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Gaj Lakshmi Vrat Katha : क्यों मनाया जाता है महालक्ष्मी व्रत, 1 लोककथा और 2 पौराणिक कथा से जानिए राज

शुक्रवार,सितम्बर 24, 2021
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गजलक्ष्मी व्रत के दिन हाथी की पूजा और महालक्ष्मी के गजलक्ष्मी स्वरूप की पूजा की जाती है। इस साल यह व्रत मत-मतांतर से 28 और 29 सितंबर को मनाया जा रहा है। इस व्रत में मिट्टी के गज बनाए जाते हैं।
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केदारनाथ। उत्तराखंड के केदारनाथ वन प्रभाग क्षेत्र में स्थित वासुकीताल कुंड ( Neelkamal in Vasuki Tal Kedarnath Uttarakhand Miracle ) से लेकर करीब 3 किमी क्षेत्र में कई सालों बाद नीलकमल के फूल खिले हैं। इस फूल का खिलना एक चमत्कार ही है क्योंकि यह अति ...
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किसी भी खास अवसर पर श्री गणेश के इन नामों का पढ़ने अथवा जपने से जीवन के संकट दूर होकर मनुष्य को यश, सुख और सम्मान की प्राप्ति होती है। श्री गणेश ने अलग-अलग युगों में अलग-अलग अवतार लेकर संसार के संकट का नाश किया।
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शुक्रवार को माता लक्ष्मी, माता कालिका और शुक्राचार्य का वार माना जाता है। शुक्रवार का ग्रह है शुक्र ग्रह। शुक्रवार का व्रत रखने और माता लक्ष्मी की पूजा करने से आर्थिक संकट दूर होकर धन समृद्धि और ऐश्वर्य बढ़ता है। आओ जानते हैं कि शुक्रवार को माता ...
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इस वर्ष 24 सितंबर 2021, शुक्रवार को आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की संकष्टी चतुर्थी मनाई जा रही है। इस दिन श्रीकृष्ण तथा बाणासुर की यह कथा पढ़ी जाती है। आइए पढ़ें-
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शुक्रवार के दिन माता लक्ष्मी और माता कालिका के साथ ही संतोषी माता की उपासना भी की जाती है। इस दिन खटाई नहीं खाते हैं और माता का व्रत रखते हैं। माता संतोषी का व्रत रखने और उनकी कथा सुनने से भक्त की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती है। अविवाहितों के विवाह हो ...
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जो स्त्री-पुरुष शुक्रवार को संतोषी माता का व्रत करते हैं, उनके लिए व्रत-विधि इस प्रकार है
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मां संतोषी को प्रिय शुक्रवार के दिन विधि-विधान से पूजन, विधि, कथा सुनने तथा आरती आदि करने से जीवन में लाभदायी परिणाम प्राप्त होते है।
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नमस्कार! 'वेबदुनिया' के मंदिर मिस्ट्री चैनल में आपका स्वागत है। आप जानते ही हैं कि भारत में सैकड़ों चमत्कारिक और रहस्यमय मंदिर हैं। उनमें से कुछ मंदिरों को आपने देखा भी होगा और कुछ के रहस्य को अभी तक सुलझाया नहीं जा सका है। तो चलिए इस बार हम आपको ...
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सिख धर्म के संस्थापक, महान दार्शनिक गुरु, गुरु नानक देव जी से आप सभी परिचित है। उन्होंने अपने अनुयायियों को जीवन की 10 सीख या शिक्षाएं दीं जो इस प्रकार हैं-
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महालक्ष्मी व्रत के दिनों में या किसी भी खास अवसर पर मां लक्ष्मी के 108 नामों का जप करने से वैभव, कीर्ति, ऐश्वर्य, धन-धान्य, सुख-संपत्ति, सौभाग्य और आरोग्य और सम्मान की प्राप्ति होती है।
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समाधि एक बहुत ही पवित्र और अध्यात्मिक शब्द है। इसका संबंध किसी मरने वाले से नहीं है बल्कि मोक्ष, कैवल्य, स्थितप्रज्ञ, निर्वाण प्राप्त व्यक्ति से है। शिवजी हमेशा समाधि में लीन रहते है। अत: इस शब्द का संबंध किसी मरने वाले के क्रिया कर्म के तरीके से ...
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भारत में सिख पंथ का अपना एक पवित्र एवं अनुपम स्थान है सिखों के प्रथम गुरु, गुरुनानक देव सिख धर्म के प्रवर्तक हैं। उन्होंने अपने समय के भारतीय समाज में व्याप्त कुप्रथाओं, अंधविश्वासों, जर्जर रूढ़ियों और पाखंडों को दूर करते हुए प्रेम, सेवा, परिश्रम, ...
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गुरु नानक देव सिख धर्म के संस्थापक और सिखों के पहले गुरु है। उनका अवतरण संवत्‌ 1469 में कार्तिक पूर्णिमा के दिन माता तृप्ता देवी जी और पिता कालू खत्री जी के घर हुआ था।
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22 september Guru nanak dev ji ki punyatithi : भारतीय संस्कृति में गुरु का महत्व आदिकाल से ही रहा है। सिख धर्म के दस गुरुओं की कड़ी में प्रथम हैं गुरु नानक। गुरु साहिबजी से परमात्मा तक, मोक्ष तक या आत्मज्ञान को प्राप्त करने के एक नए मार्ग की परंपरा ...
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हिन्दू संतों के 13 अखाड़े हैं। शिव संन्यासी संप्रदाय के 7 अखाड़े, बैरागी वैष्णव संप्रदाय के 3 अखाड़े और उदासीन संप्रदाय के 3 अखाड़े हैं। इन्हीं में नाथ, दशनामी आदि होते हैं। आओ जानते हैं कि संत अपने नाम के आगे गिरि, पुरी, आचार्य, दास, नाथ आदि उपनाम ...
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इस बार पितृ पक्ष ( Pitru Paksha 2021 Start Date) 20 सितंबर 2021, सोमवार को भाद्रपद मास की शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि से आरंभ होंगे। पितृ पक्ष का समापन 6 अक्टूबर 2021, बुधवार को आश्विन मास की कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को होगा। श्राद्ध पक्ष में ...
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क्षमावणी पर्व या 'क्षमा दिवस' दिगंबर जैन धर्मावलंबियों द्वारा मनाया जाने वाला एक खास पर्व है। इसे क्षमावाणी, क्षमावानी या क्षमा पर्व भी कहते हैं। दिगंबर अनुयायियों द्वारा यह पर्व आश्विन मास कृष्ण पक्ष की एकम के दिन मनाया जाता हैं। इस वर्ष यह पर्व 21 ...
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सिंहस्थ, कुंभ या अर्धकुंभ में अखाड़ों का विशेष महत्व होता है। शैव, वैष्णव और उदासीन पंथ के संन्यासियों के मान्यता प्राप्त कुल 13 अखाड़े हैं। पहले आश्रमों के अखाड़ों को बेड़ा अर्थात साधुओं का जत्था कहा जाता था। पहले अखाड़ा शब्द का चलन नहीं था। साधुओं ...
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