हिंदी विविध संस्कृति को प्रतिबिंबित करने में सक्षम हो : राष्ट्रपति

नई दिल्ली| Last Updated: सोमवार, 15 सितम्बर 2014 (10:14 IST)
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शोभना जैन
 
नई दिल्ली। राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने राजभाषा हिंदी को इस तरह विकसित किया जाने का आह्वान करते हुए कहा कि वह भारत की विविध संस्कृति को व्यक्त करने में सक्षम हो। साथ ही उन्होंने कहा है कि विकास योजनाएं जनता तक सुचारु रूप से पहुंचाने के लिए संघ के कामकाज में हिंदी का तथा राज्यों के कामकाज में उनकी प्रांतीय भाषाओं के प्रयोग को बढ़ा्ने पर बल देना होगा। 
 
राष्ट्रपति ने विशेष तौर पर इंटरनेट, मोबाइल आदि में हिंदी के दिनों दिन बढ़ते प्रयोग के मद्देनजर इंटरनेट तथा मोबाइल सेवाओं के माध्यम से जनता को कुशल प्रशासन देने पर भी जोर दिया तथा कहा कि इससे जन-सेवाओं को स्थानीय भाषा के द्वारा गांव-गांव तक पहुंचा सकते हैं।
 
राष्ट्रपति हिंदी दिवस पर राष्ट्रपति भवन में आयोजित मुख्य समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर  मुखर्जी ने मंत्रालयों, विभागों सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों, बोर्डों, संस्थाओ तथा व्यक्तियों को राजभाषा के संवर्द्धन के लिए सम्मानित भी किया। गृह मंत्रालय के राजभाषा विभाग द्वारा आयोजित इस गरिमामय समारोह में  गृह मंत्री राजनाथ सिंह भी उपस्थित थे।
 
राष्ट्रपति ने कहा भारत के संविधान में हिंदी को संघ की राजभाषा का दर्जा दिया गया है। इसके साथ ही संविधान  में यह भी कहा गया है कि राजभाषा हिंदी को इस तरह विकसित किया जाए कि वह भारत की विविध संस्कृति को व्यक्त करने में सक्षम हो। इस प्रकार राजभाषा के रूप में हिंदी को एक अत्यंत महत्त्वपूर्ण दायित्व सौंपा गया है। हिंदी भारत संघ की राजभाषा होने के साथ ही ग्यारह राज्यों और तीन संघ शासित क्षेत्रों की प्रमुख राजभाषा है। 
संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल अन्य इक्कीस भाषाओं के साथ हिंदी का एक विशेष स्थान है। 
 
गृहमंत्री ने कहा कि देश की 55 प्रतिशत आबादी हिन्दी बोलती है और 85 से 90 प्रतिशत लोग हिन्दी समझते हैं, जबकि उनकी मातृभाषा हिन्दी नहीं है। उन्होंने कहा, 'हिन्दी देश की आम भाषा है।' गृहमंत्री ने कहा कि संस्कृत सभी भारतीय भाषाओं की जननी है तथा हिन्दी एवं अन्य क्षेत्रीय भाषाएं बहनें हैं।
 
उन्होंने  कहा कि महात्मा गांधी और एन गोपालस्वामी अयंगर ,गंगाधर तिलक, श्यामा प्रसाद मुखर्जी जैसे विशिष्ट जनों ने हिन्दी के विस्तार और इन्हें लोकप्रिय बनाने की वकालत की थी। हालांकि इनकी मातृ भाषा अलग थी। हॉलीवुड के बाद बॉलीवुड सबसे बड़ी इंडस्ट्री है और यहां भी हिंदी चलचित्र को लोग ज्यादा देखते हैं। इससे हिंदी का विस्तार हुआ है भारतीय भाषाओं के बीच परस्पर प्रेम और सौहार्द रहना चाहिए। इसी भावना के साथ हिंदी आगे बढ़ेगी। 
 
सिंह ने कहा कि सिनेमा के जरिए हिंदी का प्रसार विश्व स्तर पर हुआ है। आज हिंदी तकनीक की भाषा भी बनती जा रही है जो हिंदी के बढ़ते प्रभाव और प्रसार की सूचक है। समारोह मे रेल मंत्रालय को हिंदी के प्रचार प्रसार में विशिष्ट योगदान देने के लिए द्वीतीय पुरस्कार स्वरूप इदिंरा गांधी राजभाषा शील्ड प्रदान की गई। पुरस्कार रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष अरूणेन्द्र कुमार ने ग्रहण किया। इस अवसर पर रेल मंत्रालय के राजभाषा विभाग के निदेशक सत्यानंदन ने कहा ' रेल मंत्रालय सदैव ही हिंदी को जनप्रिय भाषा बनाने और आम बोलचाल की सरल हिंदी को बढ़ावा देने के लिए प्रयत्नशील रहा है।
 
