विक्की कौशल की फिल्म 'सरदार उधम' की रिलीज से पहले जानिए सरदार उधम सिंह के बारे में 5 रोचक बातें

Last Updated: बुधवार, 6 अक्टूबर 2021 (15:04 IST)
बॉलीवुड एक्टर की मोस्ट अवेटेड फिल्म 'सरदार उधम' इस दशहरा 16 अक्टूबर को अमेजन प्राइम वीडियो पर रिलीज होने जा रही है। इस फिल्म को लेकर प्रशंसकों की जिज्ञासा अपने चरम पर है क्योंकि फिल्म दिवंगत स्वतंत्रता सेनानी सिंह की कहानी पर आधारित है।


शूजीत सरकार द्वारा निर्देशित, फिल्म में विक्की कौशल मुख्य भूमिका में हैं और इसमें शॉन स्कॉट, स्टीफन होगन, बनिता संधू और कर्स्टी एवर्टन भी हैं। फिल्म में अभिनेता अमोल पाराशर की भी विशेष भूमिका है। उससे पहले सरदार उधम सिंह के बारे में जाने कुछ कम ज्ञात तथ्य हैं, जिन्हें आपको 16 अक्टूबर, 2021 को अमेजन प्राइम वीडियो पर रिलीज होने वाली इस फिल्म को देखने से पहले जानना चाहिए।
जलियांवाला बाग हत्याकांड का प्रभाव -
13 अप्रैल, 1919 को अमृतसर के जलियांवाला बाग में घटी घटना भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के पन्नों की एक दुखद घटना है, जिसमें कई बेगुनाहों की जान चली गई थी और कई घायल हो गए थे। यह घटना हमारे देश के स्वतंत्रता आंदोलन में पहला झटका थी और अंग्रेजों के साथ सहयोग नहीं करने पर आंख खोलने वाली घटना थी। इस हत्याकांड ने सरदार उधम सिंह को गहराई से प्रभावित किया और उन्होंने अपने साथी देशवासियों की मौत का बदला लेने का संकल्प लिया। महज 20 साल की उम्र में उन्होंने इसे अपना एकमात्र मिशन बना लिया और इस दिशा में काम करना शुरू कर दिया।

उधम और भगत सिंह की दोस्ती-
सरदार उधम सिंह के सबसे महान सहयोगियों में से एक शहीद भगत सिंह थे। उधम सिंह ने भगत सिंह से जेल में मुलाकात की और भगत को अपना 'गुरु' कहा। उधम पर भगत सिंह का प्रभाव शक्तिशाली और चिरस्थायी दोनों था। वह भगत की नास्तिकता से प्रभावित थे। उन्होंने भगत सिंह के कदमों पर चलना शुरू किया और देश की आजादी के लिए उनके जैसे ही जोश और जुनून के साथ संघर्ष किया।

कई भूमिका निभाना और विभिन्न व्यवसायों का अभ्यास करना-
उधम सिंह में दुनिया भर में यात्रा करने के लिए विभिन्न पहचानों को छिपाने और अनुकूलित करने की क्षमता थी, जिसके जरिए वह कैक्सटन हॉल के उस एक द्वार को पार करने और अनगिनत निर्दोष भारतीय आत्माओं की मौत का बदला लेने वाले थे। जब विभिन्न व्यक्तित्वों को श्रेष्ठ बनाने की बात आती है तो वह एक परफेक्शनिस्ट थे। एक कारण यह हो सकता है कि वह हर बार इसे एक अभिनेता के रूप में अपने अनुभव से प्राप्त करने में सफल रहे।

उन्होंने एलीफेंट बॉय (1937) के सेट पर एक एक्स्ट्रा के रूप में काम किया था। वह एक बहु-प्रतिभाशाली व्यक्ति थे, जिन्होंने समय के साथ एक साइनबोर्ड पेंटर, कारपेंटर, एक कारखाने में वेल्डर, लॉन्जरी सेल्समेन से ले कर शिपिंग जहाज पर एक नाविक के रूप में विभिन्न कौशलों को अनुकूलित किया था।

इंतजार खत्म हुआ-
13 मार्च 1940 को, सरदार उधम सिंह ने ईस्ट इंडिया एसोसिएशन और कैक्सटन हिल में द रॉयल सेंट्रल एशियन सोसाइटी की एक बैठक में माइकल ओडायर को गोली मार दी। उन्होंने अपनी डायरी से रिवॉल्वर निकालकर जनरल डायर पर गोली चला दी। उन्होंने दुनिया के सामने ऐसा इसलिए किया क्योंकि वह एक संदेश देना चाहते थे, वह चाहते थे कि यह एक ऐसी घटना हो जो लोगों को क्रांति की याद दिलाए और दुनिया को भारत की सबसे बड़ी त्रासदी को कभी नहीं भूलना चाहिए। जब वह पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए तो वह शांत थे और धैर्यपूर्वक प्रतीक्षा कर रहे थे। उन्हें ब्रिक्सटन जेल में कैद किया गया था।

एकता का प्रतीक-
अपने कारावास के दौरान उन्होंने अंग्रेजों से लड़ने के लिए भारत में धार्मिक एकता की शक्ति और आवश्यकता के प्रतीक के रूप में 36 दिनों की भूख हड़ताल की थी। उनका उपवास एक शक्तिशाली संदेश था और भारत के तीन प्रमुख धर्मों (हिंदू, मुस्लिम और सिख) को एक बनने और अपनी मातृभूमि की स्वतंत्रता के लिए लड़ने का आग्रह था। उन्होंने हिरासत में रहते हुए व एकता में अपने विश्वास को प्रदर्शित करते हुए और उपनिवेश विरोधी भावनाओं को नकारते हुए, खुद को 'राम मोहम्मद सिंह आजाद' के रूप में पहचाना।

सरदार उधम सिंह की बहादुरी और भारतीय स्वतंत्रता के लिए लड़ने का जुनून आज भी हमें प्रेरित करता है। 16 अक्टूबर को अमेज़न प्राइम वीडियो पर अमेज़न ओरिजिनल मूवी सरदार उधम प्रीमियर के रूप में स्क्रीन पर उनकी असाधारण यात्रा देखने के लिए तैयार हो जाइए।




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