बाल कविता : टेढ़े आंगन नहीं नाचना

Bear Poem

मार-मार कर लगा नचाने,

पर भालू न नाचा।
जड़ा मदारी ने गुस्से में,
उसके गाल तमाचा।

भालू बोला नाच नहीं,
होता है लड्डू पेड़ा।
नहीं देखते यह आंगन है,
कितना टेढा मेढा।

ऐसे आंगन और नाच का,
है संबंध पुराना।
टेढ़े आंगन नहीं नाचना,
बोल गए हैं नाना।

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