10 में से 6 कंपनियों ने अपनाई ‘वर्क फ्रॉम होम’ की नीति

र्वेक्षण के अनुसार, 65 प्रतिशत से अधिक नियोक्ताओं ने या तो 'वर्क फ्रॉम होम' को एक नीति के रूप में पेश किया है या अपने यहां लागू इस नीति का मूल्यांकन कर रहे हैं

पुनः संशोधित सोमवार, 29 नवंबर 2021 (21:07 IST)
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मुंबई। कोविड-19 महामारी ने नियोक्ताओं को कारोबार में बने रहने के नए तरीके तलाशने और उन्हें अपनाने के लिए प्रेरित किया है। एक सर्वे में यह तथ्य सामने आया है कि कोविड प्रतिबंधों में ढील के बावजूद 10 में से छह यानी 60 प्रतिशत कंपनियों ने 'वर्क फ्रॉम होम' (घर से काम) की नीति को अपनाया है।

वित्तीय परामर्श कंपनी ग्रांट थॉर्नटन भारत के एक सर्वेक्षण के अनुसार, 65 प्रतिशत से अधिक नियोक्ताओं ने या तो 'वर्क फ्रॉम होम' को एक नीति के रूप में पेश किया है या अपने यहां लागू इस नीति का मूल्यांकन कर रहे हैं, जो उनकी परिपक्वता और अपने कर्मचारियों में विश्वास को दर्शाता है।

यह सर्वेक्षण ग्रांट थॉर्नटन भारत द्वारा सोशल मीडिया मंचों पर 4,650 उत्तरदाताओं के बीच ऑनलाइन किया गया था।
हालांकि, यह पाया गया कि विनिर्माण, यात्रा एवं आतिथ्य, चिकित्सा और अन्य आवश्यक सेवाओं जैसे कुछ क्षेत्रों में काम के तरीके की वजह से 'घर से काम करने की नीति' संभव नहीं हैं।
कंपनी के भागीदार अखिल चंदना ने कहा कि यह जरूरी है कि संगठन नई कार्य व्यवस्था, बदलते नियामकीय परिदृश्य और कर्मचारियों की अपेक्षाओं को देखते हुए अपने प्रभाव क्षेत्रों की समीक्षा और मूल्यांकन करें। इससे यह सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी कि एचआर सिस्टम (मानव संसाधन प्रणाली) और प्रक्रियाएं आंतरिक एवं बाहरी दोनों हितधारकों की जरूरतों को पूरा करने के लिहाज से बनी हों और एकीकृत हों।



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