कर्नाटक का बिटक्वाइन स्कैमः मुख्यमंत्री बोम्मई क्यों हैं परेशान?

BBC Hindi| पुनः संशोधित शनिवार, 20 नवंबर 2021 (07:44 IST)
भारत के पहले बिटक्वाइन घोटाले के केंद्र में एक 25 साल का हैकर में बसावराज बोम्मई की सरकार के लिए चुनौती बन गया है। बोम्मई को पार्टी के भीतर और बाहर दोनों तरफ़ से चुनौती मिल रही है।
श्रीकृष्ण रमेश उर्फ़ सिर्की पर आरोप है कि उन्होंने बिटक्वाइन एक्सचेंज, पोकर गेम वेबसाइट और कर्नाटक सरकार के ई-शासन विभाग की ई-ख़रीद वेबसाइटों को हैक किया है। सिर्की का कहना है कि उन्होंने अपने स्कूल की पढ़ाई के दौरान हैकिंग सीखी थी।

पुलिस को अपनी मर्जी से दिए इकबालिया बयान में सिर्की ने कहा है कि उन्होंने साल 2015 में हॉन्ग कॉन्ग के बिटफाइनेक्स क्रिप्टोकरंसी एक्सचेंज को हैक कर लिया था। इस एक्सचेंज से अगस्त 2016 में 1,19,756 बिटक्वाइन चोरी हुए थे। इससे एक साल पहले ही सिर्की ने इसे हैक कर लिया था।
कृष्णा ड्रग्स से जुड़े मामलों में कई बार जेल जा चुके हैं। ऐसे ही एक मामले में वो एक सप्ताह पहले जेल से छूटकर आए हैं। लेकिन कर्नाटक जांच एजेंसी को दिए उनके बयानों और जांच की रफ़्तार ने मुख्यमंत्री बोम्मई और विपक्षी कांग्रेस के बीच राजनीतिक जंग शुरू कर दी है।

पुलिस का कहना है कि कृष्णा ने जो दावे किए हैं, उनकी पुष्टि नहीं हो सकी है। जांच से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी ने अपना नाम न सार्वजनिक करते हए बीबीसी हिंदी से कहा है कि उनके दावों की पुष्टि मुश्किल है।
रिपोर्टों के मुताबिक़ मुख्यममंत्री बसावराज बोम्मई ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से शिकायत की है कि राज्य में पार्टी के लोग उन्हों बिटक्वाइन स्कैम में परेशान कर रहे हैं।

रिपोर्टों के मुताबिक़ पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने इस संबंध में पार्टी की प्रांतीय यूनिट से रिपोर्ट मांगी है। बीजेपी के किसी पदाधिकारी ने अधिकारिक तौर पर इन रिपोर्टों का खंडन नहीं किया है।
वहीं कांग्रेस का आरोप है कि बीजेपी इस मामले की जाँच को ठंडे बस्ते में डाल रही है। कांग्रेस विधायक प्रियांक खड़गे ने बीबीसी से कहा, "ये पुलिस जांच कुछ ऊंचे लोगों को बचाने के लिए है। सुप्रीम कोर्ट के जज की निगरानी में हुई जांच ही सच को सामने ला सकेगी।"

श्री कृष्णा की भूमिका
पुलिस अधिकारी मानते हैं कि श्री कृष्णा के पास हैकिंग का बेहतरीन कौशल है। चीफ़ मेट्रोपॉलिटन मैजिस्ट्रेट के सामने दिए बयान में कृष्णा ने स्वीकार किया है कि उन्होंने चौथी क्लास से ही हैकिंग सीखनी शुरू कर दी थी और बाद में साइबर अपराधों में ये उनके काम आई।
कृष्णा का कहना है कि चौथी क्लास से दसवीं क्लास के बीच वो ब्लैकचैट हैकरों के समूह से जुड़े, जहाँ उन्होंने हैकिंग करने और फिर इससे पैसा कमाने के तरीक़े सीखे।

इसके बाद श्रीकृष्णा ने बेंगलुरु के एक कॉलेज से पढ़ाई की और फिर वो नीदरलैंड्स चले गए। उन्होंने वेबसाइटों में घुसने का अनुभव लिया। इनमें बिटक्वाइन की वो एक्सचेंज भी शामिल थीं, जहाँ पैसों के बदले बिटक्वाइन का लेनदेन होता है।
कृष्णा का दावा है कि उनका अपना कोई बैंक अकाउंट नहीं है और पश्चिम बंगाल के उनके दोस्त रोबिन खंडेलवाल उनके पैसे का हिसाब रखते थे। उनका दावा है कि उन्होंने को आठ करोड़ रुपए क़ीमत के बिटक्वाइन दिए हैं।

