मजेदार बाल कविता : मक्खी का आटा

n mosquito

हाथ बढ़ाकर मक्खी दीदी,
पीस रही थी चक्की।
तभी कहीं से आया मच्छर,
जो था पूरा झक्की।

भन-भन करते बड़ी जोर से,
मक्खी जी को काटा।
जान छोड़कर भागी मक्खी,
धरा रह गया आटा।


(वेबदुनिया पर दिए किसी भी कंटेट के प्रकाशन के लिए लेखक/वेबदुनिया की अनुमति/स्वीकृति आवश्यक है, इसके बिना रचनाओं/लेखों का उपयोग वर्जित है...)



और भी पढ़ें :