हिन्दी कविता : राजा दशरथ के घर बाजे शहनाई रे

Lord Ram Poem 
 
के घर बाजे शहनाई रे
गंगा मैया तोहे पियरी चढ़ाऊं

सब मिल के गावे बधाई रे
गंगा मैया तोहे पियरी चढ़ाऊं

जनक दुलारी अयोध्या आई
फूल हंसे कलियां मुस्काई
मंगल गीत गाए कौशल्या माई रे
गंगा मैया तोहे पियरी चढ़ाऊं

राजा दशरथ के घर बाजे शहनाई रे
गंगा मैया तोहे पियरी चढ़ाऊं

कनक भवन में सजी दिवाली
सारी नारी मिल के गावे गारी
अयोध्यावासी बांटत हैं मिठाई रे
गंगा मैया तोहे पियरी चढ़ाऊं
राजा दशरथ के घर बाजे शहनाई रे
गंगा मैया तोहे पियरी चढ़ाऊं।




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