम में भी अब तक 5 यात्रियों ने जान गंवाई है। चारधाम यात्रा के दौरान पुराना मर्ज और उच्च हिमालय में स्थित इन धामों की ठंड को आम आदमी झेलने में सक्षम नहीं दिख रहा।
रविवार को यमुनोत्री धाम के दर्शन करने आए तीर्थ यात्री पुरेंद्र सरकार (70) पुत्र हरेंद्र नाथ सरकार, निवासी कुच विहार, पश्चिम बंगाल का स्यानाचट्टी में सुबह अचानक स्वास्थ्य खराब हो गया। इसके बाद उन्हें 108 सेवा की मदद से बड़कोट सीएचसी लाया गया, लेकिन हॉस्पिटल पहुंचने के पहले ही रास्ते यात्री ने दम तोड़ दिया। पुलिस ने आवश्यक कार्रवाई करने के बाद शव को उनके परिजनों को सौंप दिया। जान गंवाने वाले यात्रियों का आंकड़ा हर दिन बढ़ रहा है।

सरकार के साथ ही स्वास्थ्य विभाग भी इन हालातों पर खुद को बेबस बताने के सिवाय कुछ नहीं कर पा रहा है जबकि विशेषज्ञों का मानना है कि हार्ट पर हो रहे इस अटैक का सही समय पर उपचार हो जाए तो श्रद्धालुओं की जान बचाई भी जा सकती है। पिछली 3 मई को गंगोत्री और यमुनोत्री के कपाट खुलने से लेकर अब तक 36 श्रद्धालु स्वास्थ्य कारणों से अपनी जान गंवा चुके हैं।

बीते 12 दिनों के भीतर ही अचानक इतनी मौतें होने के बाद न केवल सरकार में हड़कंप मचा हुआ है, बल्कि भारत सरकार भी इसका संज्ञान ले चुकी है। बावजूद इसके ये सिलसिला टला नहीं है। परिस्थितियों से निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के लिए 01 कार्डियक वैन जरूर भेजी
है।

चारधाम यात्रा के गंतव्यों में स्वास्थ्य सुविधाओं के नाम पर कुछ खास नहीं है, वहां पर तो यह अटैक जानलेवा साबित हो रहा है ।स्वास्थ्य महानिदेशक से लेकर मुख्य सचिव तक प्रदेश में कार्डियोलॉजिस्ट की कमी होने का ही बहाना बनाते नजर आते हैं जो उनके इस विषय को लेकर सरेंडर का ही प्रतीक है। साफ़ है कि यात्रियों को भगवान का ही भरोसा है।
दामों में मनमानी से परेशानी : चारधाम यात्रा पर आ रहे बेहिसाब तीर्थ यात्रियों को स्थानीय होटल व्यवसायी एवं दुकानदारों द्वारा सामान मनमाने रेट्स पर बेचने की शिकायतों की भरमार है। सबसे बुरा हाल केदार मार्ग का है। केदारनाथ यात्रा के मुख्य पड़ाव गौरीकुंड तक वाहन जाने के बावजूद यहां भी एक बिसलरी की बोतल 30 से 35 रुपए में बेची जा रही है। मैगी, पराठा और चाय के दामों के कारण श्रद्धालु खासे परेशान हैं। मैगी व परांठा 100 रूपए तथा चाय 20 रुपए की मिल रही है ।

ओवर रेटिंग की शिकायतों के बाद प्रशासन ने सख्ती भी दिखाई यह भी अब तक अधिक प्रभावी साबित नहीं हुई है। इसके खिलाफ शिकायत मिल रही है प्रशासन उसका चालान कर उसकी इतिश्री करता दिख रहा है। हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने से होटल व्यवसायियों एवं दुकानदारों ने खाने, पीने और रहने के दामों में भारी बढ़ोतरी कर दी है। गौरीकुंड से केदारनाथ पैदल मार्ग पर खोली गई दुकानों में तो मनमाने रेट पर सामान बेचा जा रहा है। लगातार मिल रही शिकायतों पर रुद्रप्रयाग के जिलाधिकारी के निर्देश के बाद खाद्य सुरक्षा एवं खाद्य आपूर्ति विभाग ने केदारनाथ धाम में 76 दुकानों में संयुक्त निरीक्षण कर दुकानों में रेट लिस्ट चस्पा करने को कहा गया है ।


