मार्क्सवादी क्रांतिकारी चे ग्वेरा के बारे में 8 बड़ी बातें

Last Updated: शनिवार, 9 अक्टूबर 2021 (11:57 IST)
मार्क्सवादी क्रांतिकारी चे ग्वेरा की आज ही के दिन 9 अक्टूबर, 1967 को मौत हुई थी। पोस्टर बॉय अर्नेस्टो चे ग्वेरा( Ernesto Che Guevara) को एल चे या सिर्फ चे बुलाते थे। उनमें बहुमुखी प्रतिभा थी। वह एक डॉक्टर, लेखक, नेता, गुरिल्ला नेता, क्रांतिकारी नेता और कूटनीतिज्ञ भी थे। चे ने दक्षिणी अमेरिका के कई राष्ट्रों में क्रांति के माध्यम से स्वतंत्र बनाने का प्रयास किया था। अपनी चिकित्सीय शिक्षा के दौरान चे लैटिन अमेरिका में घूमा। इस दौरान महाद्वीप में फैली गरीबी ने चे को अंदर तक हिला कर रख दिया। चे ने इस पर विचार किया। गरीबी और आर्थिक परिस्थिति के बिगड़ने के कारण सामने आए। जिसमें प्रमुख रूप से थे पूंजीवादी, एकाधिकार, साम्राज्यवाद, वंशवाद और इन सबसे आजाद होने का तरीका था विश्व क्रांति। चे ग्वरो के बारे में जानते हैं 10 बड़ी बातें -



- चे ग्वेरा का जन्म 14 जून, 1928 को अर्जेंटिना के मध्यम परिवार में हुआ था। वह
5 भाई बहन थे। ग्वेरा पढ़ाई में होशियार थे। 1953 में वह डॉक्टर बन गए। मार्क्सवादी में उनकी शुरू से ही दिलचस्पी रही। अपने चिकित्सीय पेशे के दौरान उन्होंने खूब सफर किया। ऐसे में उन्होंने कदम उठाया और गरीबी और शोषण होता देखकर मन में क्रांति की आग भड़की।

- 1957 में वह मेक्सिको गए और क्रांतिकारी नेता फिदेल कास्त्रो से भेंट की। ग्वेरा कास्त्रो के ‘26 जुलाई के आंदोलन में शामिल हुए’। जिसमें कास्त्रो की जीत हुई। 1959 में कास्त्रो ने बतिस्ता की सरकार को खत्म कर दिया और क्यूबा की सत्ता हासिल की। इस दौरान ग्वेरा नेशनल बैंक ऑफ क्यूबा के अध्यक्ष बनें और उद्योग मंत्री। उद्योग मंत्री होने के नाते दुनिया में सफर किया। इस दौरान औद्योगिक राष्ट्रीयकरण की योजना साथ लाए।

- 1965 में ग्वेरा क्यूबा छोड़कर अफ्रीका पहुंच गए। जहां पर भी बदलाव लाना चाहते थे। अफ्रीका में बागियों में गुरिल्ला युद्ध में प्रशिक्षण देने का प्रयास किया था लेकिन वह सफल नहीं रहे। इसके बाद 1966 में वह फिर से क्यूबा लौट गए। अमेरिका की मदद से ग्वेरा और अन्य लड़ाकों को गिरफ्तार कर लिया। 9 अक्टूबर 1967 को बोलिविया के एक गांव में मौत की सजा दे दी गई।

- मौत के बाद ग्वेरा चे को अच्छी और बुरी नजर दोनों तरह से देखा गया। हालांकि टाइम मैगजीन ने 20वीं ष्षताब्दी के 100 महत्वपूर्ण लोगों की सूची में शामिल किया है।

- मरने से पहले ग्वेरा का सपना तो पूरा नहीं हो सका लेकिन क्रांति की आग जरूर लगा गए थे। 20वीं सदी के सबसे विचारक योद्धा कहा जाता है। वह क्रांतिकारी होने के साथ एक बहुत अच्छे कवि भी थे। युद्ध को लेकर उन्होंने एक किताब लिखी थी जिसका नाम है - ‘गुरिल्ला वेलफेयर‘ विद्रोही नेता होने के साथ वह एक महान कवि भी था।

- हालांकि ग्वेरा को सभी चे करके बुलाते थे। लेकिन बता दें कि चे का मतलब आम भाषा में भाई, ब्रो, ड्यूड होता है। वैसे ही क्यूबा में चे बोला जाता है। कास्त्रो से मुलाकात के बाद क्रांतिकारियों का समूह उन्हें चे करके बोलने लगा।

- बता दें कि 1959 में क्यूबा में कास्त्रो के सत्ता में आने के बाद चे ‘नया आदमी‘ का विचार रखा। जो भी इसके उन्हें विरोधी घोषित कर खत्म कर दिया जाता था।

- चे ने तो कई लोगों को मौत के घाट उतारा था लेकिन अपनी मौत के समय भीख मांगते नजर आए थे। जी हां, बोलिविया में चे को पकड़ लिया गया। चे के पैरों में बहुत सारी गोलियां दागी गई थी। चे भीख मांगते हुए कहा था ‘गोली मत चलाना। मैं चे ग्वेरा हूं। मरकर नहीं बल्कि जिंदा रहकर ज्यादा काम आऊंगा।‘ हालांकि अन्य लोगों को छलनी करने के कारण चे को नहीं बख्शा गया। और आखिरी में मौत हो गई।



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