75वें स्वतंत्रता दिवस पर हर देशवासी को इन 5 सामाजिक कुरीतियों से चाहिए 'आजादी'

Author विकास सिंह| Last Updated: शनिवार, 14 अगस्त 2021 (22:00 IST)
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जश्न-ए-आजादी के 75वें साल का जश्न पूरा देश धूमधाम से मना रहा है। आजादी के इस सफर में देश के इतिहास में कई ऐसे पड़ाव आए जोकि हर देशवासी के लिए गर्व और स्वाभिमान के प्रतीक बन गए। आजादी के बाद ‘भारत’ ने ‘इंडिया’ तक का सफर भी पूरा कर लिया है। आज जब हम का जश्न मना रहे है तब शिद्दत के साथ इस यात्रा की समीक्षा करने की आवश्यता भी कहीं न कहीं महसूस की जा रही है। आज भी कुछ ऐसी कुरीतियां हमारे समाज में विद्ममान है जिनको देख मन ही मन हर वक्त यह सवाल उठता है कि आखिरी इनसे कुरीतियों से आजादी कब मिलेगी।

1-जातिवादी राजनीति से 'आजादी'-सुनने से थोड़ा कड़वा है लेकिन यह सच है कि देश आज भी जातिवाद की राजनीति की जंजीरों में जकड़ा हुआ है। संविधान के अनुच्छेद में 15 में भले ही धर्म और जाति के आधार पर कोई भी अंतर निषेध किया गया हो लेकिन आज भी राजनीतिक दल जातिवादी राजनीति कर अपनी सियासी रोटियां सेंकते है।

बात चाहें चुनाव के समय की हो या बगैर चुनाव की सत्ता में काबिज सियासी दल और विपक्ष में रहने वाली पार्टी के एजेंडे में जाति पॉलिटिक्स सबसे उपर होती है। जाति के आधार पर वोटबैंक को साधने के लिए राजनीतिक दल किसी भी मौके पर चौंका मारने से नहीं चूकते है। देश में इस वक्त ओबीसी आरक्षण को लेकर सियासी दलों में चल रही नूराकुश्ती जातिवादी राजनीति का सबसे बड़ा प्रमाण है।


2-धार्मिक कट्टरता से 'आजादी'-
देश को अंग्रेजों की सैकड़ों साल की गुलामी से आजादी दिलाने की नींव 18 वीं सदीं की शुरुआत में शुरु हुए सामाजिक सुधार आंदोलन से पड़ी थी और पूरे देश ने एक साथ खड़े होकर अग्रेजों के खिलाफ मोर्चा लिया था। वहीं आज आजादी के 75 साल बाद देश में धार्मिक कट्टरता का जहर ऐसे नासूर में बदल गया है जिसका इलाज समय रहते नहीं किया गया तो वह ऐसी लाइलाज बीमारी बन जाएगी जो पूरे समाज के लिए हानिकारक होगी।

75वें स्वतंत्रता दिवस से ठीक पहले देश के सबसे बड़े राज्य उत्तरप्रदेश के कानपुर से जो तस्वीरें सामने आई वह बताती है कि हम आज किस तरह के असहिष्णु समाज में खड़े है। देश भर के विभिन्न राज्यों से आए दिन आने वाले मॉब लिंचिंग की तस्वीरें पूरे समाज को कठघरे में खड़ा करने के लिए काफी है।

3-बेरोजगारी से 'आजादी'- बेरोजगारी आजादी के बाद से ही एक सामाजिक समस्या बन गई है। अगर बेरोजगारी के आंकड़ें को देखे तो देश में बेरोजगारी दर इस वक्त बीते कई दशकों के सर्वोच्च स्तर पर पहुंच गई है। देश में संविधान में भले ही अवसर की समानता की बात कही गई हो लेकिन आज का युवा नौकरी में ‘अवसर’ की मांग को लेकर सड़क पर दर-दर को ठोकरें खाता दिख रहा है। सड़क पर ठोकर खाने को मजबूर ‘युवा भारत’ का युवा
बस एक मांग करता है कि आखिर इस बेरोजगारी से आजादी कब मिलेगी?

4-गरीबी से 'आजादी'-आजादी के 75 साल में भले भारत ने इंडिया तक अपना सफर पूरा कर लिया हो लेकिन इन 75 सालों में भारत और इंडिया के बीच की खाई हर एक नए दिन के साथ चौड़ी ही होती जा रही है। कोरोना संकट के चलते करोड़ों की संख्या में लोगों के रोजगार खोने के चलते गरीबी की आंकड़ों में बेतहाशा बढ़ोत्तरी होती जा रही है। हालात को इससे समझा जा सकता है कि भारत 2020 में दुनिया में सबसे ज्यादा गरीबों की संख्या बढ़ने वाले देशों में शामिल हो गया है। एक अनुमान के मुताबिक देश की 30 फीसदी से अधिक आबादी गरीबी रेखा के नीचे रह रही है।


5-भ्रष्टाचार से 'आजादी'-
आजादी के 75 सालों में भ्रष्टाचार एक बड़ी समस्या के रुप में हमारे सामने है। आजादी के 75 साल के इतिहास को उठाकर देखे तो भ्रष्टाचार के बड़े-बड़े घोटालों से इतिहास के पन्ने भरे हुए है। 'ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल' की विश्व के भ्रष्ट देशों की रैकिंग में भारत 86 वें स्थान पर है
जो यह बताने के लिए काफी है कि भ्रष्टाचार की जड़े किस कदर हमारे समाज को अंदर ही अंदर खोखला कर रही है। आज जरूरत है कि सरकार कड़े और कठोर कानून के साथ सामाजिक जागरुकता के माध्यम से देश को भ्रष्टाचार रुपी बीमारी से आजादी दिलाएं।



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