Merry christmas : ईसा मसीह का असली जन्म नाम, जन्म स्थान और जन्म समय जानिए

के संस्थापक हैं। ईसाइ धर्म मुख्ययतः तीन प्रभुख संप्रदाय में विभाजित हैं- कैथोलिक, प्रोटेस्टेंट और ऑर्थोडॉक्स तथा इनका धर्मग्रंथ बाइबिल है। ईसा मसीह को पहले से चला रहे प्रॉफेट की परंपरा का एक प्रॉफेट माना जाता हैं। उन्होंने दुनिया को एक नया नियम दिया और लोगों को प्रेम करना सिखाया। आओ जानते हैं उनके असली जन्म नाम, जन्म स्थान और जन्म समय के बारे में संक्षिप्त जानकारी।


ईसा मसीह का जन्म स्थान : ईसा के जन्म के कुछ ही समय पहले सम्राट ऑगस्टस ने यह आदेश जारी किया कि उसके राज्य के सभी लोग अपना अपना नाम दर्ज कराएं। ईसा के माता पिता भी अपना नाम दर्ज कराने ही जा रहे थे कि रास्ते में ईसा का जन्म हुआ। (लूका 2:1-3)। मतलब यह कि ईसा के माता पिता नाजरथ से येरुशलम जा रहे थे तो रास्ते में बेथलेहम में एक जगह में उनका जन्म हुआ। बेथलेहम इसराइल में यरुशलम से 10 किलोमीटर दक्षिण में स्थित एक फिलिस्तीनी शहर है। कहते हैं जब यीशु का जन्म हुआ तब मरियम कुंआरी थीं। मरियम योसेफ की धर्म पत्नी थीं।

यह भी कहा जाता है कि मरिया को यीशु के जन्म के पहले एक दिन स्वर्गदूत गाब्रिएल ने दर्शन देकर कहा था कि धन्य हैं आप स्त्रियों में, क्योंकि आप ईश्‍वर पुत्र की माता बनने के लिए चुनी गई हैं। यह सुनकर मदर मरियम चकित रह गई थीं। इसके कुछ समय के बाद मरियम और योसेफ अपना नाम लिखवाने बैथलेहेम गए और कहीं भी जगह न मिलने पर वे एक गुफा में रुक गए जो शहर से बाहर एकांत में थी। वहीं पर यीशु का जन्म हुआ। कहते हैं कि यीशु के जन्म के बाद उन्हें देखने के लिए बेथलेहेम में तीन विद्वान पहुंचे थे जिन्हें फरिश्ता कहा गया। जहां उनका जन्म हुआ वहां आज एक चर्च है जिसे आज 'चर्च ऑफ नेटिविटी' कहा जाता है।

ईसा मसीह का जन्म समय : परंपरा से ईसा मसीह का जन्म समय 25 दिसंबर सन् 6 ईसा पूर्व माना जाता है। इसीलिए हर वर्ष 25 दिसंबर को मनाया जाता है। हालांकि बाइबल में ईसा के जन्म का कोई दिन नहीं बताया गया है। न्यू कैथोलिक इनसाइक्लोपीडिया और इनसाइक्लोपीडिया ऑफ अरली क्रिश्चियानिटी में भी इसका कोई जिक्र नहीं मिलता है। बाइबल में यीशु मसीह के जन्म की कोई निश्‍चित तारीख नहीं दी गयी है।

एक वर्ष पूर्व बीबीसी पर एक रिपोर्ट छपी थी उसके अनुसार यीशु का जन्म कब हुआ, इसे लेकर एकराय नहीं है। कुछ धर्मशास्त्री मानते हैं कि उनका जन्म वसंत में हुआ था, क्योंकि इस बात का जिक्र है कि जब ईसा का जन्म हुआ था, उस समय गड़रिये मैदानों में अपने झुंडों की देखरेख कर रहे थे। अगर उस समय दिसंबर की सर्दियां होतीं, तो वे कहीं शरण लेकर बैठे होते। और अगर गड़रिये मैथुन काल के दौरान भेड़ों की देखभाल कर रहे होते तो वे उन भेड़ों को झुंड से अलग करने में मशगूल होते, जो समागम कर चुकी होतीं। ऐसा होता तो ये पतझड़ का समय होता। मगर बाइबल में ईसा के जन्म का कोई दिन नहीं बताया गया है। इतिहासकारों के अनुसार रोमन काल से ही दिसंबर के आखिर में पैगन परंपरा के तौर पर जमकर पार्टी करने का चलन रहा है। यही चलन ईसाइयों ने भी अपनाया और इसे नाम दिया 'क्रिसमस'।

ईसा मसीह का असली जन्म नाम : ईसा मसीह को इब्रानी में येशु, यीशु या येशुआ कहते थे परंतु अंग्रेजी उच्चारण में यह जेशुआ हो गया। यही जेशुआ बिगड़कर जीसस हो गया। उन्हें नाजरथ का येशु कहते थे।

रविवार को यीशु ने येरुशलम में प्रवेश किया था। इस दिन को 'पाम संडे' कहते हैं। शुक्रवार को उन्हें सूली दी गई थी इसलिए इसे 'गुड फ्राइडे' कहते हैं और रविवार के दिन सिर्फ एक स्त्री (मेरी मेग्दलेन) ने उन्हें उनकी कब्र के पास जीवित देखा। जीवित देखे जाने की इस घटना को 'ईस्टर' के रूप में मनाया जाता है। उसके बाद यीशु कभी भी यहूदी राज्य में नजर नहीं आए।



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