चांद पर कविताएं : आओ चांद से बातें करें

*तुम, एक कच्ची रेशम डोर 
तुम, एक झूमता सावन मोर 
तुम, एक घटा ज्यों गर्मी में गदराई, 
तुम, चांदनी रात, मेरे आंगन उतर आई 
 
तुम, आकाश का गोरा-गोरा चांद
तुम, नदी का ठंडा-ठंडा बांध 
 
तुम, धरा की गहरी-गहरी बांहें 
तुम, आम की मंजरी बिखरी राहें 
 
तुम, पहाड़ से उतरा नीला-सफेद झरना 
तुम, चांद-डोरी से बंधा मेरे सपनों का पलना 
 
तुम, जैसे नौतपा पर बरसी नादान बदली 
तुम, जैसे सोलह साल की प्रीत हो पहली-पहली
 
तुम, तपते-तपते खेत में झरती-झरती बूंदें, 
तुम, लंबी-लंबी जुल्फों में रंगीन-रंगीन फुंदे, 
 
तुम, सौंधी-सौंधी-सी मिट्टी में शीतल जल की धारा 
तुम, बुझे-बुझे-से द्वार पर खिल उठता उजियारा।
sharad poonam



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