बिहार में नहीं चला 'मोदी मैजिक', हार के 10 बड़े कारण

Last Updated: रविवार, 8 नवंबर 2015 (13:14 IST)
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पहले ‍दिल्ली विधानसभा चुनाव फिर बिहार चुनाव में करारी हार ने साबित कर दिया है कि नरेन्द्र मोदी का तिलिस्म टूट रहा है। अमेरिका के मेडिसन स्क्वेयर पर भले ही वे कितनी भी भीड़ जुटा लें, विदेशी मीडिया में कितनी ही सुर्खियां बटोर लें, लेकिन जब वोट की बात आती है तो देश की जनता के सामने ही झोली पसारना पड़ती है। अपने विदेशी दौरों पर फूलकर कुप्पा हुए मोदी लगता है अपने ही बिहार के लोगों की नब्ज को समझने में नाकाम रहे हैं। आइए जानते हैं बिहार में या फिर भाजपा की हार के बड़े कारण....
नरेन्द्र मोदी का टूटता तिलिस्म : इस चुनाव परिणाम का सबसे ज्यादा प्रभाव यदि किसी व्यक्ति पर पड़ा है तो वह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की छवि पर। बिहार चुनाव में भाजपा की करारी हार से देश और दुनिया में यह संदेश जरूर गया है कि मोदी का तिलिस्म टूट रहा है। जिस उम्मीद के साथ लोगों ने उन्हें लोकसभा में भारी बहुमत दिया था, लगता है वह उम्मीद अब टूट रही है, क्योंकि इस चुनाव में मुकाबला एनडीए और महागठबंधन में न होकर नरेन्द्र मोदी और नीतीश कुमार के बीच था। दूसरी ओर मोदी के धुआंधार प्रचार के बावजूद भाजपा इस चुनाव में बहुमत के लायक सीटें नहीं जुटा सकी। हालांकि अब यह भी माना जा रहा है कि नरेन्द्र मोदी के आक्रामक चुनाव प्रचार और ज्यादा सभाओं का नकारात्मक असर ही हुआ। 
 
महंगाई मार गई : बिहार में एनडीए की हार में एक बड़ा कारण रहा खाद्य पदार्थों की महंगाई। हम सबको याद होंगे लोकसभा चुनाव में नरेन्द्र मोदी के वे भाषण जिनमें वे ऊंची आवाज में कहा करते थे कि गरीबी की थाली से दाल गायब हो रही है, तब दाल के भाव 70-80 रुपए के आसपास थे, जबकि आज ये भाव 150 रुपए से ऊपर निकल गए हैं। यह भी ध्यान रखने वाली बात है कि मोदी ने एक बार भी अपने भाषण में महंगाई की बात नहीं की। यह भी नहीं भूलना चाहिए कि वोट के लिए ‍निकलने वाला वर्ग वही है जो महंगाई से सबसे ज्यादा प्रभावित होता है।  अगले पन्ने पर, भारी पड़ा बिहारी का मुद्दा... 
 
 



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