9 साल बाद चेन्नई के पास कोलकाता से IPL फाइनल की हार का बदला लेने का बेहतरीन मौका

Last Updated: शुक्रवार, 15 अक्टूबर 2021 (00:02 IST)
के कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने 9 साल पहले के खिलाफ हुए आईपीएल फाइनल मैच में हार का सामना करना पड़ा था। कल जब माही कोलकाता के खिलाफ मैदान में उतरेंगे तब उस हार का बदला लेने के बारे में जरूर सोचेंगे।

साल 2012 में मिली यह मात आईपीएल में चेन्नई की दूसरी खिताबी मात थी। दिलचस्प बात यह थी कि चेन्नई की टीम लगातार दो बार आईपीएल फाईनल जीतकर तीसरी बार लगातार ट्रॉफी जीतने की फिराक में थी लेकिन गौतम गंभीर की टीम ने माही के इरादों पर पानी फेर दिया था।

इस बार उनके सामने गौतम गंभीर तो नहीं होंगे लेकिन इयॉन मॉर्गन होंगे। मॉर्गन सलामी बल्लेबाज तो नहीं लेकिन बाएं हाथ के बल्लेबाज हैं जो मध्यक्रम में अब तक फ्लॉप हुए हैं। ऐसे में धोनी कप्तानी और बल्लेबाजी दोनों में मॉर्गन पर दबाव बना कर यह मैच जीतना पसंद करेंगे।

दोनों लीग मैच चेन्नई ने जीते

मौका इसलिए भी बेहतरीन है क्योंकि चेन्नई सुपर किंग्स ने दोनों ही लीग मैचों में कोलकाता को परास्त किया था। पहले मैच में चेन्नई सुपर किंग्स ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 220 रनों का विशालकाय लक्ष्य रखा था। इसके जवाब में कोलकाता 202 रन बना पायी थी और 18 रनों से मैच गंवा बैठी थी।

आईपीएल के अगले दौर में कोलकाता ने चेन्नई को बेहतर टक्कर दी थी। हालांकि अंतिम गेंद पर चेन्नई सुपर किंग्स ने 172 रनों का लक्ष्य 2 विकेट रहते हुए हासिल कर लिया था।

190 रन बनाए थे चेन्नई सुपर किंग्स ने

पहले बल्लेबाजी करते हुए विजय और हसी ने पहले विकेट के लिए 87 रन की साझेदारी करके चेन्नई के लिये बढ़िया नींव रखी। ब्रेट ली और शाकिब अल हसन दोनों पहला ओवर किफायती करने के बाद अगले ओवर में पिट गए जिसके बाद गंभीर को अपने तुरुप के इक्के सुनील नरेन को गेंद सौंपनी पड़ी। ली छठा ओवर करने आए जिसमें विजय और हसी दोनों ने छक्के जमाए। इससे चेन्नई तीन ओवर में केवल दस रन बनाने के बावजूद पॉवरप्ले के छह ओवर में 54 रन जुटाने में सफल रहा।

माइकल हसी (43 गेंद पर 54 रन) और मुरली विजय (32 गेंद पर 42) ने टीम को अच्छी शुरुआत ‍दिलाई।इन दोनों की साझेदारी 11वें ओवर में रजत भाटिया ने तोड़ी। उनकी धीमी गेंद को विजय ने स्क्वायर लेग पर भेजना चाहा, लेकिन वह सही तरह से उनके बल्ले पर नहीं आई और शाकिब ने डाइव लगाकर उसे कैच में बदल दिया। विजय ने चार चौके और एक छक्का लगाया।

रैना ने ली की शॉर्ट पिच गेंद पर छक्का जमाने के बाद नरेन को भी नहीं बख्शा। उन्होंने इस रहस्यमयी स्पिनर की गेंद को भी डीप मिडविकेट पर छह रन के लिए भेजकर केवल 27 गेंद पर अपना पचासा पूरा किया।

रैना ने शाकिब की पारी की आखिरी गेंद पर डीप मिडविकेट पर कैच थमाया। इससे पहले हसी ने कैलिस की गेंद पर बोल्ड होने से पहले अपनी पारी में चार चौके और दो छक्के लगाए। उनका स्थान लेने के लिए आए धोनी (नौ गेंद पर 14 रन) ने कैलिस के इसी ओवर में दो चौके लगाए।

रैना (38 गेंद पर 73) ने पांच छक्के जड़कर टीम को तीन विकेट पर 190 रन के मजबूत स्कोर तक पहुंचाया।

190 रनों का स्कोर बिस्ला ने कर दिया था बौना

हरियाणा के रहने वाले 27 वर्षीय बिस्ला ने कप्तान गौतम गंभीर (चार गेंद पर दो रन) के पहले ओवर में ही आउट होने के बाद कुछ दर्शनीय शॉट लगाकर केकेआर के दर्शकों को निराश नहीं होने दिया था। हिल्फेनहास ने गंभीर के बल्ले और पैड के बीच से गेंद निकालकर उनका ऑफ स्टंप उखाड़ दिया था। पहले तीन ओवर में केवल 16 रन बने। यहां से बिस्ला ने केकेआर की उम्मीदों को पंख लगाए।

उन्होंने एल्बी मोर्कल के ओवर में चार चौके जड़कर शुरुआत की और फिर रविचंद्रन अश्विन का दो छक्कों से स्वागत किया। वह अलग बात है कि इसी ओवर में 38 रन के निजी योग पर हिल्फेनहास ने उनका मुश्किल कैच छोड़ा। बिस्ला ने ड्वेन ब्रावो का स्वागत भी मिडऑफ पर छक्का लगाकर किया। उन्होंने केवल 27 गेंद पर अपने करियर का चौथा अर्धशतक पूरा किया और फिर ब्रावो के अगले ओवर में पहले चौका और फिर छक्का जमाया। इससे केकेआर दसवें ओवर तक सैकड़ा पूरा कर गया।

लक्ष्मीरतन शुक्ला (3) भी आते ही डगआउट में पहुंच गए, लेकिन कैलिस ने दूसरे छोर से रन बनाना जारी रखा। उन्होंने शादाब जकाती पर दो चौके जड़कर अर्धशतक पूरा किया और फिर ब्रावो की दो गेंदों को चौके और छक्के लिए भेजा। अश्विन ने यूसुफ पठान (1) को आउट करके फिर से मैच रोमांचक बनाने की कोशिश की।

केकेआर ने 19.4 ओवर में पांच विकेट पर 192 रन बनाकर चेन्नई के स्कोर को बौना साबित कर दिया। गौतम गंभीर की अगुवाई वाली केकेआर की टीम पहली बार फाइनल में पहुंची थी और उसी में चैंपियन बनने में सफल रही थी।



और भी पढ़ें :