फिल्म 'बच्चन पांडे' में अपने निगेटिव किरदार को लेकर अक्षय कुमार ने कही यह बात

रूना आशीष| पुनः संशोधित शनिवार, 19 मार्च 2022 (14:23 IST)
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'बच्चन पांडे मेरी एक ऐसी फिल्म है जिसे हर कोई देख सकता है और बहुत हंसते-हंसते सिनेमा हॉल के बाहर निकलेगा। मेरी यह वह फिल्म है जो आप पति-पत्नी, नाना-नानी, दादा-दादी सबके साथ बैठ कर देखिए। खूब मजे लीजिए और हंसते रहिए।' यह कहना है का, जिनकी फिल्म बच्चन पांडे लोगों के सामने होली के अवसर पर रिलीज हो गई है।

फिल्म प्रमोशन के दौरान अक्षय कुमार ने पत्रकारों को बताया, आपने कई फिल्मों में देखा होगा कि अगर कोई नेगेटिव किरदार है, कोई विलेन है तो उसके पीछे कोई कहानी चलती है। कोई उसकी जिंदगी में दुर्घटना हुई होगी और फिर वह गलत राह पर निकल चला या ऐसा हुआ कभी मां के साथ कभी किसी और वजह से उसने हथियार उठा लिया और वह विलेन बन गया।

लेकिन मेरे साथ ऐसा कुछ नहीं होता है। फिल्म में मेरा किरदार बुरा है और वह शुरू से ही बुरा है। उसके पास बुरा बनने का कोई कारण नहीं था वैसा ही है लेकिन एक बात जरूर है कि यह बहुत मसालेदार फिल्म है। आप अगर इसमें कोई सोशल मैसेज सुनने जा रहे हैं तो मत जाइए। अब सिर्फ फिल्म देखने जाइए, एक मसालेदार फिल्म देखने को मिलेगी आपको।
इसी फिल्म प्रमोशन के इंटरव्यू के दौरान भी साथ में ही बैठी थीं। कृति के पांव में चोट आई थीं और जब इसके बारे में पूछा गया तो उन्होंने बताया कि उनके पांव के नाखून में चोट लग गई है। पत्रकारों की बातों का जवाब देते हुए कृति बताती हैं कि पिछली फिल्म मिमी के बाद थोड़े अरसे के बाद अब मैं लोगों के सामने आ रही हूं और अच्छा लग रहा है।

बड़े समय बाद में आज की पीढ़ी की लड़की के रूप में आई हूं और यह जो किरदार है यह बड़ा ही दबंग किस्म की लड़की का है जिसे किसी बात से डर ही नहीं लगता उसे एक डॉक्यूमेंट्री फिल्म बनानी है। वह भी एक ऐसे शख्स पर बनानी है जो कत्ल करते फिरता है।
हिम्मत भरी लड़की का रोल मैंने निभाया है। इतनी हिम्मत वाली तो मैं खुद भी नहीं हूं, लेकिन इस बात की तसल्ली है कि मैं आज की लड़की का किरदार निभा रही हूं। और फिल्म में काम के प्रति कितना सजग दिखाया गया है मुझे कि वह डॉक्यूमेंट्री बनाते-बनाते बागवा जैसी जगह पर पहुंच जाती है और वहां पर अपना काम करती है।

इसी दौरान पास में बैठे अरशद वारसी से वेबदुनिया ने सवाल किया और इसके पहले कि सवाल किया जाता। अरशद ने बाकी सबको सवाल पूछने से रोक दिया और कहां चलिए कोई तो है जो मेरे लिए सवाल पूछ रहा है और अच्छा ही सवाल पूछने वाले हैं, बोलिए।

इस बात पर संवाददाता खुद ही हंस पड़े। और फिर वेबदुनिया संवाददाता ने सवाल पूछा, क्या आपका सीन है जिसमें आपके मुन्ना भाई एमबीबीएस के रोल को भी याद किया गया है, आपको यह सीन करने में कितना मजा आया? जिस पर अरशद बोले कि मुझे मालूम था, यह सवाल आना ही है आपकी तरफ से और सच बोलूं तो लोगों को ऐसे सीन अच्छे लगते हैं। इसके पहले भी गोलमाल में भी करने की कोशिश की थी और मजेदार लगता है।

क्योंकि फिल्म का नाम बच्चन पांडे है। जाहिर है अमिताभ बच्चन साहब की याद आ ही जाती है। अक्षय और अरशद आप बताइए बच्चन साहब की कौन सी बातें आपको बहुत पसंद आती है?
इस सवाल पर अक्षय कुमार ने कहा कि वह 'समय के बहुत धनी है और हमेशा समय की पाबंदी पर बने रहते हैं।' वहीं अरशद वारसी ने कहा कि 'जब एबीसीएल के साथ काम करना शुरू किया था तो बहुत बार होता था कि बच्चन साहब और हम सब लोग बैठ रहे हैं और बातों के ज्ञान भी बांट रहे हैं।

मैं तो बहुत बातों का ध्यान उनका रखता हूं और कोशिश करता हूं कि वह सारी बात मैं अपने आप में उतार लूं। लेकिन एक बात उस दौरान बहुत अच्छी कही थी। उन्होंने मुझे बताया कि सेट पर चाहे कुछ भी हो जाए। आप जब तक खुद अपने शॉट से खुश नहीं हो जाते, संतुष्ट नहीं हो जाते हैं। आप अपने शॉर्टकोड टेक रीटेक देते रहिए। आप देखेंगे, हो सकता किसी कोने में खड़ा कोई मुंह बना रहा हो या फिर कोई स्पॉट बाय कुछ अलग से रिएक्ट कर रहा हो, लेकिन आप उसे साइड में रख देंगे और जब तक आप को खुद को नहीं लगता है कि यह मेरा बेस्ट शॉर्ट मैंने दिया है तब तक आप काम करते रहेंगे।



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