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हिन्‍दी कविता: पूर्ण विराम...

गुरुवार,अक्टूबर 21, 2021
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लोग कहते हैं कि तुममें जो दाग है वह तुम्हारे भीतर की ज्वालामुखी के कारण है | यह कैसी विडम्बना है कि ऊपर से तुम शान्त हो और शीतलता ही देते हो सदा |
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15 अक्टूबर को कवि सूर्यकांत त्रिपाठी निराला की पुण्यतिथि है। यहां पढ़ें उनकी खास कविता-
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स्नेह निर्झर बह गया है, रेत ज्यों तन रह गया है, आम की यह डाल जो सूखी दिखी
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निदा फाजली का जन्म ग्वालियर में 12 अक्टूबर 1938 को हुआ था। 'निदा फाजली' यह उनके लेखन का नाम है। उनका असली नाम मुक्तदा हुसैन है। यहां प्रस्तुत हैं उनके कुछ मशहूर दोहे-
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छत्तीसगढ़ : प्रवासी कविता

शुक्रवार,अक्टूबर 1, 2021
धान का कटोरा' छत्तीसगढ़, खनिजों का है खान, इस्पात एलुमिनम का उत्पादन, कम जितना करें बखान।
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हर शहर में महात्मा गांधी मार्ग बनाया है यह आपके नाम का ही प्रताप है बापू कि इस पर बसे लोगों ने तबीयत से कमाया है। जब तक आपके सारे पदचिन्ह नहीं मिल जाते तब तक हमने इतना अवश्य किया है कि कोई और आपके जैसे पदचिन्ह नहीं बना दे उन्हें रोकने का ...
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कमला भसीन के निधन पर अभिनेत्री शबाना आज़मी ने अपने ट्विटर पर लिखा है, “मुझे हमेशा से लगता था कि कमला भसीन अजेय थीं और वह अंत तक अजेय रहीं। उनकी कथनी और करनी में किसी तरह का विरोधाभास नहीं था”
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जिस दिन से घर में आती हैं बेटियां, माता-पिता की इज्जत बन जाती हैं बेटियां। भारत के विकास की डोर थामे हैं बेटियां,
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सच्ची लगन, कर्मनिष्ठा और निरंतर प्रयास से उच्च शिखर पर बढ़ती रहो, अपनी लक्ष्मण-रेखा स्वयं खींच कर मान-सम्मान की गरिमामयी
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आज राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की जयंती है। उन्हें क्रांतिपूर्ण संघर्ष की प्रेरणा देने वाली ओजस्वी और राष्ट्रीय भावनाओं से ओतप्रोत कविताओं के कारण असीम लोकप्रियता मिली। यहां पढ़ें उनकी 6 खास रचनाएं....
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मैं वह भाषा हूं, जिसमें तुम जीवन साज पे संगत देते मैं वह भाषा हूं, जिसमें तुम, भाव नदी का अमृत पीते मैं वह भाषा हूं, जिसमें तुमने बचपन खेला और बढ़े हूं वह भाषा, जिसमें तुमने यौवन, प्रीत के पाठ पढ़े...
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पहचान है हमारी हिन्दी, हिन्दोस्तान की है ये बिंदी। घर-घर बहती है हिन्दी की धारा, विश्व गुरु बनेगा हिन्दोस्तान हमारा,
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हैं परेशान इन दिनों बहुत सारी चीजों को लेकर हम! मसलन, क्या करना चाहिए हमें- नहीं बचे जब अपना ही देश हमारे पास! कहाँ पहुँचना चाहिए तब हमें?
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जय-जय श्रीराम जय-जय प्रभु राम, मेरे मन में बसे हैं श्रीराम, मेरे रोम-रोम में बसे हैं श्री प्रभु राम
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मेरे प्रभु! मुझे इतनी ऊंचाई कभी मत देना, गैरों को गले न लगा सकूं, इतनी रुखाई कभी मत देना।
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हिन्दू तन-मन, हिन्दू जीवन, रग-रग हिन्दू मेरा परिचय! मैं शंकर का वह क्रोधानल कर सकता जगती क्षार-क्षार। डमरू की वह प्रलय-ध्वनि हूं जिसमें नचता भीषण संहार।
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साहस आत्मबलिदान स्वरूप रंग वीरों का केसरिया, हृदय से उसका सम्मान करें ! श्वेत रंग परिचायक शांति का पवित्रता का ये आह्वान करे ! अशोक चक्र की धर्मचक्र प्रतीक चौबीस तीलियां चहुंमुखीं विकास का प्रतिनिधित्व करे!
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स्वतंत्रता दिवस की प्रथम वर्षगांठ 15 अगस्त 1948 पर रचीं पंक्तियां यहां पढ़ें
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पन्द्रह अगस्त सन् सैंतालीस को अपना देश स्वतंत्र हुआ।। उन वीरों को हम नमन करें। जिनने अपनी कुरबानी दी।।
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