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बहुत कम लोगों के हाथों में होता है यह जादुई क्रॉस, तुरंत देखें अपनी हथेलियों को, जानिए किस्मत कनेक्शन

सोमवार,अक्टूबर 11, 2021
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जो लोग हस्ताक्षर करते समय पहला अक्षर थोड़ा बड़ा और उसके बाद पूरा उपनाम लिखते हैं वे अद्‍भुत प्रतिभा के धनी होते हैं। जानिए क्या आप भी हैं इसमें शामिल-
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जन्मकुंडली से अध्ययन से बताया जा सकता है कि किसी जातक की कुंडली में विदेश यात्रा का योग है या नहीं। किसी भी कुंडली के अष्टम भाव, नवम, सप्तम, बारहवां भाव विदेश यात्रा से संबंधित होते हैं जिनके आधार पर पता लगाया जा सकता है कि कब विदेश यात्रा का योग ...
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सिद्धि योग, सर्वार्थ सिद्धि योग, गुरु पुष्य योग, रवि पुष्य योग, पुष्कर योग, अमृत सिद्धि योग, राज योग, द्विपुष्कर एवं त्रिपुष्कर यह कुछ शुभ योगों के नाम हैं।
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बहुत कम ही लोग इस बात को जानते हैं आपकी कुंडली ही नहीं बल्कि आपके शरीर की बनावट पर भी आपके राजयोग का होना लिखा होता है। शारीरिक बनावट के आधार पर भविष्य जाने की इस विद्या को सामुद्रिक शास्त्र कहते हैं। समुद्रिक शास्त्र के जातकभ्रमण ग्रंथ के अनुसार ...
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लाल किताब सामुद्रिक शास्त्र पर आधारित ज्योतिषीय विज्ञान है। हस्तरेखा सामुद्रिक शास्त्र का एक हिस्सा है। हस्तरेखा के विशेषज्ञ बने बगैर आप लाल किताब के विशेषज्ञ नहीं बन सकते। लाल किताब का हस्तरेखा विज्ञान आम हस्तरेखा विज्ञान से थोड़ा भिन्न है। आओ ...
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सूर्य सभी ग्रहों का मुखिया है। सौर देवता, आदित्यों में से एक, कश्यप और उनकी पत्नियों में से एक अदिति के पुत्र। उनके बाल और हाथ सोने के हैं। उनके रथ को सात घो़ड़े खींचते हैं
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हर ग्रह शरीर के जिस अंग का प्रतिनिधित्व करता है उसी के अनुसार रोग होते हैं जैसे शुक्र काम कला का प्रतीक है तो समस्त यौन रोग शुक्र की अशुभता से ही होते हैं।
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जानिए लग्न-कुंडली से कब मिलेगा धनलाभ, कब होंगे आप मालामाल।
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कुंडली में 12 भाव, खाने या घर होते हैं इनमें से कुछ सुख के और कुछ दु:ख के होते हैं। प्रत्येक भाव का अपना प्रभाव होता है। प्रत्येक भावों में ग्रहों के गोचर के प्रभाव को देखा जाता है। आओ जानते हैं कि कितने भाव सुख और कितने दु:ख के होते हैं और उनमें ...
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किसी भी स्थिति में चंद्र पर गुरु की सप्तम, पंचम, नवम् दृष्टि जा रही हो तो गजकेसरी नाम का राजयोग बनने से ऐसा जातक राजाओं जैसी जिंदगी जीता है। चंद्र से गुरु केंद्र 1, 4, 7, 10वें भाव में हो तब भी राजयोग बनने से राजसुख पाता है।
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अपनी जन्मकुंडली में धनवान होने के योग स्वयं देख सकते हैं। जानिए कुछ प्रमुख चमत्कारी धनवान योग-
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आज जैसे-जैसे विज्ञान प्रगति के सोपान चढ़ता जा रहा है, वैसे-वैसे ज्योतिष व विज्ञान का फासला कम होता जा रहा है। मुझे पूर्ण विश्वास है कि आने वाले कुछ दशकों में ज्योतिष विज्ञान के
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प्राचीन समय में कुंडली मिलान अत्यावश्यक माना जाता था। वर्तमान सूचना और प्रौद्योगिकी के दौर में मेलापक केवल एक रस्म-अदायगी बनकर रह गया है।
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कुंडली का सातवां घर बताता है कि आपकी शादी किस उम्र में होगी। शादी के लिए दिशा कौन सी उपयुक्त रहेगी जहां प्रयास करने पर जल्द ही शादी हो सके।
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हिंदू कालगणना का आधार नक्षत्र, सूर्य और चंद्र की गति पर आधारित है। इसमें नक्षत्र को समसे महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है। तारों के समूह को नक्षत्र कहते हैं। हमारे आकाश या अंतरिक्ष में 27 नक्षत्र दिखाई देते हैं। नक्षत्र और नक्षत्र मास को जानने के पहले ...
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आइए जानें कुंडली के कौन से योग आपको वाहन और घर का सुख दे सकते हैं और इन्हें पाने के लिए क्या किया जा सकता है?
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शनि ग्रह के लिए तीन तरह की अंगूठी होती है, पहला नीलम की अंगूठी, दूसरा लोहे की अंगूठी और तीसरा घोड़े के नाल की अंगूठी। लोहे के छल्ले या अंगुठी को शनि का छल्ला कहा जाता है। यहां लाल किताब के अनुसार लोहे की अंगूठी पहनने के 10 नियम जानिए।
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हमारी अंगुलियों के पोरों में शंख या चंक्र रहते हैं। किसी के पोरों के 2 या 3 चक्र रहते हैं तो किसी के पोरों में रहते ही नहीं है। कहते हैं कि सभी अंगुलियों में चक्र होने का अर्थ है कि व्यक्ति चक्रवर्ती सम्राट की तरह जीवन व्यतीत करेगा। आओ जानते हैं इस ...
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लाल किताब के अनुसार जीवन का नक्षा आपके हाथ में छपा हुआ है और उसके भाग्य उसकी मुट्ठी में बंद रहता है। बंद मुट्ठी एकदम से नहीं खुलती है परंतु हाथों के विकसित होने और जमाने की हवा लगने के बाद बंद मुठ्ठी खुलती जाती है, तो आजो जानते हैं कि इस खुली मुट्ठी ...
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