'कांग्रेस की हार देखकर मेरा दिल रो रहा है', पार्टी नेताओं ने हार पर उठाए सवाल

BBC Hindi| पुनः संशोधित शुक्रवार, 11 मार्च 2022 (10:46 IST)
5 राज्यों के विधानसभा चुनाव के बाद केवल 2 राज्यों राजस्थान और छत्तीसगढ़ तक सिमट कर रह गई है। जबकि मई 2014 के लोकसभा चुनाव में जब पीएम मोदी सत्ता में आए थे तब कांग्रेस शासित राज्यों की संख्या 9 थी। वहीं, पार्टी 2014 के बाद से 45 में से सिर्फ़ 5 चुनाव जीत पाई है।
 
इन नतीजों ने कांग्रेस की विश्वसनीयता और नेतृत्व पर फिर से सवाल खड़ा कर दिया है। ये सवाल बाहर से नहीं बल्कि पार्टी के अंदर से ही उठाए जाने लगे हैं। अंग्रेज़ी अख़बार द इंडियन एक्सप्रेस ने कांग्रेस के प्रदर्शन पर पार्टी नेताओं से बात की है जिसमें उन्होंने आंतरिक कलह और नेतृत्व की कमी पर सवाल उठाए हैं।
 
कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने इस बात के संकेत दिए थे कि आगे की योजनाओं पर चर्चा के लिए जल्द ही पार्टी की कार्यकारी समिति की बैठक होगी। लेकिन, कई नेता इसे लेकर आश्वस्त नहीं हैं। कुछ युवा नेता पंजाब में आम आदमी पार्टी की जीत को देखते हुए कहते हैं कि 'पुराने और थक चुके नेताओं' को नए लोगों के लिए रास्ता बनाने की ज़रूरत है।
 
पर पार्टी के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आज़ाद ने कहा कि मैं हैरान हूं, पार्टी की हार देख कर मेरा दिल रो रहा है। हमने पार्टी को अपनी पूरी ज़िंदगी और जवानी दी है। मुझे भरोसा है कि पार्टी का नेतृत्व सभी कमज़ोरियों और कमियों पर ध्यान देगा जो मैं और मेरे साथी पिछले कुछ समय से उठा रहे हैं।
 
वहीं, वरिष्ठ नेता शशि थरूर ने भी नेतृत्व में सुधार की मांग दोहराई। उन्होंने ट्वीट किया, ''जो भी कांग्रेस पर भरोसा रखते हैं उन्हें चुनावी नतीजों से दुख हुआ है। ये भारत के उस विचार को मज़बूत करने का समय है जिसके लिए कांग्रेस खड़ी है और देश को सकारात्मक एजेंडा देती है। ये हमारे संगठनात्मक नेतृत्व को इस तरह सुधारने का समय है जो उन विचारों में फिर से जान भर दे और लोगों को प्रेरित करे। एक बात साफ़ है- सफ़ल होने के लिए परिवर्तन अनिवार्य है।''
 
अख़बार ने सूत्रों के हवाले से लिखा है कि आगे की योजना के लिए 'जी-23' नेता गुलाम नबी आज़ाद के घर पर बैठक करने वाले हैं। सूत्र के मुताबिक़ फ़िलहाल सबसे बड़ी चिंता ये जताई गई है कि पार्टी को अंदरूनी झगड़ों और विभाजन से बचाकर एकजुट रखा जाए।
 
एक युवा कांग्रेस नेता ने कहा, ''हम बार-बार ये नहीं बोल सकते कि बीजेपी हिंदू-मुस्लिम करके जीत जाती है। अगर हम ऐसा सोचते हैं तो हम ख़ुद को बहका रहे हैं। पंजाब में मुसलमान कहां थे? उत्तराखंड, मणिपुर और गोवा में कहां थे? हमारे नेतृत्व ने विश्वसनीयता खो दी है। हमें ये स्वीकार करना चाहिए।''
 