इससे पूर्व समारोह में राष्ट्रपति ने लोकतंत्र में सरकार और जनता के बीच प्रशासनिक संपर्क को सशक्त बनाने में भाषा की महत्त्वपूर्ण भूमिका पर बल देते हुए  कहा कि सरकारी नीतियों और योजनाओं को जनता तक उनकी अपनी बोली में पहुंचाने में भाषा सहायक है। 
 
उन्होने कहा यदि हम चाहते हैं कि हमारा लोकतंत्र प्रगतिशील हो तथा विकास योजनाएं जनता तक सुचारु रूप से पहुंचे तो हमें संघ के कामकाज में हिंदी का तथा राज्यों के कामकाज में उनकी प्रांतीय भाषाओं का प्रयोग बढ़ाना होगा। परंतु इसके साथ ही यह भी आवश्यक है कि सरकारी कामकाज की भाषा सरल हो। 
 
बुनियादी शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा तक, ज्ञान-विज्ञान और तकनीकी पुस्तकें विद्यार्थियों को अपनी भाषाओं में पढ़ने के लिए उपलब्ध कराए जाने पर बल देते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि वे समय-समय पर देशभर के उच्च शिक्षा संस्थानों के शिक्षकों और विद्यार्थियों को अपने भाषण द्वारा भारत में उच्च शिक्षा के स्तर पर चिंता व्यक्त करते रहे हैं।
 
ईसा पूर्व तीसरी सदी से बारहवीं ईस्वी सदी के पंद्रह सौ वर्षों के दौरान भारत शिक्षा के क्षेत्र में विश्वभर में प्रसिद्ध था परंतु आज भारत का कोई भी उच्च शिक्षा संस्थान विश्व के दो सौ सर्वोत्तम संस्थानों में शामिल नहीं है। जरूरत इस बात की है कि बुनियादी शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा तक, ज्ञान-विज्ञान और तकनीकी पुस्तकें विद्यार्थियों को अपनी भाषाओं में पढ़ने के लिए मिले। 
 
उन्होंने कहा कि खुशी है कि राजभाषा विभाग द्वारा राजीव गांधी राष्ट्रीय ज्ञान-विज्ञान मौलिक पुस्तक लेखन योजना के द्वारा हिंदी में ज्ञान-विज्ञान की पुस्तकों के लेखन को बढ़ावा दिया जा रहा है। इससे हमारे विद्यार्थियों को ज्ञान-विज्ञान संबंधी पुस्तकें हिंदी में उपलब्ध होंगी।
 
राष्ट्रपति ने यह भी सुझाव दिया कि इन दिनों  इंटरनेट, मोबाइल आदि में हिंदी का प्रयोग काफी आगे बढ़ चुका है। इंटरनेट तथा मोबाइल सेवाओं के माध्यम से हम जनता को कुशल प्रशासन दे सकते हैं तथा जन-सेवाओं को स्थानीय भाषा के द्वारा गांव-गांव तक पहुंचा सकते हैं।  
 
उन्होने कहा कि सभी मंत्रालयों और विभागों द्वारा अपनी वेबसाइटें हिंदी में भी तैयार किए जाने के साथ साथ सभी सरकारी कार्यालयों को अब यह सुनिश्चित करना होगा कि इन वेबसाइटों पर नवीनतम सूचनाएं उपलब्ध हों जिससे जनता को तुरंत उपयोगी जानकारी उपलब्ध हो सके। 
 
इन्दिरा गांधी मौलिक पुस्तक लेखन में राजीव रंजन प्रसाद की पुस्तक ‘मौन मगध में’ तथा राजीव गांधी राष्ट्रीय ज्ञान-विज्ञान मौलिक पुस्तक लेखन में डॉ. शुभ्रता मिश्रा की पुस्तक ‘भारतीय अंटार्कटिक संभार तंत्र’ को प्रथम पुरस्कार प्रदान किए गए। 
 
विभाग द्वारा चलाई गई अन्यक योजना के अंतर्गत उत्कृष्ट लेखों में श्याम किशोर वर्मा एवं बीयू दुपारे के लेख ‘हिंदी का साहित्य, ऐतिहासिक, तकनीकी एवं वैधानिक स्वरूप : अतीत और वर्तमान परिदृश्य' हिंदी भाषियों की श्रेणी में तथा डॉ. राकेश कुमार शर्मा के लेख 'प्रकृति का वरदान : गेहूं का ज्वारा' को हिंदीतर भाषियों की श्रेणी में प्रथम पुरस्कार प्रदान किए गए। (वीएनआई)
 



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