2023 विधानसभा चुनाव से पहले नेता-पुत्रों का बढ़ी टेंशन, खतरे में पड़ सकता है राजनीतिक भविष्य

Author विकास सिंह| Last Updated: सोमवार, 23 मई 2022 (15:10 IST)
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राजस्थान के जयपुर में पिछले सप्ताह भाजपा के राष्ट्रीय पदाधिकारियों की बैठक में 2023 में होने वाले राजस्थान, और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव की व्यूह रचना तैयार की गई है। राष्ट्रीय पदाधिकारियों की बैठक में चुनावी राज्यों में पार्टी संगठन को मजबूत करने पर विस्तार से चर्चा हुई। वहीं बैठक को संबोधिकत करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कांग्रेस का नाम लिए बिना कहा कि परिवारवादी पार्टियां देश को पीछे ले जाने पर तुली हुई हैं और भाजपा को इन परिवारवादी पार्टियों से निरंतर मुकाबला करना है। अगर लोकतंत्र बचाना है, लोकतंत्र को सामर्थ्यवान और मूल्यनिष्ठ बनाना है, तो हमें वंशवाद, परिवारवाद की राजनीति के खिलाफ अविरत संघर्ष करना ही है।

भाजपा राष्ट्रीय पदाधिकारियों की बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के परिवारवाद और वंशवाद के खिलाफ इस सख्त संदेश के बाद मध्यप्रदेश भाजपा में कई नेता पुत्रों का खटाई में पड़ता हुआ दिखाई दे रहा है। मध्यप्रदेश भाजपा में ऐसे नेता पुत्रों की फेहरिस्त काफी लंबी है जो पार्टी में काफी सक्रिय होने के साथ जनता के बीच लगातार अपनी पैठ बनाए हुए है। प्रदेश भाजपा में ऐसे भाजपा नेताओं की संख्या लगभग दर्जन से अधिक है जो अपने बेटों के लिए राजनीतिक जमीन तलाशने में जुटे है।

MP-BJP में नेता-पुत्रों की लंबी सूची-मध्यप्रदेश भाजपा में दिग्गजों की श्रेणी में शामिल कई नेताओं के पुत्र पार्टी और सार्वजनिक जीवन में काफी सक्रिय है। इनमें सबसे पहला नाम मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के पुत्र कार्तिकेय चौहान, कांग्रेस से भाजपा में शामिल हुए ज्योतिरादित्य सिंधिया के पुत्र महाआर्यमन सिंधिया, केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर के पुत्र देवेंद्र सिंह तोमर, शिवराज सरकार में वरिष्ठ मंत्री गोपाल भार्गव के पुत्र अभिषेक भार्गव, कैबिनेट मंत्री नरोत्तम मिश्रा के पुत्र सुकर्ण मिश्रा, कैबिनेट मंत्री कमल पटेल के पुत्र सुदीप पटेल, गौरीशंकर बिसेन के पुत्री मौसम बिसेन, इंदौर से सांसद और लोकसभा अध्यक्ष रहीं सुमित्रा महाजन के पुत्र मंदार महाजन, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष नंदकुमार सिंह चौहान के पुत्र हर्षवर्धन सिंह, पूर्व मंत्री गौरीशंकर शेजवार के पुत्र मुदित शेजवार, पूर्व वित्त मंत्री जयंत मलैया के पुत्र सिद्धार्थ मलैया शामिल है।

इन नेता पुत्रों की सक्रियता चर्चा में-नेता-पुत्रों की इस सूची में कई नाम ऐसे है जो पार्टी के सक्रिय कार्यकर्ता होने के साथ भाजपा युवा मोर्चा के पदाधिकारी भी है केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर के बेटे देवेंद्र सिंह तोमर युवा मोर्चा के प्रदेश कार्यसमिति सदस्य है। वहीं ज्योतिरादित्य सिंधिया के पुत्र महाआर्यमन सिंधिया पिछले कुछ समय से ग्वालियर में सार्वजनिक और राजनीतिक कार्यक्रमों में लगातार सक्रिय नजर आ रहे है। ऐसे में माना जा रहा है कि महाआर्यमन सिंधिया भी जलद ही सक्रिय राजनीति में कदम रख सकते है।

वहीं मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के पुत्र बुधनी विधानसभा में काफी सक्रिय रहे है और वहां एक बड़ा क्रिकेट टूर्नामेंट कराने के साथ 2018 में पिता के चुनावी की पूरी बागडोर संभाली थी। प्रदेश के गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा के पुत्र सुकुर्ण मिश्रा पिछले काफी लंबे समय से दतिया में भाजपा कार्यकर्ता के तौर पर सक्रिय है। पिछले दिनों दतिया गौरव दिवस पर निकाली गई मां पीतांबरा की भव्य शोभा यात्रा में सुकुर्ण की बड़ी भूमिका था। इसके साथ पिछड़ा वर्ग कल्याण आयोग के अध्यक्ष और पूर्व मंत्री गौरीशंकर बिसेन की बेटी पार्टी के प्रदेश कार्यसमिति की सदस्य होने के साथ पार्टी में काफी सक्रिय है।


MP-BJP में परिवारवाद के चेहरे! -दरअसल मध्यप्रदेश की राजनीति के अगर पन्नों के पलटे को पता चलता है कि परिवारवाद के सहारे सक्रिय राजनीति में एंट्री करने वाले नेताओं की एक लंबी चौड़ी सूची है इनमें भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव के कैलाश विजयवर्गीय के पुत्र आकाश विजयवर्गीय, कैलाश सांरग के पुत्र विश्वास सांरग, कैलाश जोशी के पुत्र दीपक जोशी, सुंदरलाल पटवा के भतीजे सुरेंद्र पटवा, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष के पुत्र अशोक रोहाणी और पूर्व नेता प्रतिपक्ष विक्रम वर्मा की पत्नी नीना वर्मा जैसे प्रमुख नाम हैं। 2018 विधानसभा चुनाव में ऐसे एक दर्जन से अधिक नाम है जिनका बैकग्राउंड परिवारवाद ही है।


जयपुर में पीएम मोदी के पार्टी को परिवारवाद पर दो टूक संदेश देने के बाद अब इन नेता पुत्रों की टेंशन बढ़ गई है। ऐसे में जब मध्यप्रदेश में को लेकर भाजपा में टिकट के लिए अभी से जोड़-तोड़ की राजनीति शुरु हो गई है तो नेता पुत्रों का राजनीतिक भविष्य खतरे में दिखाई दे रहा है। भले ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वंशवाद और परिवारवाद का खुलकर विरोध कर रहे है लेकिन चुनाव में उम्मीदवार की जीत की संभावना सभी बड़ी कसौटी होती है और कोई अचरज नहीं होगा कि भाजपा 2023 में भी इस फॉर्मूले के तहत कई नेता-पुत्रों को टिकट दें दे।



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