0

महालक्ष्मी या गजलक्ष्मी व्रत : पितृपक्ष की अष्टमी के शुभ दिन मां लक्ष्मी को ऐसे करें प्रसन्न

शुक्रवार,सितम्बर 24, 2021
0
1
किसी भी खास अवसर पर श्री गणेश के इन नामों का पढ़ने अथवा जपने से जीवन के संकट दूर होकर मनुष्य को यश, सुख और सम्मान की प्राप्ति होती है। श्री गणेश ने अलग-अलग युगों में अलग-अलग अवतार लेकर संसार के संकट का नाश किया।
1
2
शुक्रवार का दिन बहुत महत्वपूर्ण होता है। प्रचलित मान्यताओं के अनुसार इस दिन माता लक्ष्मी, माता कालिका और संतोषी माता की पूजा की जाती है। खासकर इसे मां संतोषी का दिन माना जाता है। माता संतोषी भगवान गणेशजी की पुत्री हैं। आओ जानते हैं कि शुक्रवार का ...
2
3
ज्योतिष के अनुसार शुक्र हमारे जीवन में स्त्री, वाहन और धन सुख को प्रभावित करता है। यह एक स्त्री ग्रह है। कहते हैं कि इसके शुभ प्रभाव के कारण जातक ऐश्वर्य को प्राप्त करता है। शुक्रवार की प्रकृति मृ‍दु है। यह दिन एक और जहां लक्ष्मी का दिन है वहीं ...
3
4
आश्विन मास की संकष्टी चतुर्थी 24 सितंबर 2021, शुक्रवार को मनाई जा रही है। इस चतुर्थी को विघ्नराज संकष्टी चतुर्थी और संकटा चतुर्थी भी कहा जाता है।
4
4
5
पितृ पक्ष में आने वाले गजलक्ष्मी व्रत पूजन की सरल प्रामाणिक विधि... व्रत को 16 वर्षों तक ही पूरे करना चाहिए। यदि परिस्थितिवश 16 वर्ष के बाद उद्यापन नहीं कर सकें, तो व्रत को आगे भी किया जाता रहे, जब तक कि उद्यापन न हो। यह व्रत आश्विन (क्वांर) कृष्ण ...
5
6
महालक्ष्मी पर्व यानी गजलक्ष्मी व्रत है। इस दिन को दीपावली से भी अधिक शुभ माना जाता है। पितृ पक्ष में आने वाले गजलक्ष्मी व्रत में अगर अपनी राशि अनुसार विधि-विधान से पूजन किया जाए तो महालक्ष्मी विशेष प्रसन्न होती हैं और जीवन में धन-समृद्धि आती है।
6
7

पितृपक्ष 2021 : 10 काम की बातें

गुरुवार,सितम्बर 23, 2021
इन दिनों श्राद्ध पर्व चला रहा है और पितृपक्ष के 16 दिन हमारे पूर्वज धरती पर आते हैं। मान्यता है कि हमारे द्वारा शुद्ध मन से किया गया तर्पण उन्हें तृप्ति प्रदान करता है और वे हमें...
7
8
आपने राशि मित्रता, ग्रह मित्रता या भाव मित्रता के बारे में तो सुना ही होगा। यदि आप अनी राशि के अनुसार मित्र, प्रेमी या पत्नीं बनाएंगे तो जीवन में लाभ मिलेगा और कभी कोई गंभीर समस्या उत्पन्न न होगी। परंतु हम आपको ज्योतिष मान्यता पर आधारित संक्षिप्त ...
8
8
9
भाद्रपक्ष की शुक्ल अष्टमी (राधा अष्टमी) से लेकर श्राद्ध की अष्टमी तक महालक्ष्मी के विशेष आशीष झरते-बरसते हैं।
9
10
वर्ष में चार नवरात्रि आती है। चैत्र माह में बड़ी नवरात्रि और आषाढ़ और आश्विन माह में शारदीय नवरात्रि, जिसे छोटी नवरात्रि कहते हैं। पहले साधना की और दूसरी साधना और उत्सव दोनों की होती है। यह दोनों ही नवरात्रि आम लोगों के लिए है जबकि आषाढ़ और माघ मास ...
10
11
महालक्ष्मी व्रत के दिनों में या किसी भी खास अवसर पर मां लक्ष्मी के 108 नामों का जप करने से वैभव, कीर्ति, ऐश्वर्य, धन-धान्य, सुख-संपत्ति, सौभाग्य और आरोग्य और सम्मान की प्राप्ति होती है।
11
12
22 सितंबर 2021 बुधवार को बुध ग्रह अपनी स्वराशि कन्या से निकलकर तुला राशि में ( Mercury transit in libra 2021 ) गोचर कर रहा है। बुध सुबह 8 बजकर 18 मिनट पर तुला राशि में ( budh ka tula rashi me gochar ) प्रवेश कर गए हैं। तुला राशि के स्वामी ग्रह शुक्र ...
12
13
इस वर्ष श्री महालक्ष्मी व्रत का प्रारंभ सोमवार, 13 सितंबर 2021 को हुआ था। यह व्रत 16 दिनों तक चलता है। इस व्रत का समापन मंगलवार, 28 सितंबर 2021 को होगा। प्रतिवर्ष भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी से भी महालक्ष्मी व्रत का प्रारंभ होता है,
13
14
बुध राशि परिवर्तन 6 राशि वालों के करियर और कारोबार आदि के लिए शुभ रहेगा।
14
15
वर्ष में चार नवरात्रि आती है। चैत्र माह में बड़ी नवरात्रि और आषाढ़ और आश्विन माह में शारदीय नवरात्रि, जिसे छोटी नवरात्रि कहते हैं। पहले साधना की और दूसरी साधना और उत्सव दोनों की होती है। यह दोनों ही नवरात्रि आम लोगों के लिए है जबकि आषाढ़ और माघ मास ...
15
16
हमारे पौराणिक शास्त्रों में श्राद्ध पक्ष में आने वाली इंदिरा एकादशी का बहुत अधिक महत्व माना गया है। वर्ष 2021 में यह एकादशी 2 अक्टूबर, शनिवार को मनाई जा रही हैं।
16
17
हिन्दू कैलेंडर के अनुसार चैत्र, वैशाख, ज्येष्ठ, आषाढ़, श्रावण और भाद्रपद के बाद सातवां माह आता है आश्‍विन माह। हिन्दू पंचांग के अनुसार भादो माह की पूर्णिमा के बाद अर्थात 21 सितंबर 2021 से यह माह प्रारंभ हो चुका है। आश्विन मास का समापन 20 अक्टूबर ...
17
18
हिन्दू कैलेंडर के अनुसार चैत्र, वैशाख, ज्येष्ठ, आषाढ़, श्रावण और भाद्रपद के बाद सातवां माह आता है आश्‍विन माह। हिन्दू पंचांग के अनुसार भादो माह की पूर्णिमा के बाद अर्थात 21 सितंबर 2021 से यह माह प्रारंभ हो चुका है। इस माह से श्राद्ध पक्ष की शुरुआत ...
18
19
श्राद्ध पक्ष का आरंभ हो गया है। प्रत्येक मनुष्य को अपने पितरों का श्राद्ध अवश्य करना चाहिए। जो लोग अपने पूर्वजों अर्थात पितरों की संपत्ति का उपभोग तो करते हैं,
19