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सर्वधर्म समभाव की मिसाल थी थियोसॉफिकल सोसायटी

बुधवार,जून 8, 2022
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पर्यावरण, प्रकृति, वन, नदी, पहाड़ों और पेड़ों की हरियाली से हर सामान्य जन का मन प्रसन्न हो जाता है। हर प्राणी को हरियाली से स्नेह और प्रेम है। प्रकति तो अनादिकाल से ही सृष्टि निर्माण के वक्त से मौजूद है।
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होलकर शासनकाल में राजशाही से लोकतांत्रिक व्यवस्था और जनता के शासन की मांग के साथ आजादी के लिए अंग्रेजी सत्ता से संघर्ष के साथ अपनी मांग को पुरजोर तरीके से उठाने के लिए प्रजामंडल ने अपनी महती भूमिका निभाई थी। प्रजामंडल का निमाड़ और मालवा के साथ ...
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राजनीतिक गतिविधियों के लिए नित नए प्रयोग और जतन किए जाने लगे थे। सवाल यह था कि किस बहाने और किस तरह एकत्र होकर चर्चा की जाए। 1854 में इंदौर जनरल लाइब्रेरी की स्थापना हो चुकी थी। 1915 में मध्यभारत हिन्दी साहित्य समिति एवं एवं महाराष्ट्र साहित्य सभा ...
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राजा के अधीन शासन व्यवस्था में राजनीतिक गतिविधियों का चलन सामान्यत: नहीं के बराबर था। जाहिर है राज व्यवस्था का सर्वोपरि राजा ही हुआ करता था, ऐसे में राज्य के विरुद्ध और राजा के खिलाफ किसी भी तरह की राजनीतिक गतिविधियां बेमानी थीं। राजशाही के कमजोर ...
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खासगी जागीर के प्रारंभ से राज्य के भारतीय संघ में विलय होने तक की लंबी अवधि (220 वर्ष) तक एक ही परिवार द्वारा दीवान के दायित्वों का निर्वाह करने वाला यह विशिष्ट परिवार था जिसका 'उपनाम' ही 'खासगीवाले' पड़ गया। इस परिवार को सुदीर्घ सेवाओं के बदले होलकर ...
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मालवा के उत्तरकालीन इतिहास में होलकर राजवंश का बहुत बड़ा योगदान रहा है। इस वंश के वीर पुरुषों ने जहां युद्धक्षेत्र में अपने शौर्य के कारण अपार ख्याति अर्जित की है, वहीं इस परिवार की महिलाओं ने स्थानीय प्रशासन, दान-पुण्य और सद्‌व्यवहार के कार्यों से ...
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मल्हारराव होलकर का जन्म होलगांव के पटेल खंडोजी के घर माता गंगाबाई के उदर से 16 मार्च गुरुवार 1693 में दोपहर 12 बजे हुआ था। इनकी जन्मतिथि के संबंध में भी विवाद है। कहीं-कहीं 16 अक्टूबर 1694 अंकित है। इनके पिता खंडोजी का मुख्य धंधा कृषि था।
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इंदौर नगर के लिए पलशीकर परिवार का नाम नया नहीं है। इस परिवार के संस्थापक रामजी यादव थे। उल्लेखनीय है कि जब मालवा क्षेत्र में सूबेदार मल्हारराव होलकर को सत्ता सौंपी गई तभी पेशवा बालाजी बाजीराव द्वारा रामजी यादव को मल्हारराव होलकर का 'कारभारी' नियुक्त ...
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इंदौर के बुजुर्गों से विद्यार्थी जीवन में यह कहावत सुनी थी कि 'होलकर का राज व किबे का ब्याज' विख्यात रहे हैं। इंदौर का किबे परिवार, मूलत: पूना से स्थानांतरित होता हुआ इंदौर पहुंचा था। पूना में इस परिवार का प्रमुख व्यवसाय ब्याज पर पैसा देना ही था। ...
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प्रजामंडल से सत्ता तक

गुरुवार,मई 19, 2022
मैंने (बाबूलाल पाटोदी) सबसे पहले बाबूजी को तब देखा था, जब इंदौर में महात्मा गांधी आए थे, दूसरी बार 1935 में। गांधीजी हिन्दी साहित्य समिति में आए थे। बाबूजी उस समय काफी कार्यक्षम थे, मेरी उम्र भी 15 वर्ष की ही थी। मैं जैन समाज के स्वयंसेवक मंडलों में ...
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मालवा के सुरम्य पठार के शिखर पर बसा इंदौर 22‍ डिग्री 43 उत्तर अक्षांतर और पूर्व में 75.50 देशांतर पर स्थित है। जैसे-जैसे पठार मानपुर के बाद घाटी में नीचे की ओर बढ़ता जाता है, वैसे-वैसे विंध्याचल एवं सतपुड़ा की सुंदर पर्वत श्रृंखलाएं बावनगजा के यहां ...
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