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क्‍या होगी कैप्‍टन अमरिंदर सिंह की ‘फ्यूचर पॉलिटि‍क्‍स’?

शनिवार,सितम्बर 18, 2021
Amarinder Singh
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1985 में शिरोमणि अकाली दल में शामिल हुए, विधान सभा चुनाव जीते और सुरजीत सिंह बरनाला का सरकार में मंत्री बने। 1987 में बरनाला सरकार के आतंकवाद के दौर में बर्खास्त होने के बाद 1992 में वो फिर अलग हुए और अकाली दल (पंथिक) का गठन किया।
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मुगलों के एक नमक-हलाल वकील की तरह वे बोले-"मुस्लिम शासनकाल में एक भी हिंदू-मुस्लिम दंगा नहीं हुआ। पहला हिंदू-मुस्लिम दंगा तो औरंगजेब की मौत के सात साल बाद 1714 में अहमदाबाद में हुआ जो दो दिन तक चला था। वह होली के दिन गाय को जिबह करने के कारण शुरू ...
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इन तीनों भाइयों में दामोदर सबसे बड़े, बालकृष्ण उनके बाद और वासुदेव सबसे छोटे थे। ये आजादी के मतवाले वंदे मातरम का ओजस्वी गान किया करते थे, क्योंकि भजन कीर्तन में ये लोग अपने माता-पिता द्वारा बचपन में ही परिष्कृत कर दिए गए थे। बहुत कम लोग जानते होंगे ...
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देश के नागरिक इस वक्त एक नए प्रकार के ‘ऑक्सीजन’ की कमी के अदृश्य संकट का सामना कर रहे हैं। आश्चर्यजनक यह है कि ये नागरिक सांस लेने में किसी प्रकार की तकलीफ़ होने की शिकायत भी नहीं कर रहे हैं। मज़ा यह भी है कि इस ज़रूरी ‘ऑक्सीजन’ की कमी को नागरिकों ...
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आनंदीबेन पटेल को मोदी ने अपने उत्तराधिकारी के रूप में सामने रखा लेकिन उनके विरुद्ध पार्टी में ही असंतोष पैदा हो गया। फिर पाटीदार आरक्षण आंदोलन को जिस ढंग से उन्होंने हैंडल किया उसके विरुद्ध भी प्रतिक्रिया हो रही थी। हालांकि आनंदीबेन पटेल की अपनी कोई ...
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नरेन्द्र मोदी सत्ता में किसी आंदोलन की बदौलत नहीं आए हैं। वे कड़ी मेहनत, संघर्ष और आलोचनाओं की आग में तपकर, निखरकर सत्ता के शीर्ष सिंहासन पर बैठे हैं। उनके पास किसी का सहारा नहीं था, किसी का आशीर्वाद नहीं था। कई वर्षों संघ, संन्यास और राजनीतिक जीवन ...
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नरेन्द्र मोदी अपने विचारों के प्रति दृढ़ आस्थावान तथा उन्हें मूर्तरुप देने की सामर्थ्य रखते हैं उनकी स्पष्ट व दूरदर्शी नीति, कार्यशैली, कर्त्तव्यपारायणता व अथक परिश्रम के माध्यम भारतीय जनमानस की जनाकांक्षाओं की पूर्ति व उनके सर्वाङ्गीण विकास के लिए ...