पुलिस सूत्रों के मुताबिक़ कृष्णा के दोस्त उन्हें कई-कई दिनों तक टॉप होटलों में रखते थे, जहां बैठकर वो पोकर वेबसाइटों को हैक करते थे ताकि उनके दोस्त कार्ड गेम जीत सकें।
कृष्णा का दावा है कि वो हॉन्ग कॉन्ग की बिटक्वाइन एक्सचेंज बिटफाइनेक्स को हैक करने वाले पहले लोगों में शामिल हैं। उनका कहना है कि उन्होंने यहाँ से दो हज़ार बिटक्वाइन चुराए थे। उस समय एक बिटक्वाइन की क़ीमत सौ से दो सौ डॉलर तक थी। उनका कहना है कि उन्होंने लग्ज़री होटलों में रहकर ये पैसा उड़ा दिया।

बेंगलुरु के एक मॉल के रेस्त्रा में हुई लड़ाई के बाद कृष्णा का नाम पुलिस के सामने पहली बार आया था। इसे फ़र्ज़ी कैफे केस कहा जाता है, जहां कांग्रेस के विधायक एनए हरीस के बेटे मोहम्मद नालापड़ ने एक प्रभावशाली परिवार से संबंध रखने वाले विद्वत नाम के युवक पर हमला कर दिया था।
उस समय कैफे में कई राजनीतिक परिवारों से जुड़े बच्चे भी थे, जिनका नाम इस केस में आया था। चीफ़ मेट्रोपॉलिटन मैजिस्ट्रेट के सामने दिए बयान में कृष्णा ने कहा है कि नीदरलैंड्स से लौटने के बाद वो जिन लोगों के संपर्क में था, उनमें नालापड़ भी शामिल थे।

इस मामले के कई अभियुक्तों में श्रीकृष्णा का भी नाम था लेकिन वो अग्रिम ज़मानत मिलने के बाद ही शहर लौटा था। श्रीकृष्णा उत्तर भारत के शहरों में घूमता रहा और गिरफ्तारी से बचता रहा। इसके बाद कृष्णा का नाम चर्चा में तब आया जब वो नवंबर 2020 में डार्कनेट के ज़रिए मंगाए गए ड्रग्स के साथ पकड़ा गया।
ड्रग केस की पूछताछ के दौरान ही कृष्णा ने अपनी हैकिंग कुशलता और लाइफस्टाइल के बारे में बताया। कृष्णा के इसी कबूलनामे से पुलिस को 2019 में ई-ख़रीद वेबसाइट में हुए 11।5 करोड़ के घोटाले की भनक लगी। हैकरों ने नीलामी लगाने वालों की तरफ़ से जमा किए गए 11।5 करोड़ रुपए हैक करके चुरा लिए थे।

इस मामले की जाच अब ईडी कर रही है। जांच में पता चला की ई-शासन विभाग की वेबसाइट से चुराया गया पैसा यूपी के बुलंदशहर स्थित एक कंपनी से जुड़े 14 बैंक खातों में रखा था। निम्मी इंटरप्राइजेज़ के अलावा ये पैसा उदय ग्राम विकास संस्था, नागपुर के खाते में भी था।
एक पुलिस अधिकारी अपना नाम न ज़ाहिर करते हुए कहते हैं कि ये पैसे को ठिकाने लगाने की किसी विस्तृत योजना का हिस्सा लगता है। इससे पुलिस को ये भी शक होता है कि श्री कृष्णा जैसे हैकर के साथ किया गया बिटक्वाइन स्कैम किसी राजनीतिक वर्ग का सभी को ख़ुश रखने की कोशिश का हिस्सा है।

राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप
बिटक्वाइन स्कैम को लेकर राजनीतिक बयानबाज़ी शुरू हुई विपक्ष और कांग्रेस के नेता सिद्धारमैया के सोशल मीडिया पर पोस्ट किए बयान से। सिद्धारमैया ने आरोप लगाया कि कई बड़े नेता बिटक्वाइन स्कैम में शामिल हैं।
उन्होंने दावा किया कि मामले के बंद करके राजनेताओं को फ़ायदा पहुँचाने के प्रयास किए गए। मुख्यमंत्री और सिद्धारमैया के बीच शुरू हुई बयानबाज़ी के बीच सिद्धारमैया ने सिटी क्राइम ब्रांच की तरफ़ से एक चार्ज़शीट में पेश किए गए पाँच हज़ार बिटक्वाइन का सवाल उठाया।

