विज्ञान के क्षेत्र से किशोरियों का कम लगाव : कारण एवं निराकरण

किशोरियों को क्यों पढ़ना चाहिए? कुछ तथ्य

* जो किशोरियां विज्ञान पढ़ती हैं, वे अपनी सहेलियों से जो दूसरा विषय लेकर पढ़ती हैं, से 26% ज्यादा कमाई करती हैं।

* विज्ञान पढ़ने वाली किशोरियां अन्य विषय पढ़ने वाली किशोरियों की अपेक्षा ज्यादा प्रतिस्पर्धी एवं हार न मानने वाली होती हैं।

* जो किशोरियां विज्ञान विषय लेती हैं उनकी तार्किक क्षमता एवं कठिन परिस्थितियों से निपटने की क्षमता अन्य किशोरियों की अपेक्षा ज्यादा अच्छी होती है।
* वैज्ञानिक ढंग से सोचने के कारण अपने व्यक्तित्व एवं वातावरण को अधिक प्रभावशाली बनाती हैं।

* अपने परिवार, समाज एवं देश के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान देने की क्षमता विज्ञान पढ़ने वाली किशोरियों में होती है।

किशोरियों को कैसे विज्ञान के प्रति प्रोत्साहित करें? निराकरण
* माता-पिता एवं समाज को परंपरागत व रूढ़िवादी सोच को बदलना होगा। किशोरियों में बचपन से ही विज्ञान व गणित के प्रति उत्साहपूर्ण वातावरण तैयार कर उनके अवचेतन मन में यह बात डालनी होगी कि विज्ञान जीवन के लिए बहुत महत्वपूर्ण विषय है।

* विद्यालय एवं सामाजिक परिवेश में विज्ञान से संबंधित कार्यक्रमों का आयोजन कर विज्ञान, इंजीनियरिंग, तकनीकी, कम्प्यूटर, फॉर्मेसी या अन्य विज्ञान के विषयों में अग्रणी स्थानीय महिलाओं को आमंत्रित कर संबोधन करवाना चाहिए। इससे किशोरियों के सामने उनके रोल मॉडल्स होंगे एवं उनसे प्रभावित होकर विज्ञान के विषयों में उनकी रुचि बढ़ेगी।
*विद्यालयीन पाठ्यक्रमों को इस प्रकार से प्रारूपित करना चाहिए जिससे किशोरियों को विज्ञान विषय में सहभागिता के अवसर अधिक मिलें।

* शिक्षक छात्र एवं शिक्षा के बीच की बहुत महत्वपूर्ण कड़ी हैं, विज्ञान के क्षेत्र में नवाचार से परिचित कराने के लिए शिक्षक प्रशिक्षण अत्यंत महत्वपूर्ण है। प्रशिक्षण के दौरान शिक्षकों को किशोरियों की विज्ञान के प्रति अभिरुचि बढ़ाने की तकनीकों से परिचित करवाया जाना चाहिए।
* प्राथमिक स्तर पर साइंस कॉम्पिटिशन, साइंस फेयर, विज्ञान प्रश्नोत्तरी पाठ्यक्रम में अनिवार्य घोषित की जानी चाहिए ताकि बच्चियों की अभिरुचि विज्ञान के प्रति बढ़ सके एवं प्रोत्साहन के लिए उनको ट्रॉफियां, प्रमाण पत्र एवं अवॉर्ड देने चाहिए।

* वर्कशॉप का आयोजन कर किशोरियों को विज्ञान के अनेक रहस्यों को सरल ढंग से समझाना चाहिए। सरल मशीनों की क्रियाविधि एवं संचालन की जानकारी से उनके मन में विज्ञान के प्रति उत्सुकता जाग्रत होगी।
* रसायन के अनेक चमत्कारों का विश्लेषण उनके सामने करना चाहिए। रासायनिक अभिक्रियाओं के जादू देखकर उनके मन में विज्ञान के प्रति अभी रुचि जाग्रत होगी।

* सरल प्रोजेक्ट जैसे *मिश्रण को अलग करना *बिजली के मेंढक का फुदकना *रोबोट का संचालन *कैंडी वॉटर फॉल *दूध का प्लास्टिक बनना
* LED नृत्य ग्लोब आदि का प्रदर्शन निश्चित ही उनके मन में विज्ञान के प्रति अभिरुचि पैदा करेगा।
* विज्ञान से संबंधित आसपास के कल-कारखाने, बांध, बिजली बनाने वाली इकाइयां, पवन चक्कियां एवं फैक्टरियों का भ्रमण करना चाहिए ताकि वे विज्ञान के रहस्य एवं उसकी उपयोगिता को समझ सकें। इन जगहों पर काम करने वाली महिलाओं से भी उनकी मुलाकात करवाना चाहिए जिससे उनके मन में विश्वास बन सके कि वे भी इन क्षेत्रों में अपनी सहभागिता देकर बना सकती हैं।
वैश्वीकरण के इस दौर में समाज, परिवार और तंत्र की मानसिकता में बदलाव आए हैं। पहले की अपेक्षा अधिक संख्या में किशोरियां STEM के क्षेत्र में भागीदार बनी हैं, लेकिन ग्रामीण क्षेत्र में अभी भी बहुत असंतुलन है। शिक्षा तक पहुंच ही इसका हल नहीं है। इसके लिए बहुआयामी योजनाओं के बनाने एवं धरातल पर उनके क्रियान्वयन की आवश्यकता है।

माता-पिता को अपनी मानसिकता में परिवर्तन लाना होगा। उन्हें परिवार में किशोरियों के प्रति पक्षपातपूर्ण व्यवहार बंद करने के लिए शिक्षकों, समाज व तंत्र को सहयोग करना होगा ताकि अधिक से अधिक किशोरियों को इस क्षेत्र में आने के लिए प्रोत्साहित किया जा सके।



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