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पाण्डुरंग शास्त्री अठावले कौन थे, जानिए उनके संबंध में 7 खास बातें

सोमवार,अक्टूबर 25, 2021
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आज महाराष्ट्र के तेरहवीं सदी के महान संत ज्ञानेश्वर की पुण्यतिथि है। संत ज्ञानेश्वर का जन्म ई. सन् 1275 में भाद्रपद मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले में पैठण
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ज्ञानेश्वर का जन्म 1275 ईस्वी में महाराष्ट्र के अहमदनगर ज़िले में पैठण के पास आपेगांव में भाद्रपद के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को हुआ था। मात्र 21 वर्ष की उम्र में संसार का परित्याग कर समाधि ग्रहण की तथा 1296 ई. में उनकी मृत्यु हुई।
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पौराणिक मान्यताओं के अनुसार वाल्मीकि का जन्म आश्विन माह की शरद पूर्णिमा के दिन हुआ था। इस बार 20 अक्टूबर 2021 को उनकी जयंती मनाई जाएगी। आओ जानते हैं कि वह क्या कारण था जिसके चलते वाल्मीकि ने महाकाव्य रामायण की रचना की थी।
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Meerabai Jayanti: प्रत्येक वर्ष अश्विन मास की शरद पूर्णिमा के दिन भगवान श्री कृष्ण की भक्त मीराबाई की जयंती का पर्व मनाया जाता है। इस बार मीराबाई जयंती 20 अक्टूबर 2021 दिन बुधवार यानि आज मनाई जा रही है।
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आदिकवि महर्षि वाल्मीकि जी ने रामायण की रचना करके हर किसी को सद्‍मार्ग पर चलने की राह दिखाई। पावन ग्रंथ रामायण में प्रेम, त्याग, तप व यश की भावनाओं को महत्व दिया गया है। वाल्मीकि के अनुसार दुख और विपदा जीवन के 2 ऐसे मेहमान हैं, जो बिना निमंत्रण के ही ...
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मुनि विद्यासागर जी महाराज एक प्रख्यात दिगंबर जैन आचार्य हैं। वे जैन धर्म के तपस्वी, अहिंसा, करुणा, दया के प्रणेता और प्रखर कवि सं‍त शिरोमणि हैं।
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महान लोकनायक महाराजा अग्रसेन का जन्म आश्विन शुक्ल प्रतिपदा हुआ था। इस बार अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार 7 अक्टूबर 2021 को उनका जन्मोत्सव बनाया जाएगा। आओ जानते हैं कि ये कौन थे और क्या है इनकी कहानी।
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चीन के महान दार्शनिक और विचारक कंफ्यूशियस (confucius) की चर्चा बहुत होती है। उनके महान विचारों से आज भी कई लोग प्रभावित होते हैं और उनके विचार आज भी प्रासंगित हैं। आओ जानते हैं उनके 10 अनजाने रहस्य।
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शिरडी के साईं बाबा एक चमत्कारिक संत हैं। उनकी समाधि पर जो भी गया झोली भरकर ही लौटा है। उनका जन्म और उनकी जाति एक रहस्य है। श्री सांईं सच्चरित्र में इस संबंध में कोई उल्लेख नहीं मिलता है, परंतु श्री विश्वास बालासाहेब खेर की बुक 'ए यूनिक सेंट ...
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आध्यात्मिक और राजनीतिक रूप से सोए हुए भारत को जगाने के लिए भारत को अपना घर कहने वाली एनी बेसेंट का जीवन जानने योग्य है। कारण स्पष्ट है कि उन्होंने दुनियाभर के धर्मों का गहन अध्ययन किया। उन धर्मों को जाना-परखा और समझा कि वेद और उपनिषद का धर्म ही ...
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भारत के आध्यात्मिक संत पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य की 20 सितम्बर को जयंती है। वे एक दार्शनिक, विचारक और समाज सुधार के रूप में जीवनभर कार्य करते रहे हैं। उन्होंने वैदिक परंपरा की पुन: स्थापना का महत्वपूर्ण कार्य किया। आओ जानते हैं उनके जीवन के संबंध ...
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महर्षि दधीचि का जन्म भाद्रपद शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को हुआ था, इसीलिए इस दिन दधीच जयंती मनाई जाती है।
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उठो, जागो और तब तक मत रूको, जब तक लक्ष्‍य की प्राप्‍ती ना हो जाए। स्‍वामी विवेकानंद के और भी कई संदेश है जो युवाओं को हर कदम पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं। आज भले ही वो इस दुनिया में नहीं हैं लेकिन उनके सुविचार आज भी दोहराएं जाते हैं। उनके संदेश ...
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पीरों के पीर रामापीर, बाबाओं के बाबा रामदेव बाबा (1352-1385) को सभी भक्त बाबारी कहते हैं। जहां भारत ने परमाणु विस्फोट किया था, वे वहां के शासक थे। हिन्दू उन्हें रामदेवजी और मुस्लिम उन्हें रामसा पीर कहते हैं। भाद्रपद के शुक्ल पक्ष की दूज को राजस्थान ...
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भाद्रपद के शुक्ल पक्ष की दूज को राजस्थान के महान संतों में से एक बाबा रामदेवरा जिन्हें रामापीर भी कहते हैं उनकी जयंती मनाई जाती है। इस बार यह जयंती 8 सितंबर को रहेगी। जनश्रुति के आधार पर आओ जानते हैं उनके जीवन से जुड़ा एक रोचक किस्सा।
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भाद्रपद के कृष्‍ण पक्ष की अष्टमी को राजस्थान के संत नवल जी की जयंती मनाई जाती है। इस बार उनकी 261वीं जयंती मनाई जाएगी। जयंती के मौके पर उनकी शोभा यात्रा निकाली जाती है।
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महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले में पैठण के पास आपेगांव में संत ज्ञानेश्वर का जन्म ईस्वी सन् 1275 में भाद्रपद के कृष्ण अष्टमी को हुआ था। उनके पिता विट्ठल पंत एवं माता रुक्मिणी बाई थीं। इस बार अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार 30 अगस्त 2021 को उनकी जयंती रहेगी।
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गोगा पंचमी के 4 दिन बाद ही भाद्रपद कृष्ण नवमी को गोगा नवमी का त्योहार मनाया जाता है। भाद्रपद के कृष्ण पंचमी को गोगा देव का त्योहार मनाया जाता है। आओ जानते हैं कि गोगा पंचमी कब है, क्यों मनाई जाती है, कौन हैं गोगादेव।
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आज भारत के महान संत एवं विचारक योगी रामकृष्ण परमहंस की पुण्यतिथि है। उनका जन्म फाल्गुन शुक्ल द्वितीया को हुआ था। तारीख के अनुसार उनका जन्म 18 फरवरी 1836 को बंगाल के एक प्रांत कामारपुकुर गांव में हुआ था।
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