शुरुआत में बोम्मई ने कहा कि मामले को ईडी और सीबीआई के पास भेजा जा रहा है। बाद में उन्होंने कहा कि कांग्रेस और जेडीएस की पूर्ववर्ती सरकार ने ही कृष्णा को रिहा किया था। सिद्धारमैया ने बीबीसी से बात करते हुए इन आरोपों को ख़ारिज किया है।
इस मामले में हैरानी वाली बात ये है कि सत्ताधारी बीजेपी के नेताओं ने मुख्यमंत्री का बचाव नहीं किया है। जिन कुछ नेताओं ने मुँह खोला भी उनमें वो मंत्री शामिल हैं जो कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में आए थे और कांग्रेस-जेडीएस की सरकार गिरा दी थी। राजस्व मंत्री अशोक आर ने भी मुख्यमंत्री का समर्थन किया है।

प्रियांक सवाल करते हैं, "बीजेपी के राज्य प्रमुख नवीन कुमार कतील हर छोटे-बड़े मुद्दे पर बयान जारी करते हैं लेकिन अभी तक इस मामले में ख़ामोश हैं।"
पिछले सप्ताह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाक़ात के बाद बोम्मई ने कहा था कि वो बिटक्वाइन मुद्दे को लेकर बहुत चिंतित नहीं हैं।

हालांकि सिद्धारमैया का कहना है कि हम नहीं जानते की बोम्मई बिटक्वाइन स्कैम में शामिल हैं या नहीं। हम सिर्फ़ ये कह रहे हैं कि इसकी सही से जांच हो और दोषी को सज़ा दी जाए। सिद्धारमैया, कांग्रेस प्रांत प्रमुख डीके शिवकुमार और विधायक प्रियांक खड़के जांच के तरीक़े पर सवाल उठा रहे हैं।
सिद्धारमैया कहते हैं, "पुलिस ने प्रेसवार्ता की और दावा किया कि उन्हें सिर्की से नौ करोड़ रुपए क़ीमत के बिटक्वाइन मिले हैं। बोम्मई उस समय गृहमंत्री थे, उन्हें बताना चाहिए कि उन 31 बिटक्वाइन का क्या हुआ। अभी एक बिटक्वाइन पचास लाख रुपए के क़रीब का है।"

कर्नाटक बीजेपी के प्रवक्ता कैप्टन गणेश कर्णिक ने बीबीसी से कहा, "बीजेपी इस मामले की जांच को लेकर बहुत गंभीर है। किसी को बचाने या कोई तथ्य छुपाने की कोई ज़रूरत ही नहीं है। आपको याद करना चाहिए कि जेडीएस के नेता एचडी कुमारास्वामी ने कहा था कि फ़र्ज़ी कैफे मामले का बिटक्वाइन से कुछ ना कुछ लेना-देना है।"
कर्णिक कहते हैं कि जैसे ही मुख्यमंत्री ने ये मुद्दा उठाया प्रधानमंत्री ने क्रिप्टेकरेंसी के मुद्दे पर बैठक की है।

पुलिस जांच पर सवाल
इसी बीच बेंगलुरु पुलिस ने ग़ायब हुए 31 बिटक्वाइन से जुड़े सभी आरोपों को ख़ारिज किया है। एक बयान में पुलिस कमिश्नर ने कमल पंत ने कहा है कि ना ही श्री कृष्णा के अकाउंट से कुछ बिटक्वाइन ट्रांस्फर किए गए थे और ना ही कोई बिटक्वाइन खोया है।
बीते साल दिसंबर में सरकार ने पुलिस को क्रिप्टोकरेंसी अकाउंट खोलने की अनुमति दी थी। श्री कृष्णा ने एक बिटक्वाइन अकाउंट वॉलेट दिखाया था, जिसमें 31।08 बिटक्वाइन थे। लेकिन जब बिटक्वाइन को निकालने के प्रयास किए गए तो पता चला कि उसमें 186।811 बिटक्वाइन थे।

पुलिस के बयान में कहा गया, "साइबर विशेषज्ञों की राय है कि जो अकाउंट अभियुक्त ने अपना बताया था वो किसी एक्सचेंज का लाइव अकाउंट था और अभियुक्त के पास उसे खोलने की कुंजी नहीं थी।"
पुलिस ने साइबर विशेषज्ञों के हवाले से कहा है कि श्री कृष्णा ने जो दावे किए उनकी पुष्टी नहीं की जा सकती है।

