माधुरी दीक्षित की बहन को एक्ट्रेस बनना था, लेकिन माधुरी बन गईं

समय ताम्रकर| Last Updated: शनिवार, 15 मई 2021 (12:12 IST)
हीरोइनों की बात की जाए वो अंतिम हीरोइन हैं जिन्हें ‘स्टार एक्ट्रेस’ कहा जा सकता है। उनके नाम पर टिकट बिकते थे और उस दौर में उनकी फीस सलमान खान से भी ज्यादा थी। हम आपके हैं कौन में माधुरी को सलमान से ज्यादा पैसे मिले थे। ऐसी सफलता बाद में किसी हीरोइन ने नहीं देखी।

माधुरी का अभिनय की दुनिया में आना या हीरोइन बनना महज इत्तफाक था। वे तो हीरोइन बनना भी नहीं चाहती थी। खुद माधुरी के शब्दों में यह एक हादसा था।


बहुत पहले उन्होंने एक किस्सा बताया था कि राजश्री प्रोडक्शन ने अपनी फिल्म ‘अबोध’ के लिए नए चेहरों को आमंत्रित किया था। बहन को हीरोइन बनना था। मजाक-मजाक में दोनों ने एप्लीकेशन ‍‍भिजवा दी। दोनों को इंटरव्यू के लिए बुला लिया गया। माधुरी नहीं जाना चाहती थी, लेकिन बहन की जिद के आगे झुकना पड़ा। इंटरव्यू देने के बाद दोनों इस बात को भूल गई।

अचानक एक दिन माधुरी को संदेश मिला कि वे चुन ली गईं। वे हैरान थीं। उन्हें तो हीरोइन बनना ही नहीं था। चूंकि चुन लिया गया था इसलिए उन्होंने ‘अबोध’ फिल्म साइन कर ली।


अबोध फिल्म पूरी हुई। कुछ शहरों में इसे रिलीज किया गया और यह बुरी तरह फ्लॉप रही। इन्दौर जैसे शहर में यह आलम था कि पहला शो दर्शकों के अभाव में कैंसल कर ‍दिया गया। उन दिनों किसी फिल्म का शो रद्द हो जाना बहुत ही हैरानी वाली बात हुआ करती थी।

अबोध के बाद माधुरी को लगा कि उनका करियर खत्म हो गया। किसी ने उन्हें नोटिस नहीं ‍किया। फिल्म की तो बात ही छोड़िए, किसी को पता ही नहीं चला कि इस नाम की कोई फिल्म भी आई है।


इसी बीच उत्तर दक्षिण नामक फिल्म के लिए हीरोइन ढूंढ रहे थे और उन्हें माधुरी में ‘बात’ नजर आई। उन्होंने माधुरी को साइन कर लिया। यह फिल्म भी नहीं चली, लेकिन अबोध जैसी फ्लॉप नहीं रही।

माधुरी को सुभाष घई ने एक और मौका दिया। राम लखन के लिए साइन किया। सुभाष घई उस समय बड़े नामी निर्देशक थे। उन्होंने माधुरी को दो फिल्म साइन किया तो दूसरे निर्माता-निर्देशकों को लगा कि जरूर इस नई हीरोइन में दम होगा। एन. चंद्रा ने भी यह देखते हुए ‘तेजाब’ के लिए माधुरी को चुन लिया।


तेजाब रिलीज होकर ब्लॉकबस्टर साबित हुई। तीन-चार महीने बाद राम लखन रिलीज हुई और इस फिल्म ने भी बॉक्स ऑफिस पर पैसों की बरसात कर दी। माधुरी को दर्शकों ने खूब पसंद किया। एक-दो-तीन-चार करते हुए वे सफलता के शिखर पर जा पहुंची और फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा।



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