दिग्विजय सिंह के खिलाफ दर्ज होगी FIR, सोशल मीडिया पर बिहार के फोटो को खरगोन को बताकर किया पोस्ट

digvijay singh
विकास सिंह| पुनः संशोधित मंगलवार, 12 अप्रैल 2022 (12:34 IST)
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भोपाल। मध्यप्रदेश के में रामनवमी को दो गुटों ‌में हिंसक झड़प के बाद अब इस पर सियासत शुरु हो गई है। पूर्व मुख्यमंत्री के घटना को लेकर एक फोटो सोशल मीडिया पर शेयर करने के बाद अब वह सरकार के निशाने पर आ गए है। सोशल मीडिया पर बिहार के एक फोटो को

खरगोन का बताकर पोस्ट करने के मामले में अब उन पर दर्ज करने की तैयारी है।

मुख्यमंत्री सिंह चौहान ने दिग्विजय सिंह पर हमला करते हुए कहा कि दिग्विजय सिंह ने एक धार्मिक स्थल पर युवक द्वारा भगवा झंडा फहराने का फोटो सहित ट्वीट किया है, वह मध्यप्रदेश का नहीं है।
दिग्विजय सिंह का यह ट्वीट प्रदेश में धार्मिक उन्माद फैलाने का षड्यंत्र है और प्रदेश को दंगे की आग में झोंकने की साजिश है जिसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। दिग्विजय सिंह ने प्रदेश को दंगे की आग में झोंकने का काम किया है। दिग्विजय सिंह प्रदेश में धार्मिक उन्माद फैलाने का काम कर रहे है, ये अपराध है जो क्षमा योग्य नहीं है सभी वैधानिक कार्यवाही होगी।

वहीं गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने कहा कि दिग्विजय सिंह भ्रम फैलाकर सांप्रदायिक तनाव को हवा देना चाहते हैं। दिग्विजय सिंह ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर मस्जिद में झंडा फहराने की जो तस्वीर खरगौन की बताकर पोस्ट की है, वो बिहार की है। इस विषय में वैधानिक कार्रवाई को लेकर विशेषज्ञों से राय ली जा रही है और उनके खिलाफ केस रजिस्टर्ड किया जाएगा।
क्या लिखा था दिग्विजय सिंह ने?- प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने आज सुबह सोशल मीडिया पर एक फोटो पोस्ट करते लिए लिखा कि "क्या ख़रगोन प्रशासन ने लाठी तलवार जैसे हथियारों को ले कर जुलूस निकालने की इजाज़त दी थी? क्या जिन्होंने पत्थर फेंके चाहे जिस धर्म के हों सभी के घर पर बुलडोज़र चलेगा? शिवराज जी मत भूलिए आपने निष्पक्ष हो कर सरकार चलाने की शपथ ली है। भारतीय संविधान में हर नागरिक को अपने धर्म का पालन करने का अधिकार है। धर्म देख कर शिवराज जी कार्रवाई करना असंवैधानिक है"।
उन्होंने कहा कि मैं मूल रूप से बिना नोटिस बिना किसी को सुनें कार्रवाई के खिलाफ हूँ। क्या भारत के किसी क़ानून या नियम में इस बुलडोज़र संस्कृति का प्रावधान है? यदि आपको ग़ैर क़ानूनी तरीक़े से बुलडोज़र चलाना ही है तो उसमें धर्म के आधार पर पक्षपात तो ना करें।




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