दिल्ली ने की कोरोना की तीसरी लहर से निपटने की तैयारी, 50 हजार ऑक्सीजन बेड की बनाई योजना

Last Updated: सोमवार, 10 जनवरी 2022 (23:58 IST)
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नई दिल्ली। ने कोरोनावायरस (Coronavirus) के बढ़ते मामलों के बीच महामारी की तीसरी लहर से निपटने के लिए 50000 ऑक्सीजन उपलब्धता वाले बिस्तरों के साथ ही 12059 स्थापित करने की योजना बनाई है।
दिल्ली के अस्पतालों में वर्तमान में 16,180 ऑक्सीजन उपलब्धता वाले बिस्तरों के अलावा 3,619 आईसीयू बिस्तर हैं। दिल्ली सरकार के बिस्तरों की संख्या में वृद्धि करने की योजना के मुताबिक, पहले चरण में ऑक्सीजन उपलब्धता वाले बिस्तरों की संख्या बढ़ाकर 28,645, दूसरे चरण में 37,000 और तीसरे चरण में इसे बढ़ाकर 50,000 बिस्तर किया जाएगा।

वहीं पहले चरण में आईसीयू बिस्तरों की संख्या बढ़ाकर 8,041, दूसरे चरण में 10,594 और तीसरे चरण में 12,059 किए जाने का लक्ष्य है। दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की बैठक में सोमवार को अधिकारियों ने कहा कि शहर में दैनिक मामलों की संख्या बढ़कर एक लाख तक पहुंचने के बुरे हालात में 28,000 ऑक्सीजन उपलब्धता वाले बिस्तरों जबकि 18,000 आईसीयू बिस्तरों की आवश्यकता पड़ सकती है।

साथ ही कहा कि 75,000 दैनिक मामलों की सूरत में 21,000 ऑक्सीजन उपलब्धता वाले बिस्तरों जबकि 13,500 आईसीयू बिस्तरों की आवश्यकता पड़ सकती है।

1 लाख मामलों पर पड़ेगी 18 हजार आईसीयू बेड की जरूरत : दिल्ली सरकार के अनुमान के मुताबिक, राष्ट्रीय राजधानी में अगर कोरोनावायरस संक्रमण के एक लाख दैनिक मामले सामने आते हैं तो कोविड मरीजों के लिए कम से कम 18 हजार आईसीयू बिस्तर और 28 हजार ऑक्सीजन बिस्तरों की जरूरत पड़ेगी।

एक लाख दैनिक मामले सामने आने पर कोविड-19 के केवल पांच प्रतिशत मामलों में ही अस्पताल में भर्ती करने की जरूरत होगी। अनुमान के अनुसार, चार हजार मरीजों को ऑक्सीजन बिस्तरों की जरूरत होगी तथा एक हजार मरीजों को आईसीयू बिस्तरों की आवश्यकता पड़ सकती है।

वायरस के स्वरूप से संक्रमण की तीसरी लहर के दौरान तैयारी की समीक्षा के लिए आहूत दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की बैठक में सोमवार को सरकार ने यह अनुमान पेश किया। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान के वैज्ञानिकों द्वारा बनाए गए ‘सूत्र’ मॉडल ने अनुमान लगाया था कि दिल्ली में 15 जनवरी के आसपास संक्रमण अपने चरम पर होगा और इस दौरान राष्ट्रीय राजधानी में लगभग 70 हजार मामले आ सकते हैं।

अनुमान के मुताबिक, इस स्थिति से निपटने के लिए 18,000 आईसीयू बिस्तर और 28,000 ऑक्सीजन बिस्तरों की जरूरत पड़ेगी जिस पर मरीज औसतन 18 से सात दिन तक इलाज के लिए रह सकें। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, संक्रमण के चरम पर पहुंचने की स्थिति में अस्पताल में कुल 46,000 बिस्तरों की जरूरत होगी। राज्य सरकार ने कहा कि 37,000 कोविड बिस्तर को तैयार रखने का लक्ष्य रखा गया है।

इसके अलावा 10,594 आईसीयू बिस्तर और 2,328 पीडियाट्रिक बिस्तर की व्यवस्था की जाएगी। आंकड़ों के अनुसार, 10 जनवरी तक 31,695 कोविड बिस्तर, 9,844 आईसीयू बिस्तर और 2,328 पीडियाट्रिक तैयार हैं।(भाषा)



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