पुलिस के बयान में कहा गया है कि अभी तक किसी विदेशी एजेंसी या कंपनी ने हैकिंग को लेकर बेंगलुरु पुलिस से कोई संपर्क नहीं किया है। पुलिस का कहना है कि बिटफाइनेक्स एक्सचेंज ने ना ही कथित हैकिंग के बारे में कोई जानकारी साझा की है और ना ही पुलिस से कोई संपर्क करके कोई जानकारी मांगी है।
पुलिस का कहना है कि अभियुक्त ने क्रिप्टोकरेंसी वेबसाइटों को हैक करने का दावा किया था, इसलिए अप्रैल 2021 में उनके मामले को सीबीआई के इंटरपोल के साथ काम करने वाले अधिकारियों को भी भेजा गया था।

लेकिन प्रियांक खड़गे एक सवाल उठाते हुए कहते हैं, "जो मामला इंटरपोल को भेजा गया है वो सिर्फ़ 23 हज़ार रुपए का है। अब पुलिस का कहना है कि केस संख्या ग़लत हो गई थी, लेकिन पुलिस को यह छह महीने बाद तब पता चला जब हमने सवाल उठाया।"
वो कहते हैं, "हम ये मानते हैं कि ये जांच बड़े लोगों को बचाने के लिए हैं। जब तक सुप्रीम कोर्ट के जज की निगरानी में जांच नहीं होगी, सच सामने नहीं आएगा।"

अनियंत्रित अघोषित इलाक़ा है बिटक्वाइन
बेंगुलुरु की सिक्यॉरिटी कंसलटेंसी के संस्थापक शशिधर सीएन कहते हैं कि तकनीकी रूप से कहा जाए तो बिटक्वाइन एक ऐसा इलाक़ा है, जिस पर ना किसी का नियंत्रण है और ना वहां कोई क़ानून है।
शशिधर कहते हैं, "यहाँ आप बिल्कुल अज्ञात रह सकते हैं। कोई भी बिना अपनी पहचान ज़ाहिर करे बिटक्वाइन ख़रीद और बेच सकता है। इसलिए इसका इस्तेमाल पैसे को इधर-उधर भेजने और आपराधिक गतिविधियों में किया जाता है। ये हवाला रैकेट की तरह है। इसका इस्तेमाल ड्रग्स और आपराधिक गतिविधियों के पैसों के लेनदेन में किया जा सकता है। इसकी सबसे चिंताजनक बात ये है कि ये बैंकिंग व्यवस्था के दायरे से बाहर काम करता है और यही सरकारों का सिरदर्द भी है।"
ऐसे में पुलिस कैसे पता कर सकती है कि श्री कृष्णा के दावे सहीं हैं या ग़लत?

शशिधर कहते हैं, "उनकी सभी गतिविधियों के रिकॉर्ड हासिल किए जा सकते हैं क्योंकि उन्होंने जो भी कुछ किया होगा इंटरनेट के ज़रिए ही किया होगा। हर ऑनलाइन गतिविधि का ट्रेल छूट जाता है, ऐसे में उसकी गतिविधियों को रिकंस्ट्रक्ट किया जा सकता है। पुलिस के बयान से एक सवाल खड़ा होता है कि क्या पुलिस ने बिटक्वाइन एक्सचेंज और दूसरे पक्षों से ये पता करने की कोशिश की कि क्या उन पर भारत से कोई हैकिंग हमला हुआ था। पुलिस सिर्फ़ इस बात पर हैरान है कि अभी तक उन्होंने उससे संपर्क क्यों नहीं किया है।"
क्या कहना है श्री कृष्णा का?
श्री कृष्ण एक अस्पताल के पास पाँच सितारा होटल में रह रहे थे। उनके पिता का अस्पताल में इलाज चल रहा था। पब में हुई घटना के बाद उन्हें गिरफ्तार किया गया था। छूटने के बाद उन्होंने पत्रकारों से कहा था कि "ये सब बकवास और फ़र्ज़ी ख़बरें हैं। मुझे इस बारे में कुछ पता नहीं है।"

अब आगे क्या?
अपनी पहचान न ज़ाहिर करने की शर्त पर बीबीसी से बात करने वाले एक बीजेपी नेता का कहना था कि श्री कृष्णा सिर्फ़ एक ज़रिया है जिसका अमीर, प्रभावशाली और राजनीतिक लोग इस्तेमाल कर रहे हैं।
वो कहते हैं, जहाँ आग होती है, वहीं धुआं उठता है। अब देखना ये है कि ये आग कहाँ तक फैली है। अभी किसी को नहीं पता है कि ये मामला कितना बड़ा है।

अभी ये कहना मुश्किल है कि श्री कृष्णा का ये मामला कहाँ तक पहुँचेगा और इसके क्या राजनीतिक नतीजे होते हो सकते हैं। लेकिन बीजेपी में जितने भी लोगों से हमने बात की भी की राय लगभग एक जैसी ही थी कि ''अमित शाह जी जानते हैं और किसी को नहीं पता कि वो कब चोट कर दें।''

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