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अग्रसेन जयंती : जानिए कहानी राजा अग्रसेन की

बुधवार,अक्टूबर 6, 2021
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चीन के महान दार्शनिक और विचारक कंफ्यूशियस (confucius) की चर्चा बहुत होती है। उनके महान विचारों से आज भी कई लोग प्रभावित होते हैं और उनके विचार आज भी प्रासंगित हैं। आओ जानते हैं उनके 10 अनजाने रहस्य।
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शिरडी के साईं बाबा एक चमत्कारिक संत हैं। उनकी समाधि पर जो भी गया झोली भरकर ही लौटा है। उनका जन्म और उनकी जाति एक रहस्य है। श्री सांईं सच्चरित्र में इस संबंध में कोई उल्लेख नहीं मिलता है, परंतु श्री विश्वास बालासाहेब खेर की बुक 'ए यूनिक सेंट ...
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आध्यात्मिक और राजनीतिक रूप से सोए हुए भारत को जगाने के लिए भारत को अपना घर कहने वाली एनी बेसेंट का जीवन जानने योग्य है। कारण स्पष्ट है कि उन्होंने दुनियाभर के धर्मों का गहन अध्ययन किया। उन धर्मों को जाना-परखा और समझा कि वेद और उपनिषद का धर्म ही ...
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भारत के आध्यात्मिक संत पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य की 20 सितम्बर को जयंती है। वे एक दार्शनिक, विचारक और समाज सुधार के रूप में जीवनभर कार्य करते रहे हैं। उन्होंने वैदिक परंपरा की पुन: स्थापना का महत्वपूर्ण कार्य किया। आओ जानते हैं उनके जीवन के संबंध ...
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महर्षि दधीचि का जन्म भाद्रपद शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को हुआ था, इसीलिए इस दिन दधीच जयंती मनाई जाती है।
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उठो, जागो और तब तक मत रूको, जब तक लक्ष्‍य की प्राप्‍ती ना हो जाए। स्‍वामी विवेकानंद के और भी कई संदेश है जो युवाओं को हर कदम पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं। आज भले ही वो इस दुनिया में नहीं हैं लेकिन उनके सुविचार आज भी दोहराएं जाते हैं। उनके संदेश ...
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पीरों के पीर रामापीर, बाबाओं के बाबा रामदेव बाबा (1352-1385) को सभी भक्त बाबारी कहते हैं। जहां भारत ने परमाणु विस्फोट किया था, वे वहां के शासक थे। हिन्दू उन्हें रामदेवजी और मुस्लिम उन्हें रामसा पीर कहते हैं। भाद्रपद के शुक्ल पक्ष की दूज को राजस्थान ...
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भाद्रपद के शुक्ल पक्ष की दूज को राजस्थान के महान संतों में से एक बाबा रामदेवरा जिन्हें रामापीर भी कहते हैं उनकी जयंती मनाई जाती है। इस बार यह जयंती 8 सितंबर को रहेगी। जनश्रुति के आधार पर आओ जानते हैं उनके जीवन से जुड़ा एक रोचक किस्सा।
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भाद्रपद के कृष्‍ण पक्ष की अष्टमी को राजस्थान के संत नवल जी की जयंती मनाई जाती है। इस बार उनकी 261वीं जयंती मनाई जाएगी। जयंती के मौके पर उनकी शोभा यात्रा निकाली जाती है।
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महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले में पैठण के पास आपेगांव में संत ज्ञानेश्वर का जन्म ईस्वी सन् 1275 में भाद्रपद के कृष्ण अष्टमी को हुआ था। उनके पिता विट्ठल पंत एवं माता रुक्मिणी बाई थीं। इस बार अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार 30 अगस्त 2021 को उनकी जयंती रहेगी।
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गोगा पंचमी के 4 दिन बाद ही भाद्रपद कृष्ण नवमी को गोगा नवमी का त्योहार मनाया जाता है। भाद्रपद के कृष्ण पंचमी को गोगा देव का त्योहार मनाया जाता है। आओ जानते हैं कि गोगा पंचमी कब है, क्यों मनाई जाती है, कौन हैं गोगादेव।
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आज भारत के महान संत एवं विचारक योगी रामकृष्ण परमहंस की पुण्यतिथि है। उनका जन्म फाल्गुन शुक्ल द्वितीया को हुआ था। तारीख के अनुसार उनका जन्म 18 फरवरी 1836 को बंगाल के एक प्रांत कामारपुकुर गांव में हुआ था।
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श्री रामकृष्‍ण परमहंस बंगाल ही नहीं संपूर्ण भारत के एक प्रमुख संत और सिद्ध योगी थे। बंगाल के हुगली जिले में स्थित कामारपुकुर नामक गांव में रामकृष्ण का जन्म 20 फरवरी 1836 ईस्वी को हुआ। 16 अगस्त 1886 को महाप्रयाण हो गया। उनके पिता का नाम खुदीराम ...
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महर्षि अरविंद घोष को आध्यात्मिक क्रांति की पहली चिंगारी माना जाता है। उनका जन्म 15 अगस्त 1872 को कोलकाता में हुआ था और 5 दिसंबर 1950 को उनका पांडुचेरी में निधन हो गया था। उनके पिता के.डी. कृष्णघन घोष एक डॉक्टर थे। माता स्वर्णलता देवी और पत्नी का नाम ...
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हर साल श्रावण माह शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को तुलसी दास जयंती मनाई जाती है। इस बार अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार 15 अगस्त 2021, रविवार को तुलसीदास जयंती मनाई जाएगी। आओ जानते हैं उनके बारे में 25 रोचक जानकारियां।
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पुराणों में दधीचि ऋषि का उल्लेख मिलता है। वे एक महान तपस्वी ऋषि थे। उनके पिता का नाम अथर्वा, माता का नाम चित्ति, पत्नी का नाम गभस्तिनी और पुत्र का नाम पिप्पलाद ऋषि था। कुछ जगहों पर इनकी पत्नी का नाम शांति बताया गया है तो कर्दम ऋषि की पुत्री थीं। ...
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राजा जनक के काल में ऋषि याज्ञवल्क्य नाम के एक महान ऋषि थे। आओ जानते हैं इन महान ऋषि के बारे में 7 रोचक बातें।
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संत तुकाराम केवल वारकरी संप्रदाय के ही शिखर नहीं वरन दुनिया भर के साहित्य में भी उनकी जगह असाधारण है। भगवान श्री विट्ठल के भक्त को वारकरी कहते हैं तथा इस संप्रदाय को वारकरी संप्रदाय कहा जाता है। 'वारकरी' शब्द में 'वारी' शब्द अंतर्भूत है। वारी का ...
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मेहेर बाबा ईरानी मूल के भारतीय चिंतक और दार्शनिक थे। मेहर (मेहेर) बाबा एक रहस्यवादी सिद्ध पुरुष थे। कई वर्षों तक वे मौन साधना में रहे। मेहेर बाबा के भक्त उन्हें परमेश्वर का अवतार मानते थे।
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