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चेतना भाटी का हाल में प्रकाशित उपन्यास चंद्रदीप सहज स्त्री भावनाओं की अभिव्यक्ति है। उपन्यास बहुत बड़े कैनवास पर नहीं रचा गया है किंतु उसमें भी जिस तरह से विभिन्न भावनाओं को दर्शाया गया है वह सहज ही जेन ऑस्टीन की शैली को याद दिला देता है।
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सबकी बातों में इंदौर था, पुराने मोहल्ले की पुरानी गलियां थीं, तीस सालों में इनमें से किसी से मुलाकात नहीं हुई थी लेकिन बातों का सिलसिला जब चल पड़ा तो ग्रुप कॉल भी होने लगीं और गूगल मीट भी। बातों-बातों में ही एक दिन भुवन सरवटे ने कहा कुछ अलग करना है।
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'लोकतंत्र का अर्थ है, एक ऐसी जीवन पद्धति जिसमें स्वतंत्रता, समता और बंधुता समाज-जीवन के मूल सिद्धांत होते हैं।' -बाबा साहब अम्बेडकर
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मैं अक्सर सोचता हूं कि सदियों तक सजे रहे उन गुलामों के बाजार में बिकी हजारों-लाखों बेबस बच्चियां और औरतें कहां गई होंगी? वे जिन्हें भी बेची गई होंगी, उनकी भी औलादें हुई होंगी? आज उनकी औलादें और उनकी भी औलादों की औलादें सदियों बाद कहां और किस शक्ल ...
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गर्व होता है न हमारी राष्ट्र की भाषा पर। आज हिन्दी दिवस है। भारत में हिन्दी बोलने का दिन। अपने देश में अपनी ही भाषा के लिए एक दिन। मानसिक तौर पर हम क्या आज भी ग़ुलाम नही ?
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हिन्दी का बिगाड़ भारत माता के रूप की लालिमा का बिगाड़ है, उसकी सिन्दूरी आभा का बिगाड़ है, उसके माथे की बिंदी का बिगाड़ है। बिगाड़ तो अंग्रेजों ने भरपूर किया पर उनके बिगाड़ को सम्मान से स्वीकार किया चापलूसों ने।
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हिन्दी की अपनी लय है, अपनी चाल और अपनी प्रकृति‍। इन्‍हीं के भरोसे वो चलती है और अपनी राह बनाती रहती है। सतत प्रवाहमान किसी नदी की तरह। कभी अपने बहाव में तरल है तो कहीं उबड़-खाबड़ पत्‍थरों से टकराती बहती रहती है और वहां पहुंच जाती है, जहां उसे जाना ...
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मैं वह भाषा हूं, जिसमें तुम जीवन साज पे संगत देते मैं वह भाषा हूं, जिसमें तुम, भाव नदी का अमृत पीते मैं वह भाषा हूं, जिसमें तुमने बचपन खेला और बढ़े हूं वह भाषा, जिसमें तुमने यौवन, प्रीत के पाठ पढ़े...
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पाकिस्तान -अफगानिस्तान में अशांति और उपद्रव की स्थिति के साथ ही उसे आतंकी केन्द्र के रुप में बनाकर वहां से भारत में आतंकवाद फैलाने की योजना को मूर्तरूप देना चाहता है। इसके साथ ही पाकिस्तान की प्रथम वरीयता में बीते वर्षों में भारत के करोड़ों निवेश के ...
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कब तक आखिर कब तक हमारे देश में इस तरह के अत्‍याचार होते रहेंगे...भोपाल, दिल्‍ली, हाथरस, हैदराबाद, कानपुर सहित अन्‍य छोटे गांवों में महिलाओं की आबरू को छलनी किया जाएगा..? मुंबई के उपनगरीय इलाके साकीनाका में 34 वर्षीय महिला के साथ दुष्‍कर्म कर निजी ...
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सोशल मीडिया पर सबसे बड़ा प्रचार यह हुआ कि भारत ने तालिबान को मान्यता दे दिया। यह भी कहा जा रहा है कि भारत ने गुपचुप तरीके से तालिबान से बातचीत की और उसके साथ काम करने को तैयार हो गया है।
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जिसे हम सजा कहते हैं, वो अपराधी के लिए घमंड की बात है, उपलब्‍धि‍ है, जिसे हम कानून के लंबे हाथ कहते हैं, वे बहुत छोटे हैं, जिसे हम फांसी का फंदा कहते हैं, वो बेहद लचीला है। उसमें अदालत है, जिरह है, जमानत है, पैरोल है। और सबसे ज्‍यादा उसमें इंसाफ की ...
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