आरा कटर पर प्रतिबंध से कारीगर संकट में

खंडवा | Naidunia| पुनः संशोधित सोमवार, 2 जनवरी 2012 (00:39 IST)
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शासन द्वारा चक्रकार आरा पर प्रतिबंध लगाने से इस पर आश्रित छोटे सुनार परिवार के सामने आजीविका का संकट खड़ा हो गया है। इसके विरोध में छोटे कारीगरों ने लामबद्घ होकर खंडवा फर्नीचर कार्मिक यूनियन का गठन किया है। उन्होंने प्रशासन को चेतावनी दी है कि उनकी समस्या का निराकरण नहीं किया तो वे विधानसभा चुनाव का बहिष्कार करेंगे।


कार्मिक यूनियन के प्रतिनिधि राकेश मालवीया ने बताया कि प्रदेश सरकार ने मप्र काष्ठ चिरान (विनियमन) अधिनियम में 12 इंच व्यास तक के चक्रकार आरा कटर को विलोपित कर दिया है। इससे प्रदेश के हजारों छोटे प्रभावित हुए हैं। खंडवा शहर में भी करीब 75 परिवार अपनी आजीविका गँवा बैठे हैं। इस पर आश्रित एक हजार से अधिक लोगों पर इसका असर पड़ा है। इस आदेश के आधार पर वन विभाग इन्हें रंदा लगाने, झिरी और पताम निकालने में भी रोक रहा है। छोटे कारखानों को कराने की धमकी दी जा रही है। आरोप है कि कटर नहीं हटाने पर आगामी वर्ष में लाइसेंस नहीं देने का दबाव बनाया जा रहा है। विनोद मालवीय, दीपक बौरासी, रमेश पासी और यूनियन के अन्य प्रतिनिधियों ने कहा है कि इस संशोधन से बड़े आरा मशीन से चालकों को लाभ पहुँचाया गया है। सरकार ने प्रतिबंध तो लगा दिया लेकिन छोटे कारीगरों के पुनर्वास पर वैकल्पिक रोजगार की दिशा में कोई पहल नहीं की। उन्होंने बताया कि इसके विरोध में यूनियन पुरजोर ढंग से लड़ाई लड़ेगी। उन्होंने जनप्रतिनिधियों से छोटे कारीगरों का दर्द जानने और उसके निदान की दिशा में प्रयास करने की माँग की है।


लागत मूल्य बढ़ेगा


फनीर्चर के लघु व्यवसायियों के सामने सबसे बड़ी समस्या सीजन में आर्डर का माल तैयार कर प्रदान करने रहेगी। सगाई-विवाह या अन्य सामाजिक कार्यक्रमों में ग्राहक कुछ दिन पूर्व ही फर्नीचर का आर्डर करते हैं जिसे समय से पूर्व तैयार कर प्रदाय करना होता है। मशीनों के उपयोग की मनाही से समय तो अधिक जाया होगा ही लागत मूल्य में भी वृद्घि होगी।

काम बंद करना पड़ेगा

फर्नीचर व्यवसायी दीपक बोरासी का कहना है कि लागत मूल्य की वृद्घि से वे बड़े फर्नीचर व्यवसायी से प्रतिस्पर्धा नहीं कर सकेंगे। अंततः उन्हें काम ही बंद करना पड़ सकता है। श्री बोरासी के मुताबिक समय व लागत में इस तरह वृद्घि हो रही है।



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