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मुस्लिमों का शुक्रवार, ईसाइयों का रविवार तो हिन्दुओं का कौन-सा वार?

शनिवार,जुलाई 2, 2022
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Kamakhya Devi Mandir : कामाख्या देवी मंदिर देश के 52 शक्तिपीठों में सबसे प्रसिद्ध है। कामाख्या देवी शक्तिपीठ असम की राजधानी दिसपुर के पास गुवाहाटी से 8 किलोमीटर दूर कामाख्या में है। यह शक्तिपीठ तंत्र साधना के लिए प्रसिद्ध है। कामाख्या से 10 किलोमीटर ...
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पौराणिक मान्यतानुसार आषाढ़ माह में वर्षा के कारण जल में जीव-जंतुओं की उत्पत्ति अधिक बढ़ जाती है, अत: इस माह स्वच्छ जल ही पीना चाहिए तथा इसकी स्वच्छता का विशेष ध्यान रखना चाहिए,
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Gupta Navaratri ki katha 30 जून से आषाढ़ महीने की गुप्त नवरात्रि आरंभ हो गई है। गुप्त नवरात्रि से जुड़ी पौराणिक कथा के अनुसार एक समय ऋषि श्रृंगी भक्तजनों को दर्शन दे रहे थे। अचानक भीड़ से एक स्त्री निकलकर आई और करबद्ध होकर ऋषि श्रृंगी से बोली कि ...
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Gupt Navratri 2022 30 जून से 8 जुलाई तक गुप्त नवरात्रि पर्व मनाया जा रहा है। साधारण व्यक्ति भी गुप्त नवरात्रि में मां दुर्गा की आराधना करते हैं। माना जाता है कि इस दौरान मां की पूजा करने से जीवन के सभी संकटों का नाश होता है। तथा घर में सुख-समृद्धि ...
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Jagannath puri rath yatra : 1 जुलाई 202 शुक्रवार से ओड़ीसा के समुद्री तट पर बसे पुरी शहर में भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा निकाली जाएगी। यह यात्रा कई रस्मों के साथ करीब 9 दिनों तक जारी रहती है। आओ जानते हैं कि आखिर इसके पिछे का क्या है पौराणिक कारण या ...
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पुरी का श्री जगन्नाथ मंदिर (Puri Jagannath Temple) एक हिन्दू मंदिर है, जो भगवान जगन्नाथ यानी श्री कृष्ण को समर्पित है। यह भक्तों की आस्था के केंद्र के रूप में विश्वभर में प्रसिद्ध है।
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अमरनाथ की यात्रा आषाढ़ माह के मध्य में प्रारंभ होती है जो सावन माह के मध्य तक चलती है। यह तो सभी जानते हैं कि यहां पर बर्फ का शिवलिंग निर्मित होता है, लेकिन क्या आप यह जानते हैं कि यह शिवलिंग कैसे बनता है? और वह भी ठोस बर्फ का शिवलिंग।
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Mysteries of Jagannath Temple : भारतीय राज्य ओड़ीसा में हिन्दुओं की प्राचीन और पवित्र 7 नगरियों में से एक पुरी में स्थित जगन्नाथ मंदिर को बहुत ही प्राचीन माना जाता है। यहां पर प्रतिवर्ष आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की दूज से 9 रथयात्रा प्रारंभ होती है ...
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Jagannath Puri Rath Yatra 2022 : ओड़ीसा के पुरी में भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा का आयोजन प्रतिवर्ष आषाढ़ माह की शुक्ल द्वितीया को होता है और इसका समापन एकादशी के दिन होता है। रथयात्रा जगन्नाथ मंदिर से निकलकर 3 किलोमीटर दूर गुंडीजा मंदिर पहुंचती है। ...
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Jagannath Rath yatra 2022: ओड़ीसा के पुरी में निकलने वाली विश्‍व प्रसिद्ध जगन्नाथ यात्रा इस बार 1 जुलाई दिन शुक्रवार से शुरू हो रही है। यह हिन्दू कैलेंडर के अनुसार प्रतिवर्ष आषाढ़ माह की द्वितीया तिथि को निकलती है। इस यात्रा में शामिल होने के लिए ...
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पुरी स्थित जगन्नाथ मंदिर भारत के चार पवित्र धामों में से एक है। यह मंदिर करीब 800 वर्ष से भी अधिक समय से विद्यमान है। प्रतिवर्ष आषाढ़ माह में ओडीसा के समुद्र के किनारे बसे पुरी शहर में भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा का आयोजन होता है। इस विश्‍व प्रसिद्ध ...
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Baba Amarnath Yatra started : अमरनाथ यात्रा प्रारंभ हो गई है जो कि 11 अगस्त तक चलेगी। जिन्होंने यात्रा के लिए रजिस्ट्रेशन करवा रखा है उन्हें ही यात्रा में जाने की अनुमति होगी। अमरनाथ यात्रा के लिए 3.25 लाख तीर्थयात्री अब तक रजिस्ट्रेशन करा चुके हैं। ...
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Jagannath Rath Yatra Tradition: जगन्नाथ रथयात्रा के पहले प्रभु जगन्नाथ को 108 कलशों से शाही स्नान कराया जाता है। फिर 15 दिन तक प्रभु जी को एक विशेष कक्ष में रखा जाता है। जिसे ओसर घर कहते हैं। आखिर उन्होंने क्यों एकांत में 15 दिन के लिए रखा जाता है ...
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Rules of Kavad Yatra: श्रावण या सावन मास लगने वाला है। इस माह में शिवभक्त कावड़ यात्रा निकालते हैं। कावड़ एक प्रकार का लकड़ी और रस्सी से बना तराजी होता है जिसमें जल से भरी मिट्टी की दो मटकी रखी होती है। उस जल को लेकर यात्री किसी शिव मंदिर या ...
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श्रावण मास में भोलेनाथ शिव को भक्त कई तरह से प्रसन्न करने के प्रयास करते हैं, आइए जानते हैं कि सावन के पावन महीने में भगवान शंकर को अपनी राशि के अनुसार कौन से Dry Fruits चढ़ाने चाहिए।
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Halharini Amavasya: आषाढ़ माह की अमावस्या यानी हलहारिणी अमावस्या कब है? 28 या 29 जून 2022 को। साथ ही जानिए अमावस्या के शुभ मुहूर्त और इस अमावस्या का महत्व।
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श्रावण मास आने वाला है...आइए जानते हैं पावन महीने में भगवान भोलेनाथ को कैसे करें प्रसन्न....इन सरल उपायों से खूब मिलेगा यश,धन और सफलता....प्रेम, पॉवर, प्रमोशन, शांति और समृद्धि....Shravan mass 2022
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भगवान शिव और पार्वती के पुत्र कार्तिकेय को स्कंद भी कहा जाता है। उन्हें दक्षिण भारत में सुब्रमण्यम और मुरुगन कहते हैं। दक्षिण भारत में उनकी पूजा का अधिक प्रचलन है। कार्तिकेय का वाहन मोर है। एक कथा के अनुसार कार्तिकेय को यह वाहन भगवान विष्णु ने उनकी ...
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ज्योतिष में राहु काल को अशुभ माना जाता है। अत: इस काल में शुभ कार्य नहीं किए जाते है। यहां आपके लिए प्रस्तुत है सप्ताह के दिनों पर आधारित राहुकाल का समय, जिसके देखकर आप अपना दैनिक कार्य कर सकते हैं।
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