एक अन्य नेता ने कहा, ''प्रियंका गांधी वाड्रा ने अकेले ही यूपी में 209 रैलियां और रोड शो किए हैं। वो और राहुल गांधी हाथरस गए, लखीमपुर खीरी का मामला उठाया। लेकिन, कुछ काम नहीं आया। जातिगत और धार्मिक ध्रुवीकरण को देखते हुए हम यूपी में बहुत कुछ नहीं कर सकते थे। ऐसे में महिला केंद्रित अभियान चलाया गया। लेकिन, इससे कुछ नहीं हुआ। ये दुख की बात है कि हम और हमारे नेता विश्वसनीयता खो चुके हैं जिससे हमारी बात लोगों तक नहीं पहुंच पाती।''
 
'पंजाब में नेतृत्व ने दखल नहीं दिया'
एक अन्य नेता ने कहा कि पंजाब के बाद अब कांग्रेस को हिमाचल प्रदेश में आम आदमी पार्टी से चुनौती मिल सकती है। उन्होंने कहा, ''हिमाचल की पंजाब की सीमा से लगती कई सीटें हैं। उन पर असर पड़ सकता है। हमारे कई नेता और विधायक पार्टी छोड़ सकते हैं। क्या नेतृत्व इस चुनौती से वाकिफ़ है? क्या वो कुछ कर रहे हैं? मुझे वाक़ई नहीं पता।''
 
महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चौहान ने कहा, ''हमने इस हार की उम्मीद नहीं की थी। ये बहुत निराशाजनक और दुखी करने वाला है। सब कुछ ग़लत हुआ है। गंभीरता से चुनाव लड़ने का इरादा ही नहीं था। हमें नरेंद्र मोदी और अमित शाह की तरह पूरी ताकत से लड़ना चाहिए था। बदले हुए नेतृत्व को लेकर पार्टी में उलझन थी। हमारी पारी ख़त्म हो गई है लेकिन आने वाले कांग्रेस नेताओं का भविष्य दांव पर है।''
 
कई नेताओं ने इस पर भी सवाल उठाए कि पंजाब में जिस तरह से मुख्यमंत्री को हटाया गया और नवजोत सिंह सिद्धू ने पार्टी का ही विरोध किया, उसमें नेतृत्व ने कोई दखल नहीं दिया।
 
आधिकारिक तौर पर कांग्रेस ने कहा है कि पार्टी को उत्तराखंड, पंजाब और गोवा में बेहतर नतीजों की उम्मीद थी। पार्टी के प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा कि लोगों के जीवन को प्रभावित करने वाले मूल मुद्दों की जगह भावनात्मक मुद्दों ने ले ली है।
 
उन्होंने कांग्रेस के अपने साथियों से भी कहा, ''जिस डाल पर हमें बैठे हैं अगर उसी को काटेंगे तो पेड़, डाल और नेता सभी नीचे गिर जाएंगे। जैसा कि कुछ राज्यों में हुआ है। हर एक को इस सवाल पर विचार करना चाहिए।''
 
'कांग्रेस टीएमसी का हिस्सा बन जाए'
पांच राज्यों में कांग्रेस की हार के बाद तृणमूल कांग्रेस ने एक बार फिर पार्टी पर निशाना साधा है। द इंडियन एक्सप्रेस की ख़बर के मुताबिक़ टीएमसी ने कहा कि कांग्रेस, बीजेपी को राष्ट्रीय स्तर पर चुनौती देने में विफ़ल हुई है।
 
टीएमसी नेताओं ने कहा कि कांग्रेस को टीएमसी में शामिल हो जाना चाहिए और कांग्रेस नेताओं को टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी के नेतृत्व को स्वीकार करना चाहिए क्योंकि वो ही हैं जो बीजेपी को हरा सकती हैं।
 