हेल्थ एडवायजरी :
चारधाम यात्रा में समस्त तीर्थ स्थल उच्च हिमालयी क्षेत्र में स्थित हैं। इनकी ऊंचाई समुद्र तल से 2700 मीटर से भी अधिक है। इन स्थानों पर तीर्थयात्री अत्यधिक ठंड, कम आद्रता, अत्यधिक अल्ट्रा वॉयलेट रेडिएशन, कम हवा का दबाव और कम ऑक्सीजन की मात्रा से प्रभावित हो सकते हैं। तीर्थयात्रियों की सुगम एवं सुरक्षित यात्रा हेतु स्वास्थ्य विभाग की ओर से स्वास्थ्य संबंधी एडवाइजरी जारी की गई है। यह उत्तराखंड पर्यटन विकास परिषद (यूटीडीबी) के फेसबुक, इंस्टाग्राम, ट्विटर, यूट्यूब, लिंक्डइन जैसे सोशल मीडिया अकाउंट सहित विभाग की आधिकारिक वेबसाइट uttarakhandtourism.gov.in पर भी उपलब्ध है। विभाग ने यात्रियों को यात्रा शुरू करने से पहले हेल्थ एडवाइजरी पढ़ने की सलाह दी है।

इसके साथ ही सभी यात्रियों को चार धाम यात्रा हेतु प्रस्थान के पूर्व हेल्थ एडवाइजरी का अध्ययन एवं अनुपालन करने की हिदायत दी गई है।
रजिस्ट्रेशन जरूरी : उत्तराखंड सरकार ने देश भर से चारधाम यात्रा पर आने वाले तीर्थयात्रियों को यात्रा आरंभ करने से पूर्व अनिवार्य रूप से रजिस्ट्रेशन करने की सलाह दी है। सचिव पर्यटन दिलीप जावलकर ने बताया कि चार धाम आने वाले श्रद्धालुओं की यात्रा सुखद एवं सुरक्षित हो सके इसके लिए विभिन्न धामों की वहन क्षमता के अनुरूप रजिस्ट्रेशन की सीमा तय की गई है। अत: तीर्थयात्री रजिस्ट्रेशन की उपलब्धता की जांच करने के बाद ही यात्रा आरंभ करें।

विभाग का कहना है कि चारधाम की यात्रा पर आने से पूर्व तीर्थयात्रियों को अपने स्वास्थ्य की पूर्ण जांच करानी चाहिए ताकि उन्हें ऊंचे हिमालय क्षेत्र की विशेष भौगोलिक परिस्थितियों की वजह से किसी तरह की परेशानी न उठानी पड़े।

पर्यटन विभाग ने प्रदेश में तीर्थयात्रियों के रजिस्ट्रेशन की एक निश्चित सीमा निर्धारित की है। बिना रजिस्ट्रेशन कराये उत्तराखंड पहुंचने वाले यात्रियों को रजिस्ट्रेशन उपलब्ध ना होने की दशा में ऋषिकेश से आगे जाने की इजाजत नहीं होगी। विभाग ने यह भी कहा है कि तीर्थयात्री रजिस्ट्रेशन कराने के बाद नियत तारीख पर ही यात्रा आरंभ करने के लिए उत्तराखंड पहुंचे। साथ ही रहने के लिए होटल आदि की बुकिंग भी रजिस्ट्रेशन कराने के बाद ही करें।

सचिव पर्यटन दिलीप जावलकर ने कहा है कि जिन तिथियों में निर्धारित सीमा तक रजिस्ट्रेशन हो चुका है उनके लिए कोशिश कर रहे तीर्थयात्रियों को अगली उपलब्ध तिथियों पर रजिस्ट्रेशन कराना चाहिए। उन्होंने कहा कि पंजीकरण करते समय श्रद्धालु उपलब्धता की जांच करने के बाद ही अपना टूर प्लान करें। यात्रा के लिए पंजीकरण registrationandtouristcare.uk.gov.in पर कराया जा सकता है। ज्ञात हो कि स्थानीय पुलिस एवं प्रशासन द्वारा बिना रजिस्ट्रेशन के पर्यटकों को चार धाम यात्रा पर जाने की अनुमति नहीं दी जा रही है।



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