नेताजी सुभाष चंद्र बोस के अंतिम भाषण के अंश : जरूर पढ़ें

हर राष्‍ट्र की अपनी आंतरिक राजनीतिक होती है और राजनीतिक समस्‍याओं के प्रति अपना एक दृष्‍टिकोण। लेकिन इससे ऐसे व्‍यिक्‍त के प्रति राष्‍ट्र की श्रद्धा पर कोई असर नहीं पड़ता, जिसने इतनी अच्‍छी तरह से अपने देशवासियों की सेवा की और जो जीवन-भर विश्‍व की एक प्रथम श्रेणी की आधुनिक ताकत से बहादुरी से लड़ा हो। 
वस्‍तुत: आपकी और आपकी उपलब्‍धियों की सराहना उन देशों की तुलना में जो स्‍वयं को स्‍वतंत्र और जनतंत्र का मित्र कहते हैं, उन देशों में हजार गुना ज्‍यादा है जो ब्रिटिश साम्राज्‍य के विरूद्ध हैं। अगस्‍त 1942 में जब आपने ‘भारत छोड़ो’ प्रस्‍ताव पारित करवाया तो भारत से बाहर बसे राष्‍ट्रभक्‍त भारतीयों और भारतीय स्‍वाधीनता के विदेशी मित्रों की निगाह में आपका सम्‍मान कहीं अधिक बढ़ गया। 
 
ब्रिटिश सरकार के अपने अनुभवों के आधार पर मैं बड़ी ईमानदारी से यह महसूस करता हूं कि ब्रिटिश सरकार भारतीय स्‍वतंत्रता की मांग को भी स्‍वीकार नहीं करेगी। आज ब्रिटेन विश्‍वयुद्ध जीतने के लिए भारत का अधिकाधिक शोषण करना चाहता है। इस महायुद्ध के दौरान ब्रिटेन ने अपने क्षेत्र का एक हिस्‍सा दुश्‍मनों को खो दिया है और दूसरे पर उसके दोस्‍तों ने कब्‍जा कर लिया है। यदि मित्र-राष्‍ट्र किसी तरह जीत भी गए तो भविष्‍य में ब्रिटेन नहीं, अमेरिका शीर्ष पर होगा और इसका मतलब यह होगा कि ब्रिटेन अमेरिका का आश्रित बन जाएगा।
 
ऐसी स्‍थिति में ब्रिटेन में अपने वर्तमान नुकसान की भरपाई के लिए पूरी तैयारी की जा रही है। यह जानकारी मुझे अपने गोपनीय और विश्‍वस्‍त सूत्रों से मिली है और मैं अपना यह कर्तव्‍य समझा हूं कि आपको इसके बारे में सूचित करूं। 



और भी पढ़ें :