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31 August: मशहूर साहित्‍यकार अमृता प्रीतम का जन्‍मदिवस, 10 खास बातें

मंगलवार,अगस्त 31, 2021
amrita pritam
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रवीन्द्रनाथ ठाकुर कवि, दार्शनिक, चित्रकार जैसी कई कलाओं का संगम थे। टैगोर सिर्फ महान रचनाधर्मी ही नहीं थे, बल्कि वो पहले ऐसे इंसान थे जिन्होंने पूर्वी और पश्चिमी दुनिया के मध्‍य सेतु बनने का कार्य किया था।
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आज चाचा चौधरी के जनक कार्टूनिस्ट प्राण कुमार शर्मा की पुण्यतिथि है। घर-घर में चर्चित चाचा चौधरी, एक ऐसा किरदार था, जो बच्चों और बड़ों सभी में समान रूप से प्रिय था।
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मैथिलीशरण गुप्त का जन्म झांसी के समीप चिरगांव में 3 अगस्त, 1886 को हुआ। बचपन में स्कूल जाने में रूचि न होने के कारण इनके पिता सेठ रामचरण गुप्त ने इनकी शिक्षा का प्रबंध घर पर ही किया था
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31 जुलाई को प्रेमचंद जयंती है। अपनी लेखनी के माध्यम से समाज सुधार का प्रचार करने और उसे आत्मसात करने वाले वरिष्ठ साहित्यकार मुंशी प्रेमचंद की लेखनी आज भी उतनी ही प्रासंगिक है। यहां उनकी जयंती के उपलक्ष्य में सुधी पाठकों के लिए प्रस्तुत है उनकी यादों ...
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कवि रवीन्द्रनाथ टैगोर का जन्म 7 मई 1861 को कोलकाता में हुआ था। बचपन से कुशाग्र बुद्धि के रवींद्रनाथ ने देश और विदेशी साहित्य, दर्शन, संस्कृति आदि को अपने अंदर समाहित कर लिया था
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रबीन्द्रनाथ ठाकुर या रवींद्रनाथ टैगोर का जन्‍म 7 मई सन् 1861 को कोलकाता में हुआ था। रवींद्रनाथ टैगोर एक कवि, उपन्‍यासकार, नाटककार, चित्रकार, और दार्शनिक थे। र
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11 मई 1912 में लुधियाना के समराला में जन्‍में सआदत हसन मंटो का 18 जनवरी 1955 में पाकिस्‍तान के लाहौर में निधन हो गया।
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इसीलिये मैं श्रद्धेय विद्यानिवास मिश्र को कभी स्वर्गीय नहीं कहता,कम से कम मेरे लिए वे दिवंगत नहीं हुए। उनकी अक्षर काया अपूर्व है,यश काया अपरिमित और स्मृति काया अमर।
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भारतेंदु स्वयं लेखक, कवि, पत्रकार, संपादक, निबंधकार, नाटककार, व्यंग्यकार एवं कुशल वक्ता थे। उनकी इस प्रतिभा से रूबरू संपूर्ण युग पत्रकारिता का स्वर्णिम युग कहलाया। इस युग में नए प्रयोग, नए लेखन और नई शैली को भरपूर बढ़ावा मिला।
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प्रेमचंद ने 1934 में अजंता सिनेटोन नामक फिल्म कंपनी से समझौता करके फिल्म- संसार में प्रवेश किया। वे बम्बई पहुंचे और 'शेर दिल औरत' और 'मिल मजदूर' नामक दो कहानियां लिखीं। 'सेवा सदन' को भी पर्दे पर दिखाया गया। लेकिन प्रेमचंद मूलतः निष्कपट व्यक्ति थे।
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8 अक्टूबर यानी आज मुंशी प्रेमचंद की पुण्यतिथि है। प्रेमचंद का जन्म वाराणसी से लगभग चार मील दूर, लमही नाम के गांव में 31 जुलाई, 1880 को हुआ था। उनका वास्तविक नाम ‘धनपत राय’ था।
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दिनकर के साहित्यिक जीवन की विशेषता यह थी कि शासकीय सेवा में रहकर राजनीति से संपृक्त रहते हुए भी वे निरंतर स्वच्छंद रूप से साहित्य सृजन करते रहे। उनकी साहित्य चेतना राजनीति से उसी प्रकार निर्लिप्त रही, जिस प्रकार कमल जल में रहकर भी जल से निर्लिप्त ...
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धन और संपत्ति चाहते हैं, साहित्य में उनके लिए स्थान नहीं है। केवल वे, जो यह विश्वास करते हैं कि सेवामय जीवन ही श्रेष्ठ जीवन है
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रवींद्रनाथ टैगोर एक कवि, उपन्‍यासकार, नाटककार, चित्रकार, और दार्शनिक थे। रवींद्रनाथ टैगोर एशिया के प्रथम व्‍यक्ति थे, जिन्‍हें नोबल पुरस्‍कार से सम्‍मानित किया गया था।
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अपनी सुयोग्य लेखन क्षमता से करोड़ों पाठकों के दिलों पर राज करने वाले गुरुदेव का जन्म 7 मई 1861 को कोलकाता में हुआ था। आठ वर्ष की नन्ही उम्र से उनकी लेखन यात्रा आरंभ हुई।
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दुनिया के वे ऐसे पहले कवि थे जिन्होंने अंडमान के एकांत कारावास में जेल की दीवारों पर कील और कोयले से कविताएं लिखीं और फिर उन्हें याद किया। इस प्रकार याद की हुई 10 हजार पंक्तियों को उन्होंने जेल से छूटने के बाद पुन: लिखा।
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मिर्ज़ा ग़ालिब उन बिरले कवियों में से हैं जिनको चाहे अभीष्ट प्रशंसा उनके जीवन में न मिली हो किंतु उनकी योग्यता और विद्वत्ता की धाक सभी पर जमी हुई थी।
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पं. माखनलाल चतुर्वेदी हिन्दी पत्रकारिता और साहित्य के क्षेत्र में एक ऐसा नाम हैं, जिसे छोड़कर हम पूरे नहीं हो सकते। उनकी संपूर्ण जीवनयात्रा, आत्मसमर्पण के खिलाफ लड़ने वाले की यात्रा है।
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देश पर अपनी जान न्यौछावर कर देने वाले शहीद-ए-आजम भगत सिंह ने अपनी मां की ममता से ज्यादा तवज्जो भारत मां के प्रति अपने प्रेम को दी थी।
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