टीएमसी सरकार में मंत्री फ़िरहाद हाकिम ने कहा, ''मुझे समझ नहीं आता कि कांग्रेस जैसी पुरानी पार्टी ग़ायब क्यों हो रही है। हम भी इस पार्टी का हिस्सा रहे हैं। कांग्रेस को टीएमसी में शामिल हो जाना चाहिए। यही सही समय है। तब हम राष्ट्रीय स्तर पर महात्मा गांधी और सुभाष चंद्र बोस के सिद्धांतों के साथ गोडसे के सिद्धांतों से लड़ सकते हैं।''
 
बीजेपी का ममता बनर्जी पर निशाना
वहीं, बीजेपी ने चार राज्यों में जीत के बाद पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को निशाने पर लिया है। बीजेपी नेताओं ने कहा कि ममता बनर्जी का 2024 के लोकसभा चुनाव में मोदी सरकार को हराने का सपना टूट गया।
 
अंग्रेज़ी अख़बार हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक़, बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष सुकांता मजूमदार ने कहा, ''जो सोचते थे कि मुख्यमंत्री कल प्रधानमंत्री बन सकता है, उन्हें करारा जवाब मिला है।''
 
बीजेपी नेताओं ने टीएमसी के गोवा में प्रदर्शन और अखिलेश यादव के लिए प्रचार करने पर भी चुटकियां लीं। गोवा में टीएमसी पहली बार चुनाव लड़ रही थी और पार्टी एक भी सीट नहीं जीत पाई।
 
बीजेपी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष दिलीप घोष ने कहा, ''अपने दौरों में ग़लत हिंदी में भाषण देकर ममता बनर्जी ने अखिलेश यादव का नुक़सान कराया है।''
 
इन बयानों का जवाब देते हुए टीएमसी के राज्य महासचिव कुणाल घोष ने कहा, ''पार्टी ने तीन महीने पहले ही गोवा में संगठन बनाना शुरू किया था। हमने वहां अपना सर्वोच्च किया। वहीं, यूपी में समाजवादी पार्टी ने अपनी सीटें बढ़ाई हैं। इन नतीजों का लोकसभा चुनाव पर कोई असर नहीं होगा।''
 
आप की जीत असाधारण, लेकिन ये राजनीतिक दुर्दशा है: योगेंद्र यादव
अंग्रेज़ी अख़बार द हिंदू ने आम आदमी पार्टी की पंजाब में जीत पर 'स्वराज इंडिया' के अध्यक्ष और आप के पूर्व नेता योगेंद्र यादव से बात की। उन्होंने कहा कि पंजाब में पार्टी का प्रदर्शन ''शानदार और असाधारण'' है, लेकिन ये चुनाव में पार्टी की सफलता से ज़्यादा पूरे राजनीतिक सिस्टम की दुर्दशा है।
 
योगेंद्र यादव ने कहा कि पंजाब के लोगों ने आम आदमी पार्टी को इसलिए वोट दिया क्योंकि वो ख़ुद को ''एकमात्र राजनीतिक विकल्प'' दिखाने में सफल हुई।
 
उन्होंने पार्टी के सामने मौजूद चुनौतियों का भी ज़िक्र किया। योगेंद्र यादव ने कहा कि पार्टी को ''संघवाद को समझना होगा और क्षेत्रीय भावनाओं का सम्मान करना होगा'' क्योंकि पंजाब केंद्र या ''दिल्ली दरबार'' के नियंत्रण को हमेशा ख़ारिज करता आया है। आम आदमी पार्टी 'दिल्ली दरबार' है और ये दिल्ली से नियंत्रित होती है।
 
योगेंद्र यादव ने कहा कि ''पंजाब में पिछले पांच सालों तक आप में अंदरूनी कलह ही चलती रही, उसके नेता पार्टी छोड़कर गए हैं और उसने कोई आंदोलन या विरोध प्रदर्शन खड़ा नहीं किया है। उसने विपक्ष की ही भूमिका नहीं निभाई